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Saturday, September 19, 2026

मैं तो सपनों का सौदागर हूँ-शिवराज सिंह चौहान

प्रविष्टि तिथि: 19 September 2026 8:43PM by PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन

कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय के विशेष विकास कदम 

मैं तो दिन में भी सपना देखता हूँ-शिवराज सिंह चौहान ने दिया नया उत्साह 

शनिवार को विदिशा में लखपति दीदियों से संवाद किया

 ज़िला समृद्ध मॉडल इस यादगारी बैठक में रचा गया एक नया इतिहास साबित हुआ


नई दिल्ली
: 19 सितंबर  2026
: PIB Delhi//>>वीमेन स्क्रीन डेस्क>> 

एक ऐतिहासिक आयोजन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को विदिशा में लखपति दीदियों से संवाद किया और जिला समृद्ध मॉडल बैठक में शामिल हुए।  यह एक यादगारी कार्यक्रम रहा। श्री चौहान की मौजूदगी से आयोजन में एक नया उत्साह बना रहा। 

केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने आयोजन के मंच से सभी को विकास के सावों की झलक दिखाते कहा कि हुए मैं तो सपनों का सौदागर हूँ, दिन में भी सपना देखता हूँ, मेरा सपना यही है कि, विदिशा जिले का हर गाँव गरीबी मुक्त हो और विदिशा में रचा जाए एक और नया इतिहास। 

इस आयोजन में स्पष्ट संदेश दिया गया कि जिले के विकास की मॉनिटरिंग के लिए रियल टाइम डैशबोर्ड बनाएं। आयोजन का संदेश बहुत स्पष्ट था कि हमने समृद्ध विदिशा का एक मॉडल बनाया है, यह एक नया आगाज़ है।  एक बहुत ही नई और अच्छी शुरुआत। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अच्छे काम करना ही सच्चा धर्म है। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि विदिशा से शुरू हुआ ग्रामीण समृद्धि का नया मॉडल, हर परिवार को आजीविका से जोड़ने का संकल्प पूरा करने की तरफ तेज़ी से बढ़ रहा है। हर घर तक खुशहाली पहुँचने लगी है। 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के प्रवास पर रहे। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने बाढ़ वाले गणेश मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश के दर्शन-पूजन किए। इसके बाद वात्सल्य स्कूल में आयोजित गणेश उत्सव में शामिल हुए और विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने लखपति दीदियों से संवाद करते हुए महिलाओं की आजीविका और आय बढ़ाने के प्रयासों पर चर्चा की। वहीं, केंद्रीय मंत्री ने विदिशा में आयोजित जिला समृद्धि मॉडल की बैठक में शामिल होकर जिले को गरीबी मुक्त बनाने और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की कार्ययोजना पर मंथन किया। इस दौरान युवाओं और महिलाओं को रोजगार से जुड़े कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने के लिए आरसेटी के माध्यम से संचालित प्रशिक्षण गतिविधियों, स्वरोजगार के अवसरों और प्रशिक्षण के बाद बैंक लोन उपलब्ध कराने की पहल की जानकारी दी।

समृद्ध विदिशा मॉडल का शुभारंभ

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वे सपनों के सौदागर हैं और उनका सपना है कि विदिशा जिले का हर गांव गरीबी मुक्त हो। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव होगा, जब हर परिवार के पास आय के दो-तीन साधन हों। इसी संकल्प के साथ विदिशा जिले में ‘समृद्ध विदिशा मॉडल’ का नया प्रयास शुरू किया गया है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। छोटे किसानों को आधुनिक कृषि के साथ गाय-भैंस पालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों से जोड़कर कम से कम दो आजीविका के साधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। वहीं, महिलाओं को विभिन्न गतिविधियों से जोड़कर अधिक से अधिक लखपति दीदी बनाने का प्रयास होगा। उन्होंने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों और ग्रामीण परिवारों को एफपीओ के माध्यम से सामूहिक रूप से उत्पाद बेचने, कच्चे उत्पाद की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़कर उनकी आय बढ़ाई जाएगी। इसके लिए प्रशिक्षण के साथ बैंक लिंकेज की व्यवस्था भी की जाएगी। श्री चौहान ने कहा कि इस मॉडल को भारत सरकार, राज्य सरकार, जिला प्रशासन, पंचायतों और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह एक नया आरंभ और नया आगाज है, जिसकी शुरुआत विदिशा से की जा रही है और इस प्रयोग को आगे देश के अन्य क्षेत्रों में भी दोहराने का प्रयास किया जाएगा।

कौशल प्रशिक्षण के बाद बैंक लोन से शुरू होंगे बेटियों के अपने रोजगार, युवाओं को भी आजीविका से जोड़ने का लक्ष्य

श्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘समृद्धि मॉडल, परियोजना प्रारूप, विदिशा जिला’ के विमोचन के अवसर पर कहा कि इस मॉडल के तहत महिलाओं के साथ-साथ युवाओं को भी आजीविका के अवसरों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि विदिशा जिले में 15 हजार युवाओं को आजीविका और रोजगार से जोड़कर उनका काम-धंधा शुरू कराने का लक्ष्य रखा गया है। आरसेटी के माध्यम से बेटियों और भाई-बहनों को ब्यूटीशियन और सिलाई जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। लगभग 30 दिन के प्रशिक्षण के बाद प्रतिभागियों से उनके रोजगार को लेकर जानकारी ली जा रही है। उन्होंने बताया कि ब्यूटीशियन प्रशिक्षण प्राप्त कर रही बेटियों में लगभग 70 प्रतिशत ने नौकरी के बजाय स्वयं का काम शुरू करने की इच्छा जताई है। ऐसे युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण के बाद बैंक लोन उपलब्ध कराने में सहयोग किया जाएगा, ताकि वे अपना स्वयं का रोजगार शुरू कर सकें। उन्होंने कहा कि एक बैच के बाद दूसरा, फिर तीसरा और इसी क्रम में लगातार प्रशिक्षण बैच संचालित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बेटियों और युवाओं को हुनर से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

योजनाओं के समन्वय से होगा गांवों का विकास, ‘विदिशा डेवलपमेंट इंडेक्स’ से होगी मॉनिटरिंग

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विदिशा जिले में गरीबी उन्मूलन और विकास के लिए कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, ग्रामीण विकास, पंचायत, जल संसाधन, कौशल विकास और आजीविका मिशन सहित विभिन्न योजनाओं को एक साथ जोड़कर सामूहिक प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी 2 अक्टूबर की ग्राम सभाओं में गांवों को गरीबी मुक्त बनाने और ग्राम पंचायत विकास की कार्ययोजना तैयार करने के प्रस्ताव पारित किए जाएं। ग्राम सभा, स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन, एफपीओ और पंचायत प्रतिनिधि मिलकर योजनाओं का निर्माण, क्रियान्वयन और निगरानी करेंगे। उन्होंने कहा कि सीएसआर, वित्तीय संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। विकास कार्यों की प्रभावी निगरानी के लिए रियल टाइम डैशबोर्ड तैयार किया जाएगा और पानी, रोजगार, महिलाओं और किसानों की आय, कौशल, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग जैसे मानकों के आधार पर ‘विदिशा डेवलपमेंट इंडेक्स’ तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, ब्लॉक और जिले के विकास की हर छह माह में समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि कितने परिवारों की आय बढ़ी, कितनी लखपति दीदी बनीं, कितना जल संरक्षण एवं रिचार्ज हुआ, कितने स्वयं सहायता समूह और एफपीओ बाजार से जुड़े और  पंचायतों ने कितने नवाचार किए, जैसे बिंदुओं को भी मॉनिटरिंग में शामिल किया जाएगा। श्री चौहान ने कहा कि केवल अधिकारियों और कर्मचारियों के आधार पर ही मूल्यांकन नहीं होगा, बल्कि ग्राम सभा से फीडबैक लेकर समुदाय की भागीदारी के साथ पंचायतों के प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा।

माता-पिता का सम्मान और अच्छे कर्म ही सच्चे धर्म का मार्ग

केंद्रीय कृषि मंत्री एवं विदिशा सांसद श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज विदिशा में वात्सल्य स्कूल में आयोजित गणेश उत्सव में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने भगवान गणेश और कार्तिकेय जी की कथा सुनाते हुए माता-पिता के सम्मान और उनके महत्व का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश ने माता-पिता की परिक्रमा कर यह संदेश दिया कि माता-पिता ही हमारे लिए पूरा संसार हैं। श्री चौहान ने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छे काम करना ही सच्चा धर्म है। सच बोलना, दूसरों की मदद करना और सदैव अच्छे कार्यों के लिए आगे बढ़ना धर्म है। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में भी आगे रहना चाहिए, क्योंकि इससे बच्चों की प्रतिभा सामने आती है और व्यक्तित्व का विकास होता है। उन्होंने बच्चों को जीवन में बड़ा लक्ष्य रखने, अपनी प्रतिभा को पहचानने और अपने माता-पिता और गुरुजनों का नाम रोशन करने के लिए प्रेरित किया। श्री चौहान ने कहा कि 10वीं और 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप प्रदान किए जाएंगे और 12वीं के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग कक्षाएं भी संचालित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि बच्चों को आगे बढ़ने के लिए खेल, शिक्षा और अन्य आवश्यक गतिविधियों के माध्यम से हरसंभव सहयोग देने का प्रयास किया जाएगा।

****//(रिलीज़ आईडी: 2312565)


Sunday, May 10, 2026

:‘सुपर मॉम 2026’ समारोह में युवतियों और बच्चियों ने भी दिखाए कमाल

 महिला पत्रकारों और समाज सेविकाओं को सम्मानित भी किया गया 


चंडीगढ़
: 10 मई 2026:
(कार्तिका कल्याणी सिंह और मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन)::

मातृत्व, संघर्ष और महिलाओं की उपलब्धियों को समर्पित ‘सुपर मॉम 2026’ अवॉर्ड समारोह का आयोजन स्टार्स ऑफ ट्राइसिटी ग्रुप द्वारा चंडीगढ़ प्रेस क्लब में किया गया। कार्यक्रम में ट्राइसिटी क्षेत्र की महिला पत्रकारों और समाज सेविकाओं को उनके पेशेवर योगदान, सामाजिक सेवा और मातृत्व की प्रेरणादायक भूमिका के लिए सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वाली प्रमुख महिलाओं में शैली तनेजा, नितिका महेश्वरी, आकांक्षा सक्सेना, जसकिरण कपूर, गुरमिलन कौर, बानो पंडिता, डॉ. मनीका आहूजा, शीतल शर्मा, हरदीप विर्क, अनु शर्मा, कार्तिका सिंह, अर्चना सेठी, सोनिका भाटिया, नीना शर्मा, रजनी शर्मा, शीना, सोनिया अटवाल, रमा नरूला, रेनुका सलवान, वीना पाठक, कुसुम, सरयू दिनेश मद्रा, मोनिका शर्मा और सविता रानी शामिल रहीं।

कार्यक्रम में मीडिया कर्मियों, समाज सेवकों, गणमान्य नागरिकों और सम्मानित महिलाओं के परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सिटीज़न्स अवेयरनेस ग्रुप के चेयरमैन सुरिंदर वर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और उन्होंने सम्मानित महिलाओं को स्मृति चिन्ह और प्रशंसा पत्र प्रदान किए।

अपने संबोधन में सुरिंदर वर्मा ने कहा कि महिलाएं परिवार और समाज की मजबूत नींव हैं तथा जो महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अपने पेशेवर जीवन में भी उत्कृष्ट योगदान देती हैं, उनका सम्मान करना समाज के लिए गर्व की बात है।

कार्यक्रम में मातृत्व को समर्पित गीतों और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी को भावुक कर दिया। एक विशेष आकर्षण साड़ी वॉक रही, जिसमें प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास और गरिमा के साथ भारतीय नारी की सुंदरता और संस्कृति को प्रस्तुत किया।

स्टार्स ऑफ ट्राइसिटी ग्रुप के प्रतिनिधियों ने कहा कि ‘सुपर मॉम 2026’ उन महिलाओं को समर्पित है जो पत्रकारिता, समाज सेवा और नेतृत्व के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करते हुए मातृत्व की जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रही हैं।

Tuesday, April 14, 2026

प्रधानमंत्री ने 'नारी शक्ति' के नाम एक पत्र साझा किया,

 प्रधानमंत्री कार्यालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav//प्रविष्टि तिथि: 14 APR 2026 at 9:29AM by PIB Delhi

विधायी निकायों में महिला आरक्षण के संकल्प को फिर से दोहराया


नई दिल्ली
: 14 अप्रैल 2026: (PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन डैस्क)::

प्रधानमंत्री स्वयं नारी शक्ति की चिंता करते हैं। इसका पता आज ही एक विशेष खबर से चला। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि पूरे भारत में महिलाएं विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने की पहल की सराहना कर रही हैं।

भारत की 'नारी शक्ति' के नाम लिखे गए एक पत्र को साझा करते हुए, प्रधानमंत्री ने दशकों से लंबित महिला आरक्षण को लागू करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया।

उन्होंने उल्लेख किया कि वर्ष 2029 के लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की देशभर की माताओं, बहनों और बेटियों द्वारा सराहना की जा रही है।

भारत की 'नारी शक्ति' को समर्पित इस पत्र में, प्रधानमंत्री ने इस पुराने संकल्प को जल्द से जल्द पूरा करने के बारे में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा:

“पूरे भारत में महिलाएं विधायी निकायों में महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की इस पहल की सराहना कर रही हैं।

भारत की 'नारी शक्ति' के नाम मेरा यह पत्र, दशकों से लंबित उस संकल्प को पूरा करने की हमारी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराता है...”

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“देशभर की हमारी माताएं-बहनें और बेटियां, साल 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव से महिला आरक्षण सुनिश्चित करने के निर्णय की सराहना कर रही हैं।

भारत की नारी शक्ति को समर्पित अपने इस पत्र में मैंने दशकों से लंबित इस संकल्प को जल्द साकार करने के विषय में देशवासियों के साथ अपनी भावनाएं साझा की हैं…”

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पीके/केसी/डीवी//(रिलीज़ आईडी: 2251768) 

Friday, March 27, 2026

करीब 620,000 महिलाओं और लड़कियों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा

UN Women on Mar 27, 2026, 5:37 PM Regarding Women and Girls in Lebanon

बैरुत: 27 मार्च 2026 को जारी प्रेसब्रीफिंग की विज्ञप्ति 

लेबनान में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र महिला द्वारा प्रेस ब्रीफिंग

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जिनेवा के पैलेस डेस नेशन्स में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र महिला प्रतिनिधि गिएलन एल मेसिरी द्वारा दिए गए भाषण के अंश।

[जैसा दिया गया।]

बेरुत – सुप्रभात। मैं आज बेरुत से आपसे जुड़ रही हूँ, जहाँ मैं लेबनान में इस नवीनतम तनाव के महिलाओं और लड़कियों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दूंगी।

इस संघर्ष में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति को समझना इस संकट के संपूर्ण मानवीय प्रभाव को समझने के लिए आवश्यक है।

2 मार्च से अब तक अनुमानित 620,000 महिलाओं और लड़कियों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

यह लेबनान की लगभग एक चौथाई महिलाओं और लड़कियों का प्रतिनिधित्व करता है, और विस्थापितों में से आधे से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करता है - जिनमें लेबनानी, सीरियाई, फिलिस्तीनी और प्रवासी समुदाय शामिल हैं।

यह तनाव ऐसे संदर्भ में बढ़ रहा है जहां महिलाओं को पहले से ही कई तरह की असमानताओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें आय तक सीमित पहुंच, असमान कानूनी सुरक्षा और सेवाओं तक सीमित पहुंच शामिल है।

आज विस्थापन, आजीविका के नुकसान और कमजोर समर्थन प्रणालियों के कारण ये कमजोरियां और भी बढ़ रही हैं।

मैं ऐसी महिलाओं और लड़कियों से मिली हूँ जिन्हें विनाशकारी विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ा है - बिना किसी स्पष्ट गंतव्य के रात में अपने घरों से भागना, अपने परिवारों की आजीविका खोना और अपनी सुरक्षा की भावना और उन सभी चीजों को पीछे छोड़ना जो उनके लिए परिचित हैं।

विस्थापित महिलाओं और लड़कियों में से 85 प्रतिशत औपचारिक आश्रय स्थलों से बाहर रह रही हैं। वे भीड़भाड़ वाले अपार्टमेंटों और अनौपचारिक व्यवस्थाओं में रह रही हैं, जिनमें से सबसे बड़ी संख्या बेरूत और माउंट लेबनान में है।

ये केवल कठिन परिस्थितियाँ ही नहीं हैं - बल्कि ये शोषण, दुर्व्यवहार और लिंग आधारित हिंसा सहित गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर रही हैं।

आवश्यक सुरक्षा और न्याय सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण, महिलाओं और लड़कियों को उल्लंघन की रिपोर्ट करना और सुरक्षा प्राप्त करना अधिक कठिन होता जा रहा है।

महिलाएं मुझे बताती हैं कि वे अपने बच्चों को खाना खिलाने के लिए खुद खाना नहीं खा रही हैं। पहले से ही कमजोर बुजुर्ग महिलाएं पुरानी बीमारियों के लिए आवश्यक दवाइयों के बिना रह रही हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ रही है।

हमें स्वच्छता सामग्री की कमी भी देखने को मिल रही है, और गर्भवती महिलाएं आश्रय स्थलों में सीमित देखभाल सुविधाओं के साथ बच्चों को जन्म दे रही हैं।

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। महिलाएं लगातार डर, नींद की कमी और थकावट का अनुभव करती हैं - साथ ही डरे हुए बच्चों को दिलासा भी देती हैं।

और फिर भी, सभी संकटों की तरह, लेबनान में महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं और राहत कार्यों में सबसे आगे रहती हैं।

वे विस्थापित परिवारों की देखभाल कर रहे हैं, सहायता का आयोजन कर रहे हैं, सहायता पहुंचा रहे हैं और तनाव को बढ़ने से रोकने में मदद कर रहे हैं - अक्सर खुद विस्थापित होते हुए भी।

संयुक्त राष्ट्र महिला लेबनान के प्रमुख विस्थापन केंद्रों में काम कर रही है-महिलाओं और लड़कियों के लिए जीवन रक्षक सुरक्षा, काम के बदले नकद सहायता और आजीविका सहायता को बढ़ा रही है, यह सुनिश्चित करने के लिए समन्वय को मजबूत कर रही है कि प्रतिक्रिया लैंगिक रूप से संवेदनशील हो, और निर्णय लेने में महिलाओं की भूमिका को बढ़ा रही है।

संयुक्त राष्ट्र महिला महासचिव के तत्काल तनाव कम करने, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूर्ण सम्मान करने और महिलाओं और लड़कियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लिंग-संवेदनशील मानवीय सहायता को तत्काल बढ़ाने के आह्वान का समर्थन करती है।

धन्यवाद।

Wednesday, March 18, 2026

PAU ने कपड़े सजाने की तकनीकों पर दी ट्रेनिंग

ADC PAU on Wednesday 18th March 2026 at 10:58 AM Regarding campus training programme

ट्रेनिंग कैंपस के बाहर आयोजित की गई 


लुधियाना
: 18 मार्च, 2026: (मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन डेस्क):: 

महिला सशक्तिकरण के मकसद को और आगे बढ़ाते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अभियान और प्रोग्राम लगातार जारी हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने 'ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव' (RAWE) कार्यक्रम के तहत कपड़े सजाने की तकनीकों पर दो-दिवसीय कैंपस के बाहर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य कपड़ा सजावट के क्षेत्र में प्रतिभागियों के कौशल और रचनात्मकता को बढ़ाना था।

इस ट्रेनिंग में कुल 20 महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस कार्यक्रम में कपड़े सजाने की कई पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया, जिनमें 'टाई एंड डाई', 'स्टेंसिल प्रिंटिंग', 'ब्लॉक प्रिंटिंग' और कढ़ाई की विभिन्न शैलियाँ शामिल थीं।

प्रतिभागियों को 'विस्तार शिक्षा और संचार प्रबंधन विभाग' (EECM) के विशेषज्ञों से व्यावहारिक ट्रेनिंग मिली। इससे वे इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को सीख पाए, जिसका इस्तेमाल वे अपने निजी उपयोग के साथ-साथ संभावित व्यावसायिक उद्यमों के लिए भी कर सकते हैं।

यह ट्रेनिंग EECM विभाग की प्रमुख डॉ. रितु मित्तल गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले सजावटी कपड़ा उत्पाद बनाने में रचनात्मकता, रंगों के सही मेल, सही कपड़े के चुनाव और 'फिनिशिंग' तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।

पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में काफी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने व्यावहारिक सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया। ट्रेनिंग का समापन प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सीखे गए कौशल और तकनीकों का प्रदर्शन किया।

Friday, March 6, 2026

महिला सशक्तिकरण कोई ट्रॉफी नहीं--अनीता शर्मा

Ani Sharma on Friday 6th March 2026 at 3:14 PM Regarding Women Empowerment 

यह हर दिन के फैसलों से हासिल होने वाला अधिकार है

आर्थिक आत्मनिर्भरता और मानसिकता में बदलाव से ही संभव है वास्तविक सशक्तिकरण

महिला दिवस केवल उत्सव नहीं, समाज में बदलाव का अवसर

लुधियाना: 6 मार्च 2026: (मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर
नवकिरण वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से महिला सशक्तिकरण विषय पर एक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता शर्मा ने की।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अनीता शर्मा ने कहा कि महिला दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में मानसिकता परिवर्तन का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब इसे केवल चर्चा तक सीमित न रखकर व्यवहार और कार्य में उतारा जाए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार आर्थिक आत्मनिर्भरता है। इसके लिए महिलाओं को आधुनिक दौर के अनुरूप कौशल जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मार्केटिंग और कोडिंग सीखने के अवसर मिलने चाहिए। साथ ही वित्तीय साक्षरता के माध्यम से निवेश, बचत और टैक्स की बुनियादी जानकारी भी जरूरी है।

अनीता शर्मा ने कहा कि सशक्तिकरण की शुरुआत घर से होती है और घरेलू जिम्मेदारियों में समान भागीदारी आवश्यक है। बेटियों को केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वतंत्र सोच और निर्णय लेने की शक्ति दी जानी चाहिए।

उन्होंने समाज और कार्यस्थलों पर सुरक्षित व समावेशी वातावरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया तथा कहा कि महिलाओं को समान अवसर मिलने के साथ-साथ नेतृत्व की भूमिकाओं में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि इस महिला दिवस पर हम एक छोटा संकल्प लें—

किसी एक महिला के कार्य या विचार की खुलकर सराहना करें और उसे आगे बढ़ने के लिए समर्थन दें।

अनीता शर्मा ने ज़ोर देकर दोहराया कि कहा,

“सशक्तिकरण कोई ट्रॉफी नहीं है जिसे दिया जाता है, यह वह अधिकार है जिसे हम हर दिन के छोटे-छोटे फैसलों से सुरक्षित करते हैं।

Tuesday, February 24, 2026

संस्कार भारती की नव वर्ष कार्यक्रमों को लेकर प्रारंभिक बैठक सम्पन्न

Pardeep Sharma IPTA on Tuesday 24th February 2026 at 13:44 Regarding Sanskar Bharti Meeting 

अप्रैल में एक संगीत कार्यक्रम कराने का निर्णय भी लिया गया


लुधियाना
: 24 फरवरी 2026: (प्रदीप शर्मा इप्टा// वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

जो लोग और संगठन आम जनता और खास कर युवा वर्ग में अच्छे संस्कार पैदा करने के लिए सक्रिय हैं उनमें से संस्कार भारती भारतीय कला, ललित कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है। राष्ट्रिय भावना से प्रेरित यह सांस्कृतिक संगठन है। सन 1981 में इसकी स्थापना लखनऊ में हुई थी। यह संस्था कला के माध्यम से राष्ट्रभक्ति जगाने, सांस्कृतिक प्रदूषण को रोकने और भारतीय परंपराओं के संरक्षण के लिए कार्य करती है। इसके मार्गदर्शक मण्डल में नानाजी देशमुख, भाऊराव देवरस, और बाबा योगेंद्र प्रमुख थे। अपनी स्थापना के समय से ही यह संगठन अच्छे संस्कारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हो कर काम कर रहा है। एकता अखंडता और मानवता इसके प्रचार का अक्सर फॉक्स रहते हैं। 

इसकी बहुत सी गतिविधियाँ साल भर जारी रहती हैं।  'कला साधक संगम' (वार्षिक अधिवेशन), रंगोली, चित्रकला, संगीत, नाटक और शास्त्रीय नृत्य विधाओं का आयोजन इनमें से प्रमुख हैं। 

इस संगठन का दृष्टिकोण कला को 'सॉफ्ट पावर' मानकर भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता को स्थापित करना रहता है। यह संगठन जातिवादी ए क्षेत्रवादी विचारों से बहुत ऊपर उठ कर काम करता है। 

इसका कार्यक्षेत्र बहुत विस्तृत है। देश भर में अपनी शाखाओं और सदस्यों के माध्यम से पारंपरिक कलाओं को नई तकनीक से जोड़ना भी इस संगठन के लिए प्रमुख रहता है। 

संस्कार भारती का नारा है- "संस्कार भारती भारते नवजीवनम साधयति" (संस्कार भारती भारत में नवजीवन प्रदान कर रही है)। 

अब संस्कार भर्ती फिर से सक्रिय है। नव वर्ष में प्रस्तावित सांस्कृतिक गतिविधियों की रूपरेखा तय करने के उद्देश्य से संस्कार भारती की एक साधारण बैठक लुधियाना क्लब में आयोजित की गई।

बैठक में डॉ. बबीता जैन, प्रदीप शर्मा, बेनू सतीश कांत, सीमा भाटिया, अनमोल शुभंम, संगीता भंडारी, डॉ. पूनम सपरा, जसप्रीत मोहन सिंह, मोनिका कटारिया, शांति जैन एवं अंकिता उपस्थित रहे।

बैठक में अप्रैल माह में एक संगीत कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के चयनित बच्चों को एक मंच पर लाकर प्रतियोगिता करवाई जाएगी। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट चार प्रतिभागियों को मोमेंटो तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त, महिलाओं की कला से जुड़े एक विशेष सर्वेक्षण की योजना भी तय की गई, जिसके माध्यम से उन महिलाओं को चिन्हित किया जाएगा जिन्होंने अपनी कला को निरंतर जीवित रखा है अथवा जो विभिन्न कारणों से अपनी कला को आगे नहीं बढ़ा सकीं। यह पहल उन्हें पुनः कला के क्षेत्र से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

बैठक में अगले माह के अंत में एक कवि दरबार आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे साहित्यिक सृजन और संवाद को मंच मिल सके।

संस्कार भारती के नए आयोजनों और अन्य प्रोग्रामों की जानकारी सुश्री बेनू सतीश कॉंत ने दी मीडिया को दी। सुश्री बेनु सतीश कान्त स्वयं भी बहुत अच्छी लेखिका हैं।  

अंत में चाय-नाश्ते के साथ बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।

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