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Tuesday, April 14, 2026

प्रधानमंत्री ने 'नारी शक्ति' के नाम एक पत्र साझा किया,

 प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 14 APR 2026 at 9:29AM by PIB Delhi

विधायी निकायों में महिला आरक्षण के संकल्प को फिर से दोहराया


नई दिल्ली
: 14 अप्रैल 2026: (PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन डैस्क)::

प्रधानमंत्री स्वयं नारी शक्ति की चिंता करते हैं। इसका पता आज ही एक विशेष खबर से चला। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पूरे भारत में महिलाएं विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने की पहल की सराहना कर रही हैं।

भारत की 'नारी शक्ति' के नाम लिखे गए एक पत्र को साझा करते हुए, प्रधानमंत्री ने दशकों से लंबित महिला आरक्षण को लागू करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2029 के लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की देशभर की माताओं, बहनों और बेटियों द्वारा सराहना की जा रही है।

भारत की 'नारी शक्ति' को समर्पित इस पत्र में, प्रधानमंत्री ने इस पुराने संकल्प को जल्द से जल्द पूरा करने के बारे में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:

“पूरे भारत में महिलाएं विधायी निकायों में महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की इस पहल की सराहना कर रही हैं।

भारत की 'नारी शक्ति' के नाम मेरा यह पत्र, दशकों से लंबित उस संकल्प को पूरा करने की हमारी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराता है...”

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“देशभर की हमारी माताएं-बहनें और बेटियां, साल 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की सराहना कर रही हैं।

भारत की नारी शक्ति को समर्पित अपने इस पत्र में मैंने दशकों से लंबित इस संकल्प को जल्द साकार करने के विषय में देशवासियों के साथ अपनी भावनाएं साझा की हैं…”

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पीके/केसी/डीवी//(रिलीज़ आईडी: 2251768) 

Friday, March 27, 2026

करीब 620,000 महिलाओं और लड़कियों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा

UN Women on Mar 27, 2026, 5:37 PM Regarding Women and Girls in Lebanon

बैरुत: 27 मार्च 2026 को जारी प्रेसब्रीफिंग की विज्ञप्ति 

लेबनान में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र महिला द्वारा प्रेस ब्रीफिंग

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जिनेवा के पैलेस डेस नेशन्स में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र महिला प्रतिनिधि गिएलन एल मेसिरी द्वारा दिए गए भाषण के अंश।

[जैसा दिया गया।]

बेरुत – सुप्रभात। मैं आज बेरुत से आपसे जुड़ रही हूँ, जहाँ मैं लेबनान में इस नवीनतम तनाव के महिलाओं और लड़कियों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दूंगी।

इस संघर्ष में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति को समझना इस संकट के संपूर्ण मानवीय प्रभाव को समझने के लिए आवश्यक है।

2 मार्च से अब तक अनुमानित 620,000 महिलाओं और लड़कियों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

यह लेबनान की लगभग एक चौथाई महिलाओं और लड़कियों का प्रतिनिधित्व करता है, और विस्थापितों में से आधे से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करता है - जिनमें लेबनानी, सीरियाई, फिलिस्तीनी और प्रवासी समुदाय शामिल हैं।

यह तनाव ऐसे संदर्भ में बढ़ रहा है जहां महिलाओं को पहले से ही कई तरह की असमानताओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें आय तक सीमित पहुंच, असमान कानूनी सुरक्षा और सेवाओं तक सीमित पहुंच शामिल है।

आज विस्थापन, आजीविका के नुकसान और कमजोर समर्थन प्रणालियों के कारण ये कमजोरियां और भी बढ़ रही हैं।

मैं ऐसी महिलाओं और लड़कियों से मिली हूँ जिन्हें विनाशकारी विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ा है - बिना किसी स्पष्ट गंतव्य के रात में अपने घरों से भागना, अपने परिवारों की आजीविका खोना और अपनी सुरक्षा की भावना और उन सभी चीजों को पीछे छोड़ना जो उनके लिए परिचित हैं।

विस्थापित महिलाओं और लड़कियों में से 85 प्रतिशत औपचारिक आश्रय स्थलों से बाहर रह रही हैं। वे भीड़भाड़ वाले अपार्टमेंटों और अनौपचारिक व्यवस्थाओं में रह रही हैं, जिनमें से सबसे बड़ी संख्या बेरूत और माउंट लेबनान में है।

ये केवल कठिन परिस्थितियाँ ही नहीं हैं - बल्कि ये शोषण, दुर्व्यवहार और लिंग आधारित हिंसा सहित गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर रही हैं।

आवश्यक सुरक्षा और न्याय सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण, महिलाओं और लड़कियों को उल्लंघन की रिपोर्ट करना और सुरक्षा प्राप्त करना अधिक कठिन होता जा रहा है।

महिलाएं मुझे बताती हैं कि वे अपने बच्चों को खाना खिलाने के लिए खुद खाना नहीं खा रही हैं। पहले से ही कमजोर बुजुर्ग महिलाएं पुरानी बीमारियों के लिए आवश्यक दवाइयों के बिना रह रही हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ रही है।

हमें स्वच्छता सामग्री की कमी भी देखने को मिल रही है, और गर्भवती महिलाएं आश्रय स्थलों में सीमित देखभाल सुविधाओं के साथ बच्चों को जन्म दे रही हैं।

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। महिलाएं लगातार डर, नींद की कमी और थकावट का अनुभव करती हैं - साथ ही डरे हुए बच्चों को दिलासा भी देती हैं।

और फिर भी, सभी संकटों की तरह, लेबनान में महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं और राहत कार्यों में सबसे आगे रहती हैं।

वे विस्थापित परिवारों की देखभाल कर रहे हैं, सहायता का आयोजन कर रहे हैं, सहायता पहुंचा रहे हैं और तनाव को बढ़ने से रोकने में मदद कर रहे हैं - अक्सर खुद विस्थापित होते हुए भी।

संयुक्त राष्ट्र महिला लेबनान के प्रमुख विस्थापन केंद्रों में काम कर रही है-महिलाओं और लड़कियों के लिए जीवन रक्षक सुरक्षा, काम के बदले नकद सहायता और आजीविका सहायता को बढ़ा रही है, यह सुनिश्चित करने के लिए समन्वय को मजबूत कर रही है कि प्रतिक्रिया लैंगिक रूप से संवेदनशील हो, और निर्णय लेने में महिलाओं की भूमिका को बढ़ा रही है।

संयुक्त राष्ट्र महिला महासचिव के तत्काल तनाव कम करने, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूर्ण सम्मान करने और महिलाओं और लड़कियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लिंग-संवेदनशील मानवीय सहायता को तत्काल बढ़ाने के आह्वान का समर्थन करती है।

धन्यवाद।

Wednesday, March 18, 2026

PAU ने कपड़े सजाने की तकनीकों पर दी ट्रेनिंग

ADC PAU on Wednesday 18th March 2026 at 10:58 AM Regarding campus training programme

ट्रेनिंग कैंपस के बाहर आयोजित की गई 


लुधियाना
: 18 मार्च, 2026: (मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन डेस्क):: 

महिला सशक्तिकरण के मकसद को और आगे बढ़ाते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अभियान और प्रोग्राम लगातार जारी हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने 'ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव' (RAWE) कार्यक्रम के तहत कपड़े सजाने की तकनीकों पर दो-दिवसीय कैंपस के बाहर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य कपड़ा सजावट के क्षेत्र में प्रतिभागियों के कौशल और रचनात्मकता को बढ़ाना था।

इस ट्रेनिंग में कुल 20 महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस कार्यक्रम में कपड़े सजाने की कई पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया, जिनमें 'टाई एंड डाई', 'स्टेंसिल प्रिंटिंग', 'ब्लॉक प्रिंटिंग' और कढ़ाई की विभिन्न शैलियाँ शामिल थीं।

प्रतिभागियों को 'विस्तार शिक्षा और संचार प्रबंधन विभाग' (EECM) के विशेषज्ञों से व्यावहारिक ट्रेनिंग मिली। इससे वे इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को सीख पाए, जिसका इस्तेमाल वे अपने निजी उपयोग के साथ-साथ संभावित व्यावसायिक उद्यमों के लिए भी कर सकते हैं।

यह ट्रेनिंग EECM विभाग की प्रमुख डॉ. रितु मित्तल गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले सजावटी कपड़ा उत्पाद बनाने में रचनात्मकता, रंगों के सही मेल, सही कपड़े के चुनाव और 'फिनिशिंग' तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।

पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में काफी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने व्यावहारिक सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया। ट्रेनिंग का समापन प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सीखे गए कौशल और तकनीकों का प्रदर्शन किया।

Friday, March 6, 2026

महिला सशक्तिकरण कोई ट्रॉफी नहीं--अनीता शर्मा

Ani Sharma on Friday 6th March 2026 at 3:14 PM Regarding Women Empowerment 

यह हर दिन के फैसलों से हासिल होने वाला अधिकार है

आर्थिक आत्मनिर्भरता और मानसिकता में बदलाव से ही संभव है वास्तविक सशक्तिकरण

महिला दिवस केवल उत्सव नहीं, समाज में बदलाव का अवसर

लुधियाना: 6 मार्च 2026: (मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर
नवकिरण वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से महिला सशक्तिकरण विषय पर एक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता शर्मा ने की।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अनीता शर्मा ने कहा कि महिला दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में मानसिकता परिवर्तन का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब इसे केवल चर्चा तक सीमित न रखकर व्यवहार और कार्य में उतारा जाए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार आर्थिक आत्मनिर्भरता है। इसके लिए महिलाओं को आधुनिक दौर के अनुरूप कौशल जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मार्केटिंग और कोडिंग सीखने के अवसर मिलने चाहिए। साथ ही वित्तीय साक्षरता के माध्यम से निवेश, बचत और टैक्स की बुनियादी जानकारी भी जरूरी है।

अनीता शर्मा ने कहा कि सशक्तिकरण की शुरुआत घर से होती है और घरेलू जिम्मेदारियों में समान भागीदारी आवश्यक है। बेटियों को केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वतंत्र सोच और निर्णय लेने की शक्ति दी जानी चाहिए।

उन्होंने समाज और कार्यस्थलों पर सुरक्षित व समावेशी वातावरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया तथा कहा कि महिलाओं को समान अवसर मिलने के साथ-साथ नेतृत्व की भूमिकाओं में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि इस महिला दिवस पर हम एक छोटा संकल्प लें—

किसी एक महिला के कार्य या विचार की खुलकर सराहना करें और उसे आगे बढ़ने के लिए समर्थन दें।

अनीता शर्मा ने ज़ोर देकर दोहराया कि कहा,

“सशक्तिकरण कोई ट्रॉफी नहीं है जिसे दिया जाता है, यह वह अधिकार है जिसे हम हर दिन के छोटे-छोटे फैसलों से सुरक्षित करते हैं।

Tuesday, February 24, 2026

संस्कार भारती की नव वर्ष कार्यक्रमों को लेकर प्रारंभिक बैठक सम्पन्न

Pardeep Sharma IPTA on Tuesday 24th February 2026 at 13:44 Regarding Sanskar Bharti Meeting 

अप्रैल में एक संगीत कार्यक्रम कराने का निर्णय भी लिया गया


लुधियाना
: 24 फरवरी 2026: (प्रदीप शर्मा इप्टा// वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

जो लोग और संगठन आम जनता और खास कर युवा वर्ग में अच्छे संस्कार पैदा करने के लिए सक्रिय हैं उनमें से संस्कार भारती भारतीय कला, ललित कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है। राष्ट्रिय भावना से प्रेरित यह सांस्कृतिक संगठन है। सन 1981 में इसकी स्थापना लखनऊ में हुई थी। यह संस्था कला के माध्यम से राष्ट्रभक्ति जगाने, सांस्कृतिक प्रदूषण को रोकने और भारतीय परंपराओं के संरक्षण के लिए कार्य करती है। इसके मार्गदर्शक मण्डल में नानाजी देशमुख, भाऊराव देवरस, और बाबा योगेंद्र प्रमुख थे। अपनी स्थापना के समय से ही यह संगठन अच्छे संस्कारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हो कर काम कर रहा है। एकता अखंडता और मानवता इसके प्रचार का अक्सर फॉक्स रहते हैं। 

इसकी बहुत सी गतिविधियाँ साल भर जारी रहती हैं।  'कला साधक संगम' (वार्षिक अधिवेशन), रंगोली, चित्रकला, संगीत, नाटक और शास्त्रीय नृत्य विधाओं का आयोजन इनमें से प्रमुख हैं। 

इस संगठन का दृष्टिकोण कला को 'सॉफ्ट पावर' मानकर भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता को स्थापित करना रहता है। यह संगठन जातिवादी ए क्षेत्रवादी विचारों से बहुत ऊपर उठ कर काम करता है। 

इसका कार्यक्षेत्र बहुत विस्तृत है। देश भर में अपनी शाखाओं और सदस्यों के माध्यम से पारंपरिक कलाओं को नई तकनीक से जोड़ना भी इस संगठन के लिए प्रमुख रहता है। 

संस्कार भारती का नारा है- "संस्कार भारती भारते नवजीवनम साधयति" (संस्कार भारती भारत में नवजीवन प्रदान कर रही है)। 

अब संस्कार भर्ती फिर से सक्रिय है। नव वर्ष में प्रस्तावित सांस्कृतिक गतिविधियों की रूपरेखा तय करने के उद्देश्य से संस्कार भारती की एक साधारण बैठक लुधियाना क्लब में आयोजित की गई।

बैठक में डॉ. बबीता जैन, प्रदीप शर्मा, बेनू सतीश कांत, सीमा भाटिया, अनमोल शुभंम, संगीता भंडारी, डॉ. पूनम सपरा, जसप्रीत मोहन सिंह, मोनिका कटारिया, शांति जैन एवं अंकिता उपस्थित रहे।

बैठक में अप्रैल माह में एक संगीत कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के चयनित बच्चों को एक मंच पर लाकर प्रतियोगिता करवाई जाएगी। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट चार प्रतिभागियों को मोमेंटो तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त, महिलाओं की कला से जुड़े एक विशेष सर्वेक्षण की योजना भी तय की गई, जिसके माध्यम से उन महिलाओं को चिन्हित किया जाएगा जिन्होंने अपनी कला को निरंतर जीवित रखा है अथवा जो विभिन्न कारणों से अपनी कला को आगे नहीं बढ़ा सकीं। यह पहल उन्हें पुनः कला के क्षेत्र से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

बैठक में अगले माह के अंत में एक कवि दरबार आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे साहित्यिक सृजन और संवाद को मंच मिल सके।

संस्कार भारती के नए आयोजनों और अन्य प्रोग्रामों की जानकारी सुश्री बेनू सतीश कॉंत ने दी मीडिया को दी। सुश्री बेनु सतीश कान्त स्वयं भी बहुत अच्छी लेखिका हैं।  

अंत में चाय-नाश्ते के साथ बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।

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Friday, December 12, 2025

भारत में महिला-केंद्रित विकास की ओर तेजी से बदलाव हो रहा है

 महिला एवं बाल विकास मंत्रालयAzadi Ka Amrit Mahotsav//12 DEC 2025 at 4:37 PM by PIB Delhi

सरकार द्वारा उठाए गए कदम महिला सशक्तिकरण के प्रति व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं

नई दिल्ली: 12 दिसंबर 2025: (PIB Delhi//महिला स्क्रीन डेस्क)::

केंद्र सरकार देश में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार ने महिलाओं के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए जीवन-चक्र निरंतरता के आधार पर बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है, ताकि उनकी शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण से संबंधित बाधाओं को दूर किया जा सके। परिणामस्वरूप, भारत महिला-प्रधान विकास से महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है, जिसका उद्देश्य एक ऐसे नए भारत का निर्माण करना है जहां महिलाएं तीव्र गति से और सतत राष्ट्रीय विकास में अग्रणी भूमिका निभाएं।

फाइल फोटो 
महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में सबसे बड़ा कदम "नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023" (संविधान का एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम 2023 के लागू होने से उठाया गया, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं, जिनमें दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी विधानसभा भी शामिल है, में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं।

महिलाओं के रोज़गार को प्रोत्साहित करने के लिए, चार श्रम संहिताएं - मजदूरी संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020 - 21 नवंबर 2025 से लागू की गई हैं, जिनमें 29 पूर्ववर्ती श्रम कानूनों का युक्तिकरण किया गया है। इन सुधारों के अंतर्गत, संहिताएं लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करती हैं, समान वेतन अनिवार्य करती हैं और महिलाओं के लिए अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में हर समय काम करने के द्वार खोलती हैं, जिनमें भूमिगत खनन और भारी मशीनरी से संबंधित कार्य और रात्रि शिफ्ट शामिल हैं। उनकी सहमति और नियोक्ताओं द्वारा पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अधीन।

विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन स्तर को सुगम बनाने और उनकी कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 11.8 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.3 करोड़ से अधिक परिवारों को महिलाओं के नाम पर स्वच्छ गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं और जल जीवन मिशन के तहत 15 करोड़ से अधिक परिवारों को स्वच्छ और पीने योग्य नल के पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का उद्देश्य सभी बेघर परिवारों और कच्चे एवं जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के मकान उपलब्ध कराकर 'सभी के लिए आवास' प्रदान करना है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों सहित आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी आवास प्रदान करना है।

सुकन्या समृद्धि योजना जैसी योजनाओं ने लड़कियों के भविष्य में वित्तीय निवेश को प्रोत्साहित किया है। समग्र शिक्षा जैसी योजनाएं, स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था, विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत किफायती और गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता आदि ने भी व्यवहारिक बदलाव लाने में योगदान दिया है, जिसके परिणामस्वरूप शैक्षणिक संस्थानों में लड़कियों के नामांकन में वृद्धि हुई है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत, सरकार 1200 से अधिक चिकित्सा पैकेजों के माध्यम से 55 करोड़ से अधिक नागरिकों को निःशुल्क उपचार प्रदान कर रही है। इनमें से 141 से अधिक चिकित्सा पैकेज विशेष रूप से महिलाओं की चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत सात प्रकार की जांच (टीबी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुख कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और मोतियाबिंद) उपलब्ध हैं, जिनसे करोड़ों महिलाओं को लाभ हुआ है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 150,000 से अधिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (एबी-एचडब्ल्यूसी), जिन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी कहा जाता है, स्वास्थ्य सेवा को समुदायों के करीब ले जा रहे हैं।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका विशेष ध्यान गरीब और वंचित महिलाओं पर है। देशभर में 16,000 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) कार्यरत हैं। पीएमबीजेके किफायती दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के अलावा, जिनमें लगभग 40 महिला-विशिष्ट वस्तुएं शामिल हैं, 'सुविधा सैनिटरी नैपकिन' नामक सैनिटरी नैपकिन की बिक्री भी करते हैं, जिनकी कीमत मात्र 1 रुपये प्रति पैड है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के माध्यम से बीमा कवरेज और पेंशन द्वारा सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाती है।

महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण हेतु सरकार ने स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत देश भर में प्रधानमंत्री कौशल केंद्र स्थापित किए गए हैं। महिलाओं के प्रशिक्षण और शिक्षुता के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचा तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी प्रकार, ग्रामीण आबादी को डिजिटल साक्षरता प्रदान करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीडीआईएसएचए) चला रही है। इन योजनाओं से महिलाओं और लड़कियों को रोजगार और उद्यमिता के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त करने में भी सहायता मिली है।

केंद्र सरकार की सबसे सफल योजनाओं में से एक दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन है, जिसके तहत लगभग 90 लाख महिला स्वयं सहायता समूह, जिनमें लगभग 10 करोड़ सदस्य हैं, रोजगार/स्वरोजगार के लिए ग्रामीण परिदृश्य को बदल रहे हैं। सरकार ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नमो द्रोण दीदी, लखपति दीदी, बैंक सखी, बीमा सखी जैसी महिला-विशिष्ट योजनाएं भी लागू की हैं।

मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि), सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी निधि योजना (सीजीएमएसई), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) जैसी योजनाएं रोजगार/स्वरोजगार के अवसर और ऋण सुविधाएं प्रदान करती हैं। इन योजनाओं के लाभार्थियों में अधिकांश महिलाएं हैं।

भारत सरकार ने सार्वजनिक खरीद नीति के माध्यम से सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3% हिस्सा महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से प्राप्त करें।

भारत सशस्त्र बलों में लड़कियों की भूमिका को बढ़ावा दे रहा है। सरकार ने भारतीय वायु सेना में लड़ाकू पायलट, कमांडो, केंद्रीय पुलिस बल, सैनिक विद्यालयों में प्रवेश, एनडीए में लड़कियों का प्रवेश आदि जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को सक्षम बनाने के लिए भी प्रावधान किए हैं।

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ईएनएएम) कृषि उत्पादों के लिए एक ऑनलाइन व्यापार मंच है, किसानों के प्रश्नों का उनकी अपनी बोली में फोन पर उत्तर देने के लिए "किसान कॉल सेंटर" योजना है और किसान सुविधा, कृषि बाजार, राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, उमंग (नए युग के शासन के लिए एकीकृत मोबाइल एप्लिकेशन) जैसे मोबाइल एप्लिकेशन हैं। ये डिजिटल नवाचार महिलाओं को बाजारों तक पहुँचने में आने वाली बाधाओं को दूर करने या उनकी भरपाई करने में मदद कर रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आदि जैसी किसान कल्याणकारी योजनाएं महिला किसानों के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा दे रही हैं। इन पहलों के माध्यम से सरकार कृषि विस्तार सेवाओं सहित उत्पादक संसाधनों तक महिला किसानों की पहुँच में सुधार कर रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में समग्र सुधार हो रहा है।

महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें से एक है आपराधिक न्याय प्रणाली का आधुनिकीकरण और सुधार। सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय सुरक्षा अधिनियम (बीएसए) लागू किए हैं, जो 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी हुए हैं। बीएनएस 2023 में, भारतीय दंड संहिता, 1860 में पहले से बिखरे हुए महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को अध्याय-V के अंतर्गत समेकित किया गया है। इसमें महिलाओं और बच्चों से संबंधित कानूनों को मजबूत करने के लिए नए प्रावधान शामिल किए गए हैं, विशेष रूप से, "संगठित अपराध" से संबंधित धारा 111, विवाह, रोजगार, पदोन्नति के झूठे वादे पर या पहचान छिपाकर यौन संबंध बनाने से संबंधित धारा 69, किसी अपराध को अंजाम देने के लिए बच्चे को काम पर रखने, नियोजित करने या संलग्न करने से संबंधित धारा 95 आदि। वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे को खरीदने (धारा 99), सामूहिक बलात्कार (धारा 70) और तस्करी किए गए व्यक्ति के शोषण (धारा 144) से संबंधित अपराधों के संबंध में सजा बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, महिलाओं के खिलाफ कुछ गंभीर अपराधों जैसे वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे की खरीद (बीएनएस की धारा 99), संगठित अपराध (धारा 111), भीख मंगवाने के उद्देश्य से बच्चे का अपहरण या उसे अपंग करना (धारा 139) के संबंध में अनिवार्य न्यूनतम दंड निर्धारित किए गए हैं। साथ ही, बीएनएस 2023 की धारा 75 और 79 उत्पीड़न के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी सुरक्षा प्रदान करती हैं, जिनमें अवांछित यौन संबंध बनाने का प्रयास, यौन अनुग्रह की मांग, यौन संबंधी टिप्पणियां और किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से शब्द, हावभाव या कृत्य शामिल हैं। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करने वाली महिला इन प्रावधानों के तहत शिकायत दर्ज करा सकती है।

बीएनएसएस पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाता है और कानूनी प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करता है। यह महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों की शिकायतों के त्वरित पंजीकरण को सुगम बनाने और समय पर पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए ई-एफआईआर और जीरो एफआईआर प्रावधान लागू करता है। इसके अतिरिक्त, बीएनएसएस की धारा 398 के तहत गवाह संरक्षण योजनाओं की शुरुआत की गई है, जो गवाहों को धमकियों और डरा-धमकाने से बचाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को स्वीकार करती है। साथ ही, बीएसए की धारा 2(1)(डी) के तहत ईमेल, कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफोन पर मौजूद दस्तावेज़, संदेश और डिजिटल उपकरणों पर संग्रहीत वॉइसमेल संदेशों जैसे इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड को भी कार्यस्थल पर महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए दस्तावेजों की परिभाषा के अंतर्गत शामिल किया गया है।

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (एसएच अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों को शामिल करते हुए एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म "एसएचई-बॉक्स पोर्टल" शुरू किया है। यह पोर्टल देश भर में गठित आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय समितियों (एलसी) से संबंधित सूचनाओं का एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध केंद्रीकृत भंडार प्रदान करता है, चाहे वे सरकारी हों या निजी क्षेत्र की हों। यह शिकायतों को दर्ज करने और उनकी स्थिति पर नज़र रखने के लिए एक साझा मंच भी प्रदान करता है। पोर्टल में एक ऐसी सुविधा है जिसके तहत केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और निजी क्षेत्र के संबंधित कार्यस्थलों की आईसी/एलसी को पंजीकृत शिकायतें स्वतः ही भेज दी जाएंगी। पोर्टल प्रत्येक कार्यस्थल के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान करता है, जिसे शिकायतों की वास्तविक समय में निगरानी के लिए नियमित रूप से डेटा/सूचना को अद्यतन करना आवश्यक है। यह पोर्टल 22 भाषाओं में उपलब्ध है ताकि दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली कामकाजी महिलाओं को इसका उपयोग करने में सुविधा हो सके।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए "मिशन शक्ति" नामक एक व्यापक योजना लागू की है। इस योजना के अंतर्गत, सरकार ने हिंसा का सामना कर रही या संकट में फंसी महिलाओं को एकीकृत सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए देश भर में वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए हैं। इसके अलावा, 24x7 महिला हेल्पलाइन (टेलीफोन शॉर्ट कोड 181) भी उपलब्ध है, जो जरूरतमंद महिलाओं को उचित अधिकारियों से जोड़कर आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता प्रदान करने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों से संबंधित जानकारी भी प्रदान करती है, ताकि वे इनका लाभ उठा सकें। योजना का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) घटक लिंग-भेदभावपूर्ण लिंग-चयन को रोकने और लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता पैदा करने तथा बाल विवाह को हतोत्साहित करने पर केंद्रित है। बीबीबीपी ने बालिका के महत्व को लेकर नागरिकों के मन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शक्ति सदन का घटक संकट में फंसी, बेसहारा और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों की शिकार महिलाओं, जिनमें मानव तस्करी की शिकार महिलाएं भी शामिल हैं, उन्हें सहायता और समर्थन प्रदान करता है। सखी निवास कार्यक्रम के तहत कामकाजी महिलाओं और रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं एवं लड़कियों को सुरक्षित एवं किफायती आवास के साथ शिशु देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। पालना कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी-सह-क्रेच में शिशु देखभाल की सुविधा प्रदान की जाती है ताकि कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके। राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर स्थापित महिला सशक्तिकरण केंद्र ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में महिलाओं से संबंधित सरकारी योजनाओं के बारे में सूचना विषमता की समस्या का समाधान करते हैं। प्रधानमंत्री वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से नकद लाभ प्रदान किया जाता है।

भाषा को सकारात्मक सांस्कृतिक परिवर्तन की एक मूलभूत शक्ति के रूप में मान्यता देते हुए, एक ऐसे वातावरण को विकसित करने का प्रयास करते हुए जहां विविध दृष्टिकोणों को स्वीकार किया जाता है, महत्व दिया जाता है और सशक्त बनाया जाता है, सरकार ने नवंबर 2023 में लिंग-समावेशी संचार पर एक मार्गदर्शिका शुरू की, जिसका उद्देश्य भाषा में मौजूद गहरे पूर्वाग्रहों को दूर करने के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और रणनीतियों को बढ़ावा देने और प्रदान करने के लिए स्थापित भाषाई मानदंडों को बदलना है।

ये सभी उपाय मिलकर महिला सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदर्शित करते हैं, जो महिला वैज्ञानिक योजना, विज्ञान ज्योति योजना, विदेश छात्रवृत्ति योजना आदि के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तक भी विस्तारित है।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

*****//पीके/ केसी/ जेएस//(रिलीज़ आईडी: 2203345) 

Wednesday, November 26, 2025

संकटग्रस्त महिलाओं तक पहुंचने के लिए एक और नया प्रयास

प्रविष्टि तिथि: 26 NOV 2025 at 5:00PM by PIB Delhi//महिला एवं बाल विकास मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav

एनसीडब्ल्यू ने  नया हेल्पलाइन नंबर 14490 जारी किया

नई दिल्ली: 26 नवंबर 2025: (PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

सरकार द्वारा बहुत सी कोशिशों और लाख प्रयासों के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। इसलिए बार बार यही महसूस होता है कि अभी कुछ और कदम उठाए जाने चाहिएं।  इस ज़रूरत को देखते हुए अब एक नया हेल्पलाईन नंबर जारी किया गया है। केवल उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास भी है कि इस नंबर से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को नकेल डालने में मदद मिलेगी। 


राष्ट्रीय महिला आयोग ने
देश भर में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए त्वरित और अधिक सुलभ सहायता सुनिश्चित करने के लिए एक नई 24×7 संक्षिप्त कोड हेल्पलाइन-14490 शुरू की है। यह टोल-फ्री नंबर एनसीडब्ल्यू की मौजूदा हेल्पलाइन 7827170170 से जुड़ा एक आसानी से याद रखने योग्य संक्षिप्त कोड के रूप में कार्य करता है। इस पर संपर्क कर महिलाएं बिना किसी लागत या देरी के सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

नया संक्षिप्त कोड हिंसा, उत्पीड़न या किसी भी प्रकार के संकट का सामना कर रही महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए एनसीडब्ल्यू के चल रहे प्रयासों को मजबूत करता है। प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में हेल्पलाइन मार्गदर्शन प्रदान करेगा। साथ ही संबंधित प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कराएगा और समय पर सहायता प्रदान करना सुनिश्चित करेगा।

एनसीडब्ल्यू लोगों, सामुदायिक समूहों, संस्थानों और भागीदारों को इस जानकारी को व्यापक रूप से साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जागरूक रहें।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय।

****//पीके/केसी/आरकेजे//(रिलीज़ आईडी: 2197970)