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Saturday, September 19, 2026

मैं तो सपनों का सौदागर हूँ-शिवराज सिंह चौहान

प्रविष्टि तिथि: 19 September 2026 8:43PM by PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के विशेष विकास कदम 

मैं तो दिन में भी सपना देखता हूँ-शिवराज सिंह चौहान ने दिया नया उत्साह 

शनिवार को विदिशा में लखपति दीदियों से संवाद किया

 ज़िला समृद्ध मॉडल इस यादगारी बैठक में रचा गया एक नया इतिहास साबित हुआ


नई दिल्ली
: 19 सितंबर  2026
: PIB Delhi//>>वीमेन स्क्रीन डेस्क>> 

एक ऐतिहासिक आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को विदिशा में लखपति दीदियों से संवाद किया और जिला समृद्ध मॉडल बैठक में शामिल हुए।  यह एक यादगारी कार्यक्रम रहा। श्री चौहान की मौजूदगी से आयोजन में एक नया उत्साह बना रहा। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने आयोजन के मंच से सभी को विकास के सावों की झलक दिखाते कहा कि हुए मैं तो सपनों का सौदागर हूँ, दिन में भी सपना देखता हूँ, मेरा सपना यही है कि, विदिशा जिले का हर गाँव गरीबी मुक्त हो और विदिशा में रचा जाए एक और नया इतिहास। 

इस आयोजन में स्पष्ट संदेश दिया गया कि जिले के विकास की मॉनिटरिंग के लिए रियल टाइम डैशबोर्ड बनाएं। आयोजन का संदेश बहुत स्पष्ट था कि हमने समृद्ध विदिशा का एक मॉडल बनाया है, यह एक नया आगाज़ है।  एक बहुत ही नई और अच्छी शुरुआत। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अच्छे काम करना ही सच्चा धर्म है। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि विदिशा से शुरू हुआ ग्रामीण समृद्धि का नया मॉडल, हर परिवार को आजीविका से जोड़ने का संकल्प पूरा करने की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है। हर घर तक खुशहाली पहुँचने लगी है। 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के प्रवास पर रहे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने बाढ़ वाले गणेश मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश के दर्शन-पूजन किए। इसके बाद वात्सल्य स्कूल में आयोजित गणेश उत्सव में शामिल हुए और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने लखपति दीदियों से संवाद करते हुए महिलाओं की आजीविका और आय बढ़ाने के प्रयासों पर चर्चा की। वहीं, केंद्रीय मंत्री ने विदिशा में आयोजित जिला समृद्धि मॉडल की बैठक में शामिल होकर जिले को गरीबी मुक्त बनाने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की कार्ययोजना पर मंथन किया। इस दौरान युवाओं और महिलाओं को रोजगार से जुड़े कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आरसेटी के माध्यम से संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों, स्वरोजगार के अवसरों और प्रशिक्षण के बाद बैंक लोन उपलब्ध कराने की पहल की जानकारी दी।

समृद्ध विदिशा मॉडल का शुभारंभ

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे सपनों के सौदागर हैं और उनका सपना है कि विदिशा जिले का हर गांव गरीबी मुक्त हो। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा, जब हर परिवार के पास आय के दो-तीन साधन हों। इसी संकल्प के साथ विदिशा जिले में ‘समृद्ध विदिशा मॉडल’ का नया प्रयास शुरू किया गया है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। छोटे किसानों को आधुनिक कृषि के साथ गाय-भैंस पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों से जोड़कर कम से कम दो आजीविका के साधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। वहीं, महिलाओं को विभिन्न गतिविधियों से जोड़कर अधिक से अधिक लखपति दीदी बनाने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों और ग्रामीण परिवारों को एफपीओ के माध्यम से सामूहिक रूप से उत्पाद बेचने, कच्चे उत्पाद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षण के साथ बैंक लिंकेज की व्यवस्था भी की जाएगी। श्री चौहान ने कहा कि इस मॉडल को भारत सरकार, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक नया आरंभ और नया आगाज है, जिसकी शुरुआत विदिशा से की जा रही है और इस प्रयोग को आगे देश के अन्य क्षेत्रों में भी दोहराने का प्रयास किया जाएगा।

कौशल प्रशिक्षण के बाद बैंक लोन से शुरू होंगे बेटियों के अपने रोजगार, युवाओं को भी आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य

श्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘समृद्धि मॉडल, परियोजना प्रारूप, विदिशा जिला’ के विमोचन के अवसर पर कहा कि इस मॉडल के तहत महिलाओं के साथ-साथ युवाओं को भी आजीविका के अवसरों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि विदिशा जिले में 15 हजार युवाओं को आजीविका और रोजगार से जोड़कर उनका काम-धंधा शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है। आरसेटी के माध्यम से बेटियों और भाई-बहनों को ब्यूटीशियन और सिलाई जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। लगभग 30 दिन के प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों से उनके रोजगार को लेकर जानकारी ली जा रही है। उन्होंने बताया कि ब्यूटीशियन प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बेटियों में लगभग 70 प्रतिशत ने नौकरी के बजाय स्वयं का काम शुरू करने की इच्छा जताई है। ऐसे युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण के बाद बैंक लोन उपलब्ध कराने में सहयोग किया जाएगा, ताकि वे अपना स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि एक बैच के बाद दूसरा, फिर तीसरा और इसी क्रम में लगातार प्रशिक्षण बैच संचालित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बेटियों और युवाओं को हुनर से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

योजनाओं के समन्वय से होगा गांवों का विकास, ‘विदिशा डेवलपमेंट इंडेक्स’ से होगी मॉनिटरिंग

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विदिशा जिले में गरीबी उन्मूलन और विकास के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, ग्रामीण विकास, पंचायत, जल संसाधन, कौशल विकास और आजीविका मिशन सहित विभिन्न योजनाओं को एक साथ जोड़कर सामूहिक प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी 2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं में गांवों को गरीबी मुक्त बनाने और ग्राम पंचायत विकास की कार्ययोजना तैयार करने के प्रस्ताव पारित किए जाएं। ग्राम सभा, स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन, एफपीओ और पंचायत प्रतिनिधि मिलकर योजनाओं का निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी करेंगे। उन्होंने कहा कि सीएसआर, वित्तीय संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी के लिए रियल टाइम डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा और पानी, रोजगार, महिलाओं और किसानों की आय, कौशल, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग जैसे मानकों के आधार पर ‘विदिशा डेवलपमेंट इंडेक्स’ तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, ब्लॉक और जिले के विकास की हर छह माह में समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि कितने परिवारों की आय बढ़ी, कितनी लखपति दीदी बनीं, कितना जल संरक्षण एवं रिचार्ज हुआ, कितने स्वयं सहायता समूह और एफपीओ बाजार से जुड़े और  पंचायतों ने कितने नवाचार किए, जैसे बिंदुओं को भी मॉनिटरिंग में शामिल किया जाएगा। श्री चौहान ने कहा कि केवल अधिकारियों और कर्मचारियों के आधार पर ही मूल्यांकन नहीं होगा, बल्कि ग्राम सभा से फीडबैक लेकर समुदाय की भागीदारी के साथ पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।

माता-पिता का सम्मान और अच्छे कर्म ही सच्चे धर्म का मार्ग

केंद्रीय कृषि मंत्री एवं विदिशा सांसद श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज विदिशा में वात्सल्य स्कूल में आयोजित गणेश उत्सव में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने भगवान गणेश और कार्तिकेय जी की कथा सुनाते हुए माता-पिता के सम्मान और उनके महत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर यह संदेश दिया कि माता-पिता ही हमारे लिए पूरा संसार हैं। श्री चौहान ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे काम करना ही सच्चा धर्म है। सच बोलना, दूसरों की मदद करना और सदैव अच्छे कार्यों के लिए आगे बढ़ना धर्म है। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी आगे रहना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चों की प्रतिभा सामने आती है और व्यक्तित्व का विकास होता है। उन्होंने बच्चों को जीवन में बड़ा लक्ष्य रखने, अपनी प्रतिभा को पहचानने और अपने माता-पिता और गुरुजनों का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। श्री चौहान ने कहा कि 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान किए जाएंगे और 12वीं के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को आगे बढ़ने के लिए खेल, शिक्षा और अन्य आवश्यक गतिविधियों के माध्यम से हरसंभव सहयोग देने का प्रयास किया जाएगा।

****//(रिलीज़ आईडी: 2312565)


Sunday, May 10, 2026

:‘सुपर मॉम 2026’ समारोह में युवतियों और बच्चियों ने भी दिखाए कमाल

 महिला पत्रकारों और समाज सेविकाओं को सम्मानित भी किया गया 


चंडीगढ़
: 10 मई 2026:
(कार्तिका कल्याणी सिंह और मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन)::

मातृत्व, संघर्ष और महिलाओं की उपलब्धियों को समर्पित ‘सुपर मॉम 2026’ अवॉर्ड समारोह का आयोजन स्टार्स ऑफ ट्राइसिटी ग्रुप द्वारा चंडीगढ़ प्रेस क्लब में किया गया। कार्यक्रम में ट्राइसिटी क्षेत्र की महिला पत्रकारों और समाज सेविकाओं को उनके पेशेवर योगदान, सामाजिक सेवा और मातृत्व की प्रेरणादायक भूमिका के लिए सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वाली प्रमुख महिलाओं में शैली तनेजा, नितिका महेश्वरी, आकांक्षा सक्सेना, जसकिरण कपूर, गुरमिलन कौर, बानो पंडिता, डॉ. मनीका आहूजा, शीतल शर्मा, हरदीप विर्क, अनु शर्मा, कार्तिका सिंह, अर्चना सेठी, सोनिका भाटिया, नीना शर्मा, रजनी शर्मा, शीना, सोनिया अटवाल, रमा नरूला, रेनुका सलवान, वीना पाठक, कुसुम, सरयू दिनेश मद्रा, मोनिका शर्मा और सविता रानी शामिल रहीं।

कार्यक्रम में मीडिया कर्मियों, समाज सेवकों, गणमान्य नागरिकों और सम्मानित महिलाओं के परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिटीज़न्स अवेयरनेस ग्रुप के चेयरमैन सुरिंदर वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने सम्मानित महिलाओं को स्मृति चिन्ह और प्रशंसा पत्र प्रदान किए।

अपने संबोधन में सुरिंदर वर्मा ने कहा कि महिलाएं परिवार और समाज की मजबूत नींव हैं तथा जो महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अपने पेशेवर जीवन में भी उत्कृष्ट योगदान देती हैं, उनका सम्मान करना समाज के लिए गर्व की बात है।

कार्यक्रम में मातृत्व को समर्पित गीतों और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को भावुक कर दिया। एक विशेष आकर्षण साड़ी वॉक रही, जिसमें प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास और गरिमा के साथ भारतीय नारी की सुंदरता और संस्कृति को प्रस्तुत किया।

स्टार्स ऑफ ट्राइसिटी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने कहा कि ‘सुपर मॉम 2026’ उन महिलाओं को समर्पित है जो पत्रकारिता, समाज सेवा और नेतृत्व के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए मातृत्व की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं।

Tuesday, April 14, 2026

प्रधानमंत्री ने 'नारी शक्ति' के नाम एक पत्र साझा किया,

 प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 14 APR 2026 at 9:29AM by PIB Delhi

विधायी निकायों में महिला आरक्षण के संकल्प को फिर से दोहराया


नई दिल्ली
: 14 अप्रैल 2026: (PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन डैस्क)::

प्रधानमंत्री स्वयं नारी शक्ति की चिंता करते हैं। इसका पता आज ही एक विशेष खबर से चला। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पूरे भारत में महिलाएं विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने की पहल की सराहना कर रही हैं।

भारत की 'नारी शक्ति' के नाम लिखे गए एक पत्र को साझा करते हुए, प्रधानमंत्री ने दशकों से लंबित महिला आरक्षण को लागू करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2029 के लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की देशभर की माताओं, बहनों और बेटियों द्वारा सराहना की जा रही है।

भारत की 'नारी शक्ति' को समर्पित इस पत्र में, प्रधानमंत्री ने इस पुराने संकल्प को जल्द से जल्द पूरा करने के बारे में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:

“पूरे भारत में महिलाएं विधायी निकायों में महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की इस पहल की सराहना कर रही हैं।

भारत की 'नारी शक्ति' के नाम मेरा यह पत्र, दशकों से लंबित उस संकल्प को पूरा करने की हमारी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराता है...”

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“देशभर की हमारी माताएं-बहनें और बेटियां, साल 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की सराहना कर रही हैं।

भारत की नारी शक्ति को समर्पित अपने इस पत्र में मैंने दशकों से लंबित इस संकल्प को जल्द साकार करने के विषय में देशवासियों के साथ अपनी भावनाएं साझा की हैं…”

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पीके/केसी/डीवी//(रिलीज़ आईडी: 2251768) 

Wednesday, March 18, 2026

PAU ने कपड़े सजाने की तकनीकों पर दी ट्रेनिंग

ADC PAU on Wednesday 18th March 2026 at 10:58 AM Regarding campus training programme

ट्रेनिंग कैंपस के बाहर आयोजित की गई 


लुधियाना
: 18 मार्च, 2026: (मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन डेस्क):: 

महिला सशक्तिकरण के मकसद को और आगे बढ़ाते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अभियान और प्रोग्राम लगातार जारी हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने 'ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव' (RAWE) कार्यक्रम के तहत कपड़े सजाने की तकनीकों पर दो-दिवसीय कैंपस के बाहर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य कपड़ा सजावट के क्षेत्र में प्रतिभागियों के कौशल और रचनात्मकता को बढ़ाना था।

इस ट्रेनिंग में कुल 20 महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस कार्यक्रम में कपड़े सजाने की कई पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया, जिनमें 'टाई एंड डाई', 'स्टेंसिल प्रिंटिंग', 'ब्लॉक प्रिंटिंग' और कढ़ाई की विभिन्न शैलियाँ शामिल थीं।

प्रतिभागियों को 'विस्तार शिक्षा और संचार प्रबंधन विभाग' (EECM) के विशेषज्ञों से व्यावहारिक ट्रेनिंग मिली। इससे वे इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को सीख पाए, जिसका इस्तेमाल वे अपने निजी उपयोग के साथ-साथ संभावित व्यावसायिक उद्यमों के लिए भी कर सकते हैं।

यह ट्रेनिंग EECM विभाग की प्रमुख डॉ. रितु मित्तल गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले सजावटी कपड़ा उत्पाद बनाने में रचनात्मकता, रंगों के सही मेल, सही कपड़े के चुनाव और 'फिनिशिंग' तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।

पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में काफी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने व्यावहारिक सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया। ट्रेनिंग का समापन प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सीखे गए कौशल और तकनीकों का प्रदर्शन किया।

Friday, March 6, 2026

महिला सशक्तिकरण कोई ट्रॉफी नहीं--अनीता शर्मा

Ani Sharma on Friday 6th March 2026 at 3:14 PM Regarding Women Empowerment 

यह हर दिन के फैसलों से हासिल होने वाला अधिकार है

आर्थिक आत्मनिर्भरता और मानसिकता में बदलाव से ही संभव है वास्तविक सशक्तिकरण

महिला दिवस केवल उत्सव नहीं, समाज में बदलाव का अवसर

लुधियाना: 6 मार्च 2026: (मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर
नवकिरण वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से महिला सशक्तिकरण विषय पर एक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता शर्मा ने की।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अनीता शर्मा ने कहा कि महिला दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में मानसिकता परिवर्तन का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब इसे केवल चर्चा तक सीमित न रखकर व्यवहार और कार्य में उतारा जाए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार आर्थिक आत्मनिर्भरता है। इसके लिए महिलाओं को आधुनिक दौर के अनुरूप कौशल जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मार्केटिंग और कोडिंग सीखने के अवसर मिलने चाहिए। साथ ही वित्तीय साक्षरता के माध्यम से निवेश, बचत और टैक्स की बुनियादी जानकारी भी जरूरी है।

अनीता शर्मा ने कहा कि सशक्तिकरण की शुरुआत घर से होती है और घरेलू जिम्मेदारियों में समान भागीदारी आवश्यक है। बेटियों को केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वतंत्र सोच और निर्णय लेने की शक्ति दी जानी चाहिए।

उन्होंने समाज और कार्यस्थलों पर सुरक्षित व समावेशी वातावरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया तथा कहा कि महिलाओं को समान अवसर मिलने के साथ-साथ नेतृत्व की भूमिकाओं में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि इस महिला दिवस पर हम एक छोटा संकल्प लें—

किसी एक महिला के कार्य या विचार की खुलकर सराहना करें और उसे आगे बढ़ने के लिए समर्थन दें।

अनीता शर्मा ने ज़ोर देकर दोहराया कि कहा,

“सशक्तिकरण कोई ट्रॉफी नहीं है जिसे दिया जाता है, यह वह अधिकार है जिसे हम हर दिन के छोटे-छोटे फैसलों से सुरक्षित करते हैं।

Wednesday, November 26, 2025

संकटग्रस्त महिलाओं तक पहुंचने के लिए एक और नया प्रयास

प्रविष्टि तिथि: 26 NOV 2025 at 5:00PM by PIB Delhi//महिला एवं बाल विकास मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav

एनसीडब्ल्यू ने  नया हेल्पलाइन नंबर 14490 जारी किया

नई दिल्ली: 26 नवंबर 2025: (PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

सरकार द्वारा बहुत सी कोशिशों और लाख प्रयासों के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। इसलिए बार बार यही महसूस होता है कि अभी कुछ और कदम उठाए जाने चाहिएं।  इस ज़रूरत को देखते हुए अब एक नया हेल्पलाईन नंबर जारी किया गया है। केवल उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास भी है कि इस नंबर से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को नकेल डालने में मदद मिलेगी। 


राष्ट्रीय महिला आयोग ने
देश भर में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए त्वरित और अधिक सुलभ सहायता सुनिश्चित करने के लिए एक नई 24×7 संक्षिप्त कोड हेल्पलाइन-14490 शुरू की है। यह टोल-फ्री नंबर एनसीडब्ल्यू की मौजूदा हेल्पलाइन 7827170170 से जुड़ा एक आसानी से याद रखने योग्य संक्षिप्त कोड के रूप में कार्य करता है। इस पर संपर्क कर महिलाएं बिना किसी लागत या देरी के सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

नया संक्षिप्त कोड हिंसा, उत्पीड़न या किसी भी प्रकार के संकट का सामना कर रही महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए एनसीडब्ल्यू के चल रहे प्रयासों को मजबूत करता है। प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में हेल्पलाइन मार्गदर्शन प्रदान करेगा। साथ ही संबंधित प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कराएगा और समय पर सहायता प्रदान करना सुनिश्चित करेगा।

एनसीडब्ल्यू लोगों, सामुदायिक समूहों, संस्थानों और भागीदारों को इस जानकारी को व्यापक रूप से साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जागरूक रहें।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय।

****//पीके/केसी/आरकेजे//(रिलीज़ आईडी: 2197970)

Sunday, October 26, 2025

महिला शक्ति:बेलन ब्रिगेड की शराबखोरी के ख़िलाफ़ जंग:अनीता शर्मा की ज़ुबानी

Received on Saturday 25th October 2025 at 14:48 WhatsApp From  Belan Brigade Movements Lovers 

बलकौर सिंह गिल ने चेताया था-वे तुम्हारी हत्या भी करवा सकते हैं 

ज़िंदगी के अलग अलग रंगों को देखते और महसूस करते हुए सुश्री अनीता शर्मा के कुछ पोज़ 
लुधियाना: 26 अक्टूबर 2025: अनीता शर्मा ने जैसे मीडिया लिंक की टीम को बताया 

इस बार की पोस्ट वास्तव में एक गाथा है नशे के खिलाफ लड़ी गई लम्बी जंग की। यह कुछ बरस पहले की बात है जब हर गली मोहल्ले में नशा मौत का नंगा नाच खेल रहा था। अकालीदल की हकूमत थी। नशा बेचने वाले नशा बेचने बहुत बेबाकी से नशा बेचते रहे। नशा लेकर बहुत से युवा लोग मरते रहे।  पुलिस नशे की ओवर डोज़ कह कर मामले ठंडे बस्ते में डालती रही जैसे मरने वाले बेगाने या दुश्मन देश के हों। पुलिस कभी कभार केस भी दर्ज करती। किसी की जेब में से डेढ़ ग्राम नशा मिलता और किसी की जेब में से दो ढाई ग्राम। बस एक और एफ आई आर जमा हो जाती। अख़बारों में छोटी मोटी खबर आ जाती। रायकोट में रहने जानेमाने बुद्धिजीवी बैनर्जी परिवार ने भी नशे के इस दंश को झेला है। उस वक़्त अनीता शर्मा और उनकी टीम ने ही हौंसला दिया था बैनर्जी परिवार को।  उस समय कैलाश सिनेमा के नज़दीक रहने वाले भाटिया परिवार ने भी अपना जवान बेटा खोने की गुहार अनीता शर्मा की टीम को ही सुनाई थी। पुलिस स्टेशन आठ के आमने सर्दियों की देर रात तक लगे धरनों जानीमानी लेखिका डाक्टर गुरचरण कौर कोचर ने भी स्वयं धरने में पहुँच कर अनीता शर्मा की टीम से कहा था कि हम हैं आपके साथ। शोभा वशिष्ट अनु, शीबा सिंह, कार्तिका सिंह स्वयं मैडम बैनर्जी भी इस धरने में शामिल रहे। 

चुनाव शायद उस समय भी नज़दीक ही लगने लगे थे। नशे की आंधी को रोकने के लिए उठा था बेलन ब्रिगेड का तूफान। इसकी संस्थापक रही मैडम अनीता शर्मा जो नवकिरण वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्षा भी हैं। इसी दौर में सुप्रीम कोर्ट के जानमाने वकील और सियासतदान हरविंदर सिंह फूलका, मदन लाल बग्गा, मनप्रीत अयाली और बहुत से दुसरे लोग। कांग्रेस की नीता सतविंदर बिट्टी, जानेमाने उद्योगपति मेवा सिंह कुलार, वाम के सक्रिय नेता रमेश रत्न, उनके बेटे अरुण रत्न भी शामिल रहे। बहुत से इलाकों से सबंधित बहुत से नाम सब याद भी नहीं आ रहे। कई पत्रकार भी सक्रिय रहे आखिर मामला समाज को बचाने का था। 

अतीत के उस संघर्षमय और सुनहरी दौर पर अब मैडम अनीता शर्मा एक पुस्तक  ही लिख रही हैं।  जल्द ही वह किताब आपके सामने होगी। 

उस अतीत की बात करते हुए अनीता शर्मा कहती हैं कि उस समय तो हमने नशा सौदागरों के कहर को रोक लिया था लेकिन सियासतदानों पर भरोसा हमें महंगा पड़ा। बस थोड़ी देर ही हमें लगा कि हालात सुधर जाएंगे लेकिन हालात फिर बिगड़ते चले गए। याद आते हैं वृद्ध बुद्धजीवी बलकौर सिंह गिल जिन्होंने एक बज़ुर्ग की तरह अनीता शर्मा के सिर पर हाथ रख कर चेताया था कि बेटा नशे के कारोबार का मुकाबिला आसान नहीं है। फ़िल्मी कहानियां झूठी नहीं होती। काल्पनिक भी नहीं होती। उन कहानियों में सच होता है बस नाम और स्थान बदल जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा था बेटा वे लोग तुम पर गोली चलवा सकते हैं, एक्सीडेंट करवा सकते हैं और घर परिवार पर हमला करके गुंडागर्दी भी दिखा सकते हैं।

कुछ दिन बाद ही धमकियां भी मिलने लगीं। घर के आसपास संदिग्ध लोग भी घूमने लगे। घर में स्कूल जाने वाली दो बच्चियां और सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं। यह एक अग्नि परीक्षा थी। इसके बावजूद अनीता शर्मा ने कहा हार नहीं मानूंगी। मैं बलिदान को तैयार हूँ। हम चिंतित होते तो वह और भी उत्साह में आ कर अटल बिहारी वाजपेई जी की पंक्तियां गुनगुनाते... 

हार नहीं मानूंगा,
रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ।
गीत नया गाता हूं।
श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की इन पंक्तियों को याद दिलाते दिलाते अनीता शर्मा गीता उपदेश पर आ जाते। नुस्क्रा कर पूछते कुरुक्षेत्र की रणभूमि भूल गए क्या। बस अब कुरुक्षेत्र की रणभूमि पूरी दुनिया में फ़ैल गई है। आज भगवान कृष्ण भी नज़र नहीं आते। आज अर्जुन भी नज़र नहीं आता लेकिन यह जंग तो लड़नी ही होगी। सवाल तो मौजूद हैं कि कहां हैं आज के भीष्म पितामह? कहां हैं आज के गुरु द्रोणाचार्य? कहाँ हैं आज के विदुर? कहां हैं आज के युधिष्टर? कुरुक्षेत्र आज भी है! धर्मयुद्ध आज भी लड़ा जा रहा है।

आज पंजाब ही नहीं, पूरे देश में शराबखोरी और नशे की लत परिवारों की जड़ों को कमजोर कर रही है। परिवारों की जड़ों का कमज़ोर होना मतलब पूरे देश और समाज का कमज़ोर होना। 

जब कोई पुरुष शराब में डूब जाता है, तो उसके पीछे एक महिला होती है ---जो अपने घर को संभालती है, बच्चों के भविष्य को बचाती है, और खुद दर्द सहते हुए भी मजबूती से खड़ी रहती है।

लेकिन अब महिलाएं चुप नहीं हैं --बेलन ब्रिगेड महिलाओं की उस हिम्मत, साहस और जागरूकता का प्रतीक बन चुकी है।

शराब की लत का महिलाओं और परिवारों पर असर गंभीर असर होता है। 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, पंजाब में लगभग 29% पुरुष नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं, जिनमें से 7% पुरुष अत्यधिक शराब पीते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां पुरुष शराबी होते हैं, वहां घरेलू हिंसा के मामले 65% तक बढ़ जाते हैं।

पंजाब में स्थिति चिंताजनक है:

हर तीसरी महिला शराब या नशे से जुड़ी घरेलू हिंसा का शिकार होती है।

परिवार की 20–25% आय शराब पर खर्च हो जाती है।

ग्रामीण महिलाएं दोहरी मेहनत करती हैं --- खेतों में काम और घर दोनों संभालती हैं।

हालात पहले भी बिगड़ गए थे। तभी हुई बेलन ब्रिगेड की शुरुआत:

बेलन ब्रिगेड की शुरुआत उस पल हुई, जब महिलाओं ने कहा ---“अब बहुत हो गया।”

जो बेलन कभी रसोई का प्रतीक था, वह अब महिलाओं की शक्ति, आत्म-सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक बन गया है।

नवकिरण वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन के सहयोग से, हजारों महिलाएं इस आंदोलन से जुड़ चुकी हैं ----गृहिणियां, शिक्षिकाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और युवतियां।

हमारा उद्देश्य:

पुरुषों को नशे से मुक्त कराना, महिलाओं को सुरक्षा व आत्मनिर्भरता देना, और समाज में नशामुक्त वातावरण बनाना।

जब पुरुष गिरता है, तब महिला उठती है

जब पुरुष शराब या नशे में गिरता है, तब महिला घर की रीढ़ बनती है।

वह बच्चों की शिक्षा जारी रखती है।

वह घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाती है।

कई बार छोटे व्यवसाय शुरू कर परिवार को संभालती है।

और सबसे बढ़कर, वह हिम्मत नहीं हारती।

बेलन ब्रिगेड ऐसी ही हर महिला की शक्ति को सलाम करती है---जो दर्द को ताकत में बदल देती है।

हमारा काम और अभियान

1. जागरूकता अभियान --गांवों, स्कूलों और शहरों में शराब व नशे के खिलाफ़ रैलियाँ और संवाद।

2. पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) सहयोग -- शराबी पुरुषों को नशामुक्ति केंद्रों से जोड़ना।

3. कानूनी व मानसिक सहायता --महिलाओं को शिकायत, हेल्पलाइन और आत्मविश्वास के साधन देना।

4. आर्थिक सशक्तिकरण --महिलाओं को सिलाई, कला और उद्यम प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना।

गौरतलब है कि कई बरस पहले भी महिलाओं को इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा महिलाओं को दिलवाये थे तांकि वे पैसरों पर खड़ी हो सकें। इंक नतीजा भीअच्छा निकला। बहुत से घर आर्थिक तौर पर सशक्त हो गए। घर की चिंता खत्म हुई तो फिर बहुत से लोगों की देश की चिंता समाप्त हो गई। आखिर नशे के खिलाफ आंदोलन कमज़ोर हो गया। नशे के खिलाफ जंग में अनीता शर्मा जैसा समर्पण  और उस तरह की प्रतिबद्धता सभी के पास संभव भी नहीं। हाँ उनके पति श्री श्रीपाल शर्मा है हमेशां उनका साथ देते हैं। एंकरिंग, फोटोग्राफी और ड्राईविंग में उन्हें ख़ास मुहर्त हासिल है। कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक के रुट और रास्ते उन्हें याद रहते हैं। वह गाते भी बहुत अच्छा हैं। शब्दों के उच्चारण और सांस वाली सुर पर उनकी अच्छी पकड़ है। 

नशे के खिलाफ बरसों पहले चलाए गए इस युद्ध के बहुत से अच्छे परिणाम भी निकले। 

परिवर्तन की आवाज़ें भी सामने आईं:

> “जब मेरे पति ने शराब छोड़ दी, तो हमारे बच्चों ने फिर से सपने देखने शुरू कर दिए। बेलन ब्रिगेड ने मुझे हिम्मत दी।” ---मंजीत कौर, लुधियाना

> “हम पुरुषों से नहीं, नशे से लड़ रहे हैं। क्योंकि हर शराबी पुरुष के पीछे एक महिला होती है जो अपने परिवार को बचाना चाहती है।”   --- अनीता शर्मा, संस्थापक--बेलन ब्रिगेड

आगे की राह

बेलन ब्रिगेड सिर्फ एक अभियान नहीं, यह एक सामाजिक क्रांति है।

हर महिला की आवाज़ से एक घर बचता है।

हर पुरुष की सुध से एक नई पीढ़ी जन्म लेती है।

सभी मिलकर हम पंजाब को नशामुक्त, सुरक्षित और सशक्त बना सकते हैं।

हमसे जुड़ें:

अगर आप भी इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं------

बेलन ब्रिगेड से जुड़िए।

आपके हाथ का बेलन सिर्फ रसोई का औजार नहीं,

बल्कि समाजिक जागरूकता और महिला शक्ति का प्रतीक है।

नशे को लेकर आप अकेले नहीं हैं...! किसी भी कठिनाई को अपनी मजबूरी न बनने दें...!

📞 हेल्पलाइन: 9417423238

#BelanBrigade #Mahilashakti  #NashaMuktPunjab

#Aneeta Sharma 

#NavkiranWomenWelfare

Thursday, October 16, 2025

NCW मेंबर ने महिलाओं की शिकायतों का मौके पर ही हल किया

Received on Thursday 16th October 2025 at 19:27 Regarding NCW Special Meeting 

बाकी पर 15 दिनों के अंदर कार्रवाई का निर्देश


लुधियाना
: 16 अक्टूबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

महिलाओं के लिए बहुत से कानून भी बने हैं और बहुत से नियम भी। इसके बावजूद महिलाओं के साथ ज़्यादतियां रुक क्यूँ नहीं रहीं? क्यूं बार बार होता है उनका उत्पीड़न। क्योंन लम्बे समय तक लटकते रहते हैं महिला उत्पीड़न के मामले? कहीं पति के अवैध संबंध, कहीं दाज दहेज के मामले, कहीं पति की दूसरी तीसरी शादी का मामला, कहीं नौकरी में बॉस का दबाव, कहीं किसी न किसी तरह की धोखाधड़ी..! आखिर क्यूँ नहीं रुकता यह अन्याय और उत्पीड़न? वैवाहिक संबंध सात जन्मों के गिने जाते थे हमारे देश की संस्कृति में।  जन्म जन्म तक साथ निभाने वाले हम लोग कहाँ आ चुके हैं? लिव इन रिलेशन में? फिर भी ज़िंदगी में न सुख न चैन? आए दिन लड़कियों की हत्याएं! आए दिन महिलाओं की मौत! देवी के नौ रूपों की पुजा करने वाला हमारा समाज...., कंजक पूजा करने वाले हम लोग...! किस की नज़र लग गई है हमें? किस गर्त में गिर चुके हैं हम?

इन कानूनों और नियमों के बावजूद इन सवालों के जवाब वही ढूंढ़ता जिसके अंदर इन घटनाओं के कारण कोई दर्द उठा होता। लेकिन भगवान ढूंढ ही लेता है जिसे लोगों के दुःख दर्द दूर करने का जरिया बनाना होता है। इस मामले में भगवान ने ढूंढा ममता कुमारी को। ममता कुमारी इस समय राष्ट्रिय महिला आयोग की एक ऐसी सक्रिय सदस्य हैं जो बरसों से महिलाओं का उत्पीड़न दूर करने के लिए पूरी तरह समर्पित है। 

नेशनल कमीशन फॉर विमेन (NCW) की मेंबर ममता कुमारी ने गुरुवार को पुलिस को निर्देश दिया कि उनके दौरे के दौरान सुनी गई महिलाओं की सभी पेंडिंग शिकायतों का 15 दिनों के अंदर हल किया जाए।

कुमारी ने अलग-अलग बैकग्राउंड की महिलाओं के साथ एक मीटिंग की, जिसमें डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन, कमिश्नरेट पुलिस, लुधियाना रूरल पुलिस और खन्ना पुलिस के अधिकारी शामिल हुए।

सेशन के दौरान, अलग-अलग इलाकों की महिलाओं ने घरेलू हिंसा, दहेज और दूसरे हैरेसमेंट से जुड़ी शिकायतें शेयर कीं। मिली 44 शिकायतों में से ज़्यादातर का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया, और बाकी मामलों के लिए सख्त आदेश जारी किए गए।

मैडम ममता कुमारी ने जल्दी समाधान का भरोसा दिया और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को हर मामले की मॉनिटरिंग के लिए एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

इसके साथ ममता कुमारी ने ज़ोर देकर कहा, "महिलाओं को बिना डरे शिकायत दर्ज करानी चाहिए। NCW हर महिला को न्याय दिलाने के लिए कमिटेड है।" उन्होंने उनसे महिलाओं की भलाई को प्राथमिकता देने, उनकी चुनौतियों का तुरंत समाधान करने और सपोर्ट प्रोग्राम को असरदार तरीके से लागू करने को पक्का करने की अपील की। ​​

उन्होंने 'तेरे मेरे सपने' सेंटर के बारे में भी बात की, जो सफल शादियों के लिए युवाओं को मज़बूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि ये सेंटर शादी के इमोशनल, सोशल और साइकोलॉजिकल पहलुओं पर एक्सपर्ट काउंसलिंग देते हैं, जिससे लोगों को हेल्दी फैमिली रिलेशनशिप के लिए ज़रूरी चीज़ें मिलती हैं। 

Tuesday, September 30, 2025

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में हिंदी माह 2025 का भव्य समापन

 प्रविष्टि तिथि: 30 September 2025 at 8:56PM by PIB Delhi

महिलाओं के शक्ति स्वरुप से प्रवाहित प्रेरणा से सभी को लाभ - डॉ. प्रियंका मिश्रा

दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर समापन समारोह आयोजित

नई दिल्ली: 30 सितंबर 2025: (मीडिया लिंक रविंद्र//वीमेन स्क्रीन)::

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित हिंदी माह 2025 के दौरान एक महीने तक चला समारोह विभिन्न प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण समारोह के साथ धूमधाम से आज संपन्न हुआ। केंद्र की निदेशक (प्रशासन) डॉ. प्रियंका मिश्रा ने विजेताओं को सम्मानित किया। अलग-अलग श्रेणियों में लगभग 50 प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  के विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। जनपद-सम्पदा प्रभाग के प्रमुख प्रो.के. अनिल कुमार भी समारोह में उपस्थित थे। राजभाषा विभाग के प्रभारी प्रो. अरुण कुमार भारद्वाज ने कार्यक्रम का सुचारू रूप से संचालन किया और कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन दिया।


इस अवसर पर, डॉ. प्रियंका मिश्रा ने हिंदी माह के सफल आयोजन के लिए राजभाषा विभाग को बधाई दी। उन्होंने दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम इस पावन दिन पर आयोजित हुआ इसलिए इसकी सफलता निश्चित थी। उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि महिलाएं शक्ति का प्रतीक होती हैं और उनकी शक्ति से सभी लाभान्वित होते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “कुछ साल पहले हम हिंदी सप्ताह मनाते थे, फिर हमने हिंदी पखवाड़ा मनाना शुरू किया। इस साल हमने हिंदी माह का आयोजन किया। यह हिंदी भाषा के प्रति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”


कार्यक्रम की शुरुआत इंद्रेश कुमार शुक्ला द्वारा स्वास्ति वचन और अरविंद कुमार शर्मा द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। अंत में अदिति ने मधुर भक्ति गीत गाए और मनीषा पॉल ने गिटार पर भजन प्रस्तुत किया।

उल्लेखनीय है कि हिंदी माह 2 से 30 सितंबर तक मनाया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी के अनुसार, हिंदी माह मनाने का उद्देश्य हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और इसके प्रति जागरूकता पैदा करना था। इस पूरे महीने के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियाँ और प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। इनमें पुरानी या अब कम इस्तेमाल होने वाली हिंदी शब्दावली, स्वयं रचित कविता का पाठ, स्वास्ति गायन, मंगलाचरण और भक्ति गीत, रोजमर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाले क्षेत्रीय शब्दों पर लेखन प्रतियोगिताएं और भाषाविज्ञान/सर्वेक्षण से संबंधित विषयों पर प्रतियोगिताएं शामिल थीं।

कुल मिलाकर यह एक यादगारी आयोजन रहा जिसकी यादें सभी श्रोताओं और दर्शकों ने अपने दिल दिमाग में संजो लीं। 

***//पीके/केसी/एसके//(रिलीज़ आईडी: 2173486)

Friday, March 28, 2025

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई योजनाएं

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 28 MAR 2025 at 3:25 PM by PIB Delhi

केंद्र सरकार कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ाने के लिए बहुत कुछ कर रही है 


नई दिल्ली
: 28 मार्च 2025: (PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

रोज़गार और बेरोज़गारी पर आधिकारिक डेटा स्रोत आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) है, जिसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) वर्ष 2017-18 से आयोजित करता आ रहा है। सर्वेक्षण की अवधि हर साल जुलाई से जून तक होती है। नवीनतम उपलब्ध वार्षिक पीएलएफएस रिपोर्ट के अनुसार, 2021-22 से 2023-24 के दौरान 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं की सामान्य स्थिति पर अनुमानित श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) इस प्रकार है:

वर्ष

एलएफपीआर (प्रतिशत में)

 

2021-22

32.8

2022-23

37.0

2023-24

41.7

 

स्रोत: पीएलएफएस, एमओएसपीआई

पीएलएफएस डेटा देश में पिछले कुछ वर्षों में श्रम बल में महिलाओं की भागीदारी की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।

भुगतान वाले कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की ओर से देश भर में कई योजनाएं और नीतिगत प्रयाय किए जा रहे हैं।

सरकार ने स्टार्ट-अप्स की परिवर्तनकारी क्षमता को पहचानते हुए महिला उद्यमिता सहित उद्यमिता की मदद करने और उनका पोषण करने में कई पहल की हैं। स्टार्ट-अप इंडिया पहल के तहत सरकार से समर्थित 1,57,066 स्टार्ट-अप में से लगभग आधे 73,000 से अधिक स्टार्ट-अप में कम से कम एक महिला निदेशक हैं, जो नवाचार और आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

सरकार ने कंपनी अधिनियम, 2013 में ऐसे प्रावधान किए हैं, जिसके तहत कंपनियों को कम से कम एक महिला निदेशक रखना अनिवार्य है। परिणामस्वरूप, आज लगभग 11.6 लाख महिला निदेशक सार्वजनिक और निजी कंपनियों से जुड़ी हुई हैं।

रोज़गार सृजन के साथ-साथ रोज़गार क्षमता में सुधार करना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार एफएलएफपीआर के साथ-साथ समग्र एलएफपीआर को बढ़ावा देने के लिए स्टैंड अप इंडिया, मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप इंडिया, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि), महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस), सूक्ष्म तथा लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना (सीजीएमएसई), पंडित दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना (डीडीयू-जीकेवाई), ग्रामीण स्वरोजगार और प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) जैसी विभिन्न योजनाएं लागू करती है, जो रोजगार/स्वरोजगार और ऋण सुविधाएं प्रदान करती हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) एक प्रमुख ऋण-लिंक्ड सब्सिडी कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्र में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना करके स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है। इन योजनाओं के तहत अधिकांश लाभार्थी महिलाएं हैं।

स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) बदलाव के वाहक के रूप में काम करते हैं। आज 90 लाख एसएचजी से जुड़ी लगभग 10 करोड़ महिलाएं ग्रामीण परिदृश्य को आर्थिक रूप से बदल रही हैं। सरकार नमो ड्रोन दीदी और लखपति दीदी जैसी योजनाओं को लागू करती है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए तकनीकी क्षमताओं और वित्तीय स्थिरता को बढ़ाना है।

सरकार महिला श्रमिकों की रोज़गार क्षमता बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तहत महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, राष्ट्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों और क्षेत्रीय व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के नेटवर्क के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण प्रदान कर रही है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना भी महिलाओं को कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करती है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मिशन शक्ति के तहत ‘पालना’कार्यक्रम चलाती हैं। इसके तहत बच्चों को डे केयर सुविधाएं और सुरक्षा प्रदान करना मुख्य फोकस क्षेत्र है। ’पालना’ कार्यक्रम लागू करके मंत्रालय ने आंगनवाड़ी सह क्रेच (एडब्ल्यूसीसी) के माध्यम से बच्चों की देखभाल की मुफ्त सेवाएं प्रदान की हैं। आज तक, विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों के अनुसार, 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 11,395 एडब्ल्यूसीसी को मंजूरी दी गई है। मंत्रालय कामकाजी महिला छात्रावासों (डब्ल्यूडब्ल्यूएच) के संचालन और रखरखाव के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता भी प्रदान करता है। सरकार ‘पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई)’ के तहत डब्ल्यूडब्ल्यूएच के निर्माण के लिए राज्यों को पूंजी अनुदान भी प्रदान करती है।

महिला श्रमिकों को अनुकूल कार्य वातावरण के लिए श्रम कानूनों में कई प्रावधान भी शामिल किए गए हैं, जैसे कि मातृत्व अवकाश, बाल देखभाल अवकाश, समान वेतन आदि।

इसके अलावा, श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने जनवरी, 2024 में “महिला कार्यबल भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नियोक्ताओं के लिए परामर्श”जारी किया। इस परामर्श में अन्य बातों के साथ-साथ पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए रोजगार और देखभाल की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन की आवश्यकता का उल्लेख किया गया है, जिसमें पितृत्व अवकाश, माता-पिता की छुट्टी, पारिवारिक आपातकालीन अवकाश और लचीली कार्य व्यवस्था जैसे परिवार के अनुकूल उपाय शामिल हैं।

यह जानकारी महिला और बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

*****//एमजी/केसी/एके//(रिलीज़ आईडी: 2116196)

Wednesday, November 13, 2024

प्रेगनेंसी में महिलाओं को कितनी कैलोरी लेनी चाहिए//*डॉ अर्चिता महाजन

 Wednesday: 13th November 2024: Dr. Archita Mahajan//WhatsApp//Hindi//Women Health

सलाह:कैलोरी स्वस्थ्य फूड से पूरी करें ना कि मिठाई या जंक फूड से 


गुरदासपुर
: 13 नवंबर 2024: (वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

प्रेगनेंसी में महिला स्वास्थ्य पर *डा. अर्चिता महाजन बता रही हैं  कुछ विशेष बातें जिनका ध्यान रख कर सबंधित महिलाएं स्वास्थ्य से जुड़ी बहुत सी मुसीबतों से बच सकती हैं।  

डा. अर्चिता महाजन 
डा. अर्चिता महाजन ने बताया है कि अक्सर महिलाओं को जो उलझन रहती है कि प्रेगनेंसी के दौरान आम भूख से डबल खाना चाहिए ऐसा शायद इसलिए कहा गया होगा कि किसी तरह से गर्भवती बहू को ज़्यादा खाने के लिए प्रेरित किया जा सके। 

डबल तो किसी हालत में खाया ही नहीं जा सकता। परंतु इसके साथ-साथ कैलोरी का भी ध्यान रखना होगा कि आप कैलोरीज़ कहां से ले रहे हैं। कोल्ड ड्रिंक पीने से आपकी कैलोरी की जरूरत पूरी हो जाएगी परंतु वह आपके बच्चे को जरूरत के अनुसार पोषण नहीं दे पाएगी और कई तरह के विकार उत्पन्न होंगे।

पहली तिमाही में आपको कोई अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत नहीं होती। दूसरी तिमाही में, आपको प्रतिदिन 340 अतिरिक्त कैलोरी और तीसरी तिमाही में 450 अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत हो सकती है। ज़्यादा एक्टिव रहने वाली महिलाओं को 350-450 अतिरिक्त कैलोरी की ज़रूरत पड़ सकती है। वहीं, जो महिलाएं ज़्यादा काम नहीं करतीं, उन्हें 200-300 अतिरिक्त कैलोरी लेनी चाहिए। 

अतिरिक्त कैलोरी को स्वस्थ खाद्य पदार्थों से लेना चाहिए। मिठाई या जंक फ़ूड से मिलने वाली अतिरिक्त कैलोरी से बच्चे को ज़रूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। इससे आपके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। 

सुबह खाली पेट दलिया, ओट्स और ब्राउन ब्रेड का सेवन कर सकती हैं। इनमें फाइबर अधिक होता है, इससे आप कब्ज और गैस की समस्या से बच सकती हैंएक चम्मच (16 ग्राम) क्रीमी पीनट बटर से लगभग 100 कैलोरी और 3.5 ग्राम प्रोटीन मिलेगा।

आपको डा. अर्चिता महाजन ने स्वास्थ्य से सबंधित दिशा निर्देश और सलाह बहुत ही सादगी से और संक्षिप्त रहते हुए दिए हैं।   आपको यह पोस्ट कैसी लगी अवश्य बताएं। 

*डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्मा भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित

Wednesday, October 2, 2024

लड़कियों को उनके स्वयं के पांवों पर खड़ा करता है बेकरी उद्योग

पंजाब, नागालैंड, दिल्ली और गुजरात तक हर जगह है इसकी डिमांड 


मोहाली
//लुधियाना: 2 अक्टूबर 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

पढ़ाई लिखाई और शादी ब्याह के इलावा भी बहुत कुछ ऐसा होता है जिसकी ज़रूरत ज़िंदगी में कदम कदम पर पड़ती है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण  है नेक कमाई से कमाया हुआ पैसा जो आर्थिक रीढ़ को भी मज़बूत करता है और समाज में स्वयं के पांवों को भी बहुत ही अच्छी तरह से जमा भी देता है। इसी से शुरू होता है जीवन में अन्य सफलताओं का लगातार चलने वाला सिलसिला।   

बेकिंग की दुनिया में सक्रिय लड़कियों को हमारी टीम ने बहुत पहले देखा था पंजाब के शाही शहर पटियाला में। यह लड़कियां अपने  परिवारों साथ वहां लगे हुए किसान मेले में आई।  इन लड़कियों की बहन, भाई और माता-पिता सभी इनके साथ बहुत ही उत्साह से काम करवा रहे थे। इनके स्टाल पर इनके बनाए केक, बिस्कुट, पेस्ट्रियां  और बहुत कुछ दूसरा बेकिंग सामान भी हाथों हाथ बिक रहा था। इन्होने यह सारी ट्रेनिंग पंजाब कृषि विश्व विद्यालय लुधियाना से ली थी जिसने इन्हें पूरी तरह से आत्मनिर्भर बना दिया। 

काम शुरू करने के लिए परिवार ने थोड़ा सा इन्वेस्टमेंट किया और  सरकार विभागों ने इन्हें सब्सिडी जैसी मदद भी दे दी। बस देखते ही देखते काम चल निकला।  लिए घर  की ज़रूरत भी पड़ने लगी। डेढ़ दो बरस में ही इन लड़कियों का इन्वेस्टमेंट ही नहीं लौटा बल्कि मुनाफा भी आने लगा। क्यूंकि प्रोडक्टस साफ सुथरे, ताज़े और स्वादिष्ट  लोकप्रियता भी बढ़ने लगी। शादी, विवाह और अन्य आयोजनों के  बड़े आर्डर आने लगे। नौकरी करने वाली जॉब की इच्छा कब पीछे छूट गई इन्हें खुद भी याद नहीं रहा। 

आज भी बेकिंग की दुनिया में, लड़कियों का एक उल्लेखनीय समूह है जो न केवल अपने जुनून का पीछा कर रही हैं, बल्कि इसे घरेलू व्यवसायों में भी बदल रही हैं। उनकी यात्रा कड़ी मेहनत, रचनात्मकता और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। ये युवा उद्यमी रणनीतिक निवेश और अभिनव विपणन तकनीकों के माध्यम से अपने बेकिंग सपनों को वास्तविकता में बदल रहे हैं। 

नागालैंड से भी ऐसी लड़कियों की ऐसी ही सफलताओं की खुशखबरियां सामने आई हैं। वहां भी इनके लिए उचित शिक्षा और ट्रेनिंग का प्रबंध किया गया है। दिल्ली, मुंबई, गुजरात और अन्य हिस्सों में भी इसकी बहुत ज़्यादा डिमांड है। नागालैंड की लड़कियां भी इस तरफ तेज़ी से बढ़ रही हैं। 

नागालैंड में बेकरी इंडस्ट्री की तरफ बढ़ रहा है लड़कियों का इंटरेस्ट 

शिक्षा हर मामले में  मार्गदर्शन करती है और उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई लोगों ने कार्यशालाओं और पाठ्यक्रमों की भी तलाश की है जो उनके कौशल को बढ़ाते हैं और व्यवसाय परिदृश्य की उनकी समझ को व्यापक बनाते हैं। वे मज़बूत टीम बनाते हैं, अंतर्दृष्टि साझा करने और एक-दूसरे के प्रयासों का समर्थन करने के लिए एक-दूसरे के साथ सहयोग करते हैं। विभिन्न साधनों का उपयोग करके-चाहे वह मार्केटिंग के लिए सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म हो या वित्तीय प्रबंधन के लिए बजटिंग टूल-वे एक ऐसा रास्ता तैयार कर रहे हैं जो दूसरों को प्रेरित करता है।

यह देखना उत्साहजनक है कि बेकिंग उद्योग में चुनौतियों का सामना करते हुए ये लड़कियाँ एक-दूसरे का उत्थान कैसे करती हैं। उनकी कहानियां हमें याद दिलाती हैं कि जुनून, शिक्षा और टीम वर्क के साथ, सपने वास्तव में ताज़ी बेक्ड ब्रेड की तरह खूबसूरती से उग सकते हैं!

सफलता की इन सच्ची कहानियों ने एक नया इतिहास रचा है।  एक नया अध्याय लिखा है। एक नया मार्ग दिखाया है। यह मार्ग उन मंज़िलों की तरफ ले जाता है जहां अपना हाथ जगन्नाथ वाली कहावत सच साबित होने लगती है। 

आप भी  इनसे प्रेरणा लें। आप नौकरी मांगने वालों की भीड़ में से निकल कर नौकरी देने वालों के वर्ग में आ जाएंगी। बेकरी केवल एक क्षेत्र है जिसकी हमने चर्चा की है। बहुत से और फील्ड भी खुले हैं जिनके रास्ते भी आपको बुला रहे हैं और मंज़िलें भी। 

लगातार बने रहिए वीमेन स्क्रीन के साथ। 

Monday, September 16, 2024

दुनिया में लैंगिक अंतर अभी भी गंभीर चिंता का विषय है-UN

 सोमवार 16 सितंबर 2024 को सुबह 9:14 बजे               Monday 16th September 2024 at 9:14 AM

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट ने तुरंत वैश्विक कार्रवाई के लिए किया अलर्ट  

न्यूयॉर्क: 16 सितंबर 2024: (मीडिया लिंक//वूमेन स्क्रीन डेस्क)::

संयुक्त राष्ट्र की हाल ही में आई एक रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण है। अभी तक जारी लैंगिक अंतर पर इस रिपोर्ट ने जहां चिंता व्यक्त की है। इसके साथ ही इस रिपोर्ट ने इस अंतर को दूर करने के लिए तत्काल वैश्विक कार्रवाई के लिए अलर्ट किया है। रिपोर्ट कहती है की लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण में प्रगति के बावजूद, अब चार में से एक संसदीय सीट पर महिलाओं का कब्जा है और बहुत कम महिलाएं अत्यधिक गरीबी में जी रही हैं, लेकिन समस्या तो लगातार बानी हुई है। यह सिसला पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। रिपोर्ट से पता चलता है कि सतत विकास लक्ष्य 5- लैंगिक समानता प्राप्त करना- के लिए कोई भी संकेतक काम तक पूरा नहीं हो रहा है। इसमें युर तेज़ी लाए बिना बात नहीं बनेगी। 

वर्तमान गति से, संसदों में लैंगिक समानता प्राप्त करना 2063 तक नहीं हो पाएगा, और सभी महिलाओं और लड़कियों को गरीबी से बाहर निकालने में आश्चर्यजनक रूप से 137 साल लगेंगे। चार में से एक लड़की अभी भी बचपन में ही विवाहित है, जो इस बात पर प्रकाश डालता है कि अभी बहुत काम किया जाना बाकी है। लगातार संघर्ष और म्हणत की ज़रूरत अभी भी बानी हुई है।  

इस ख़ास रिपोर्ट में लैंगिक असमानता की चौंका देने वाली लागत पर जोर दिया गया है, जिसमें अपर्याप्त शिक्षा के कारण देशों को सालाना 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो रहा है और अगर डिजिटल लैंगिक अंतर जारी रहता है तो अगले पांच वर्षों में अतिरिक्त 500 बिलियन डॉलर का नुकसान होगा।

मुख्य सिफारिशें:

-निवेश बढ़ाएँ: महिला सशक्तिकरण और शिक्षा का समर्थन करने के लिए धन जुटाएँ

-भेदभाव समाप्त करें: महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और हिंसा को रोकने के लिए कानून बनाएँ और लागू करें

-कानूनी सुधार: अंतरंग साथी हिंसा को कम करने के लिए घरेलू हिंसा कानून लागू करें

विश्व नेताओं से आग्रह किया जाता है कि वे 22-23 सितंबर को होने वाले भविष्य के शिखर सम्मेलन और 2025 में बीजिंग घोषणा और कार्रवाई के लिए मंच की 30वीं वर्षगांठ पर इन महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने के लिए निर्णायक कार्रवाई करें।

जैसा कि यूएन महिला कार्यकारी निदेशक सिमा बहौस ने जोर दिया, "प्रगति प्राप्त करने योग्य है, लेकिन यह पर्याप्त तेज़ नहीं है। हमें लैंगिक समानता के लिए आगे बढ़ते रहना चाहिए"

Thursday, August 15, 2024

इस बार फोकस में अफगान महिलाएँ और लड़कियाँ

तालिबान के 3 साल के शासन में महिलाओं का संघर्ष जारी 


अफ़गानिस्तान: 12 अगस्त 2024: (यूएन वूमेन//द वूमेन स्क्रीन डेस्क)::

अगस्त 2021 में जब से तालिबान ने अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा किया है, तब से महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों और स्वतंत्रता पर गंभीर हमले हो रहे हैं। तालिबान शासन ने 70 से ज़्यादा ऐसे आदेश और निर्देश लागू किए हैं जिनका उद्देश्य विशेष रूप से अफ़गान महिलाओं की स्वायत्तता और रोज़मर्रा की ज़िंदगी को सीमित करना है। ये प्रतिबंध शिक्षा, रोज़गार, प्रजनन अधिकार, मातृ स्वास्थ्य देखभाल, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में फैले हुए हैं।

अफ़गान महिलाएँ इन भारी चुनौतियों के बावजूद असाधारण लचीलापन और साहस का प्रदर्शन करती रहती हैं। समानता और सम्मान के लिए लड़ने का उनका दृढ़ संकल्प उनके रोज़मर्रा के जीवन में स्पष्ट दिखाई देता है - अपने घरों को छोड़ने के सरल से लगने वाले काम से लेकर व्यवसाय चलाने, समुदायों को संगठित करने और अपने अधिकारों की वकालत करने के जटिल प्रयासों तक। दबे होने के बजाय, उनका संकल्प मज़बूत होता दिख रहा है।

यूएन वूमेन अफ़गानिस्तान में ज़मीनी स्तर पर एक दृढ़ सहयोगी बनी हुई है, जो हर दिन अफ़गान महिलाओं और लड़कियों के साथ खड़ी है। हमारी रणनीति विभिन्न पहलों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने पर केंद्रित है, जिसमें महिला संगठनों के लिए समर्थन बढ़ाना, जीवन रक्षक सेवाएँ प्रदान करने वाली महिला मानवीय कार्यकर्ताओं का समर्थन करना और महिलाओं के नेतृत्व वाले व्यवसायों में निवेश करना शामिल है। यह महत्वपूर्ण कार्य हमारे अफ़गान महिला कर्मचारियों के अमूल्य योगदान के माध्यम से संभव हुआ है, जो हमारे मिशन के केंद्र में हैं।

जैसे-जैसे संघर्ष जारी है, अफ़गान महिलाओं की अटूट भावना वैश्विक एकजुटता और समर्थन के महत्व की एक शक्तिशाली याद दिलाती है। फोटो: यूएन वूमेन/सैयद हबीब बिडेल

Tuesday, August 13, 2024

26 वर्षीय अफ़गान पत्रकार लीना की कहानी देती है प्रेरणा

 खतरों भरे माहौल में भी चलाती है महिला रेडियो स्टेशन  

फोटो साभार: यूएन विमेन/ सईद हबीब बिडेल  Photo credit: UN Women/ Sayed Habib Bidell
अंतर्राष्ट्रीय फीचर डेस्क//चंडीगढ़//12 अगस्त 2024:(वीमेन स्क्रीन)::

सन 1985 में एक हिंदी फिल्म आई थी-मेरी जंग-जिसमें एक गीत था--ज़िंदगी हर कदम इक नई जंग है। इस गीत के इस मुखड़े में जो सच्चाई छिपी है वह सच्चाई ज़िन्दगी के हर क्षेत्र में एक हकीकत की तरह नज़र आती महसूस है। उस फिल्म की दुनिया बेशक भारत वर्ष की ज़मीन थी लेकिन भारत से बाहर भी यह जंग सचमुच ज़रूरी होती चली जा रही है। घर हो या बाहर, गली हो या बाजार, कॉलेज हो या अस्पताल..हर जगह हर कदम इक नई जंग है। जंग का मैदान अपना देश हो या विदेश लड़नी ही पड़ती है। आज हम बात कर रहे हैं अफगानिस्तान की। 


कदम कदम पर खतरों और सख्तियों के बावजूद
अफ़गानिस्तान में महिलाओं ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना बंद नहीं किया है, और न ही हमें करना चाहिए। अफ़गानिस्तान में तालिबान के कब्जे के तीन साल बाद, यूएन महिलाएँ अफ़गान महिलाओं और लड़कियों के साथ काम करना जारी रखती हैं जो अपनी आज़ादी और अधिकारों के लिए लगातार अनथक संघर्ष कर रही हैं।

पश्चिमी अफगानिस्तान में फराह दरिया के किनारे एक पश्तो इलाका है जो बहुत महत्व का भी है। इसकी सीमा ईरान से लगती है। इसी ख़ास शहर फराह की 26 वर्षीय अफ़गान पत्रकार लीना सचमुच बहुत बहादुर है। उसने खतरों के संसार को नज़दीक से देखा है। वह बताती है-"मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई की थी और एक पत्रकार के रूप में सात साल तक लगातार काम भी किया। यह सब आसान नहीं था लेकिन मैंने इसे जारी रखना ही उचित समझा। इस संकल्प के बावजूद जब यह मुल्क तालिबान के कब्जे में आ गया तो मैंने अपने काम से छुट्टी ले ली।  शायद मुझे डर लग रहा था।"

हालांकि लीना को कभी भी सीधे तौर पर धमकियों का सामना नहीं करना पड़ा था लेकिन 15 अगस्त 2021 को तालिबान के अफ़गानिस्तान पर कब्ज़ा करने और "वास्तविक अधिकारी" (DFA-The Taliban (referred to as the de facto authorities) बनने के बाद से कई अन्य महिलाओं को धमकियों का सामना करना पड़ा। 

इससे नज़र आने लगा था कि हालात कितने भयावह होने लगे हैं। स्थिति लैंगिक समानता पर दशकों की प्रगति तालिबान द्वारा पेश किए गए 70 से अधिक आदेशों, निर्देशों और बयानों के ढेर से मिट गई। इसमें देर नहीं लगी। प्रगति अतीत की बात होती चली गई। गौरतलब है कि तालिबान के बयान और नीतियां महिलाओं और लड़कियों के जीवन के लगभग हर पहलू में उनके अधिकारों को प्रतिबंधित करते हैं। 

इसके बावजूद अफगानिस्तान में कहीं न कहीं  महिला संकल्पों ने अपनी मज़बूती का अहसास कराया। इस पोस्ट के साथ जो यह छवि आप देख रहे हैं यह एक महिला संचालित रेडियो स्टेशन के स्टूडियो के अंदर क्लिक की गई है। यह रेडियो चेतने जगाता रहता है। 

यह रेडियो स्टेशन तमाम सख्तियों और खतरों के बावजूद अफ़गानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों को अधिकारों के बारे में शिक्षा और जागरूकता ला रहा है। क्या आपको यह तस्वीर और यह सच्चा ब्यौरा  देता। यदि यह महिलाएं कर सकती हैं तो आप क्यूं नहीं? खुद के मन भी टटोलिये और अपनी सहेलियों से भी पूछिए। जो आपको नहीं जानती लेकिन आपके आसपास कुछ न कुछ करते हुए सक्रिय रहती हैं उनसे भी पूछिए। 

विवरण और फोटो यूएन विमेन से साभार 

Friday, May 17, 2024

लोकसभा चुनाव में होगा महिलाओं का महत्वपूर्ण रोल मनीषा कपूर

Saturday 17th May 2024 at 19:05 

लुधियाना महिला कांग्रेस संसद के लिए हुई सड़कों पर भी सक्रिय 

लुधियाना में भी महिला शक्ति खुल कर आई कांग्रेस के हक़ में 

लुधियाना: 17 मई 2024: (मीडिया लिंक//पंजाब स्क्रीन डेस्क)::
इस बार लोकतंत्र के ज़रिए सत्ता पलटने की तैयारी ज़ोरों पर है। आर पार की इस लड़ाई में कांग्रेस ने एक बार फिर अपनी मौजूदगी का अहसास दिलाया है। कांग्रेस समर्थक महिला शक्ति घर बार छोड़ कर इस बड़े परिवार के लिए मैदान में हैं। सड़क हो या सर्कट हाऊस, शहर हो या गांव-ये महिलाएं हर जगह पार्टी के लिए सिर-धड़ की बाज़ी लगाने को सरगर्म हैं। महिलाएं जब ठान लेती हैं तो फिर नतीजे वही आते हैं जो वे चाहती हैं। 

स्थानीय आत्म नगर में महिला कांग्रेस की टीम को और सक्रिय कर के आगे बढ़ाते हुए सोनीका शर्मा को आत्म नगर से, वंदना रानी को हल्का साउथ से महिला कांग्रेस में जनरल सेक्रेटरी नियुक्त किया गया है। मनीषा कपूर ने कहा कि महिला कांग्रेस की प्रत्येक साथी लोक सभा निर्वाचन में राजा वड़िंग को ज़्यादा से ज़्यादा वोट दिलवाएगी क्योंकि महिला दूसरी महिला के घर रसोई तक जाकर वोट मांग सकती है। महिलाओं को ही महिलाओं के सभी दुःख दर्द मालुम होते हैं। 

प्रत्येक महिला बूथ लेवल तक अपना सशक्त रोल निभाएंगी सोनिका शर्मा तथा वंदना रानी ने कांग्रेस पार्टी के हाईकमान का धन्यवाद किया। इन्होने ज़ेह भी कहा कि है पार्टी लीडरशि की आशाओं पर पूरी उतरेंगे और सरे माहौल का रंग बदल कर दिखा देंगीं। इस बार कांग्रेस ही आएगी। 

इस अवसर पर राजेंद्र सिंह भानु प्रताप सिंह मोहिंद्र सिंह नीलम पनेसर इन्द्र पनेसर सविता कपूर, निम्मी रानी, सुमति रानी, नीलम शर्मा, शगुन कपूर,  बलजिंदर कौर आदि महिला कांग्रेस के साथी बड़ी संख्या में पहुंची महिला लीडर मनीषा कपूर ने कहा कि लुधियाना में महिला कांग्रेस पहले दिन से ही अलग अलग क्षेत्र में काम कर रही है। कांग्रेस के साथियों का धन्यवाद करती हूँ जिन्होंने कांग्रेस के प्रचार प्रसार में हमेशा हर क़दम पर सरगर्मी से साथ दिया। 

Wednesday, January 17, 2024

जीजाबाई-जिसने संघर्षों से जीती ज़िंदगी की हर जंग

 17 जनवरी 2024//महिलाएँ//भारत 

बाधाओं से लड़ती अकेली माँ का सहारा बनी यूएनडीपी परियोजना


महिला संसार के संघर्षों की एक और सच्ची कहानी 

संयुक्त राष्ट्र संघ:17 जनवरी 2024: (UNDP India//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

जीवन एक निरंतर संग्राम ही तो है। एक गीत भी बहुत लोकप्रिय हुआ था--ज़िंदगी हर कदम इक नई जंग है। वास्तव में हम सभी को जीवन में कदम कदम पर चुनौतियों का सामना करना ही पड़ता है। संघर्षों के इस तूफ़ान में मदद के हाथ भी उठते हैं। कभी सरकार की मदद तो कभी समाज की मदद। कोविद में भी बहुत से लोगों का जीवन कठिन हो गया था।  

कोविड-19 के दौरान सफ़ाई साथियों के लिए आरम्भ की गई, यूएनडीपी की उत्थान पहल, 2022 के बाद से लगभग साढ़े 11 हज़ार सफ़ाई साथियों को, सरकार की कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँचाने में सफल हुई है। इस कार्यक्रम से लाभ उठाने वाली एक महिला सफ़ाई कर्मी-जीजाबाई अशोक मकासरे की कहानी। 

54 वर्षीय जीजाबाई अशोक मकासरे, चार बच्चों की माँ और अकेली अभिभावक हैं. उनके पति भी सफ़ाई साथी थे. ''हम दोनों कचरा बीनने का काम करते थे।  हमने साथ मिलकर बहुत कठिन समय गुज़ारा. उनके निधन के बाद मेरी यही इच्छा है कि मैं बच्चों को उत्कृष्ट सुविधाएँ प्रदान कर सकूँ।"

जीजाबाई, महाराष्ट्र के जलना गाँव में अकाल पड़ने पर युवावस्था में ही अपने परिवार के साथ मुम्बई आ गई थीं। 

उनके पिता ने शहर आकर कूड़ा बीनने का काम शुरू किया, लेकिन गुज़ारा मुश्किल से होने के कारण जीजाबाई भी इसी काम में लग गईं।  

"मैं पढ़ी-लिखी नहीं थी, और हमें जीवित रहने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा था, इसलिए मैंने भी अपने पिता के साथ काम पर जाना शुरू किया और फिर ख़ुद भी यही पेशा अपना लिया।”

जीजाबाई, स्वयं सहायता समूह की चर्चाओं में हिस्सा लेने लगीं और बाद में  नए सफ़ाई साथियों को कचरे से खाद बनाना सिखाने लगीं। 

चूँकि मैं इतने लम्बे समय से काम कर रही हूँ, नए सफ़ाई साथियों को कुछ हुनर ​​सिखा सकती हूँ. जैसेकि अपशिष्ट से मिट्टी किस तरह बनाई जाती है या फिर कामकाज के दौरान अपने-आप को ख़तरों से सुरक्षित कैसे रखा जाए।"

“मैं काफ़ी समय तक अस्वस्थ रही, काम छूट गया था और मेरे पास ज़्यादा बचत भी नहीं थी. उम्मीद है कि स्वास्थ्य कार्ड और बीमा योजना के कारण अब कभी मुझे दोबारा ऐसा बुरा वक़्त नहीं देखना पड़ेगा।”

जीजाबाई स्वयं सहायता समूह की चर्चाओं में भाग लेती हैं और अन्य सफ़ाई साथियों को कचरे से ख़ाद बनाना भी सिखाती हैं। 

जीजाबाई ने बताया कि काम के दौरान, किस तरह कई बार उन्हें आवारा कुत्तों ने काट लिया, या फिर काँच के टुकड़ों या अन्य चीज़ों पर पैर पड़ने से कई दुर्घटनाएँ घटीं। 

“यह आसान काम नहीं है. काम करते समय पता नहीं चलता कि अगले पल क्या होने वाला है. आप केवल इतना कर सकते हैं कि तैयार और सतर्क रहें।”

जीजाबाई को उत्थान के बारे में स्त्री मुक्ति संगठन से पता चला, जिसने मुम्बई में सफ़ाई साथियों के बीच जागरूकता का नेतृत्व किया है। 

उसने एक नया बैंक खाता खोला और उसे अनिवार्य दस्तावेज़ों के साथ जोड़ा। 

उन्होंने पैन व आधार कार्ड, तथा ई-श्रम के लिए नामांकन कराया और वो प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना में भी धनराशि जमा कर रही हैं। 

जीजाबाई का कहना है, “उत्थान सदस्यों की मदद से, मैंने सभी सामाजिक कल्याण योजनाओं का विकल्प चुना, ताकि हमारे बच्चे भी सीखकर आगे बढ़ें और ख़ुद की रक्षा करने में समर्थ हों।"

Friday, December 1, 2023

अंतर्राष्ट्रीय महिला कैंसर सम्मेलन-2023 शुरू

Friday 1st December 2023 at 18:19

200 से अधिक डॉक्टरों और 100 नर्सों ने भाग लिया


चंडीगढ़: 01 दिसंबर 2023: (कार्तिका सिंह//पंजाब स्क्रीन)::

अंतर्राष्ट्रीय महिला कैंसर सम्मेलन-2023 का पहला दिन  जोशो-खरोश की सफलता वाला था। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च और अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) द्वारा आयोजित सम्मेलन की शुरुआत आयोजन सचिव डॉ. गौरव प्रकाश के स्वागती भाषण से हुई। 

इस कॉन्फ्रेंस में चंडीगढ़ और पड़ोसी राज्यों से 200 से ज्यादा डॉक्टर और 100 नर्सें शामिल होने आईं।  जिज्ञासा बहुत कुछ और साँझा करने की भी थी। तेज़ी से आम होते जा रहे महिला कैंसर को लेकर मेडिकल विज्ञानं पूरी तरह सतर्क है और इस दिशा में आगे कदम भी बढ़ा रहा है। 

पीजीआईएमईआर के निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने इस ऐतिहासिक सम्मेलन को संबोधित किया और एएससीओ के साथ सहयोग की सराहना भी की।  इसके साथ ही कैंसर रोगियों की सर्वोत्तम देखभाल के लिए इस सहयोग का उपयोग करने का आश्वासन भी दिया।

एएससीओ के रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट प्रो. ओनीनी बालोगुन ने दुनिया भर में महिलाओं के कैंसर की निगरानी की और बहु-विषयक कैंसर क्लिनिक के महत्व पर जोर दिया। कैंसर पर उनके विचार बहुत ही जानकारी भरे थे। दुनिज़ा भर में गंभीर होते जा रहे इस विषज पर आईजीआई चंडीगढ़ के सम्मेलन में बहुत कुछ कहा सुना गया। 

गौरतलब है कि स्तन कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर,फेफड़ों का कैंसर, स्मोकिंग के दौरान छोड़ा जाने वाला धुआं जो सांस के द्वारा दूसरों के भीतर जाता है:थायराइड कैंसर,थायराइड कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल हैंः ओवेरियन कैंसर और सर्वाइकल कैंसर उन में प्रमुख हैं जिनका खतरा काफी गंभीर गिना जाता है। 

एसोसिएशन ऑफ गायनोकोलॉजिकल ऑन्कोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया (एजीओआई) के अध्यक्ष डॉ. रूपिंदर सेखों ने भारत में विभिन्न कैंसर के लिए महिलाओं की जांच के महत्व और सीमाओं पर जोर दिया। इस संबंध में उठाए जा रहे कदमों और नई खोजों की भी  चर्चा हुआ। 

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख और आयोजन अध्यक्ष प्रोफेसर वनिता सूरी ने बहु-विषयक कैंसर देखभाल के महत्व पर प्रकाश डाला। उनका भाषण बहुत हजी जानकारी भरा था। उन्होंने इस संबंध में बहुत सामने रखा। 

इसी सम्मेलन में एएससीओ के प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय संकाय, डॉ. मैरी मैककॉर्मैक और डॉ. चार्ल्स डनटन ने भी भाग लिया। विभिन्न विचार-विमर्शों में स्तन कैंसर में साक्ष्य आधारित सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में चर्चा की गई। युवा शोधकर्ताओं ने ई-पोस्टर के माध्यम से अपना शोध प्रस्तुत किया। 

क्विज़ के प्रारंभिक दौर में नौ मेडिकल कॉलेजों का प्रतिनिधित्व करने वाली 14 टीमों की उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई। कुल मिलाकर सम्मेलन का वह पहले दिन अपने आप में एक शैक्षणिक दावत जैसा था।इस मौके बहुत कुछ नया सीखने को मिला।