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Saturday, November 27, 2021

बच्चों के विचारों, अधिकारों और पोषण विषय के साथ विशेष आयोजन

प्रविष्टि तिथि: 26 NOV 2021 7:23PM by PIB Delhi

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने मनाया नवंबर के दौरान 'आजादी का अमृत महोत्सव'

नई दिल्ली: 26 नवंबर 2021:(पीआईबी)::

भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के महत्वपूर्ण अवसर का जश्न मनाने के लिए, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 14-21 नवंबर 2021 के दौरान 'बच्चों के विचारों, अधिकारों और पोषण' विषय के साथ आजादी का अमृत महोत्सव मनाया। इसका उद्देश्य बाल अधिकारों के बारे में जागरूकता पैदा करना और मुख्य रूप से बाल देखभाल संस्थानों (सीसीआईएस) और विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियों के जनता के बीच जाकर विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से इस दिशा में समुदाय की सामूहिक विचार प्रक्रिया को प्रोत्साहित करना था।

इस सप्ताह के दौरान, डब्लूसीडी मंत्रालय के अधिकारियों ने 17 बाल देखभाल संस्थानों का दौरा किया जिसमें राजकीय बाल संप्रेक्षण गृह, विशेष बाल गृह और विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियां शामिल हैं, जो 16 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों (दिल्ली, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु, असम, मध्य प्रदेश, मेघालय और मणिपुर) में मौजूद हैं। इसके अलावा संस्कृति और पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।

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यह वास्तव में सीसीआई में बच्चों के लिए एक प्रेरक और शिक्षित करने वाला अनुभव था। उनके मासूमियत भरे स्वभाव और उत्साह ने सीसीआई में जीवंत और सकारात्मक माहौल बना दिया। हमारी मातृभूमि की महिमा का बखान करने वाली कविताओं का पाठ हो या गायन, उनकी मुस्कुराहट देखने लायक थी। बच्चों ने अपने पसंदीदा स्वतंत्रता सेनानियों के कहे प्रसिद्ध कथनों का मंचन किया और कैनवास पर विषय आधारित चित्रकारी की। उन्होंने पर्यावरण को बचाने, पौधे लगाने, प्लास्टिक का उपयोग कम करने जैसे कई संकल्प भी लिए। 'अगले 25 वर्षों के लिए भारत का दृष्टिकोण' विषय पर भाषण प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। बच्चों ने मातृभूमि के प्रति समर्पण भाव के साथ दिल को छू लेने वाले भाषण दिए। बच्चों ने सांस्कृतिक विरासत और भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के महान नेताओं और नायकों की कहानियों पर वीडियो स्क्रीनिंग का आनंद लिया। बच्चे खुशी-खुशी राष्ट्रीय संग्रहालय भी गए, जो सबमें कौतूहल पैदा करता है।

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 सप्ताहभर, डब्लूसीडी मंत्रालय ने गोद लेने वाले माता-पिता और आगे गोद लेने के बारे में सोच रहे माता-पिता के साथ बैठकें की और विशेष कार्यक्रम/वेबिनार का आयोजन किया गया। ये बैठकें महाराष्ट्र में हुईं और एनआईपीसीसीडी गुवाहाटी में क्षेत्रीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसका मकसद मुख्य रूप से कानूनी रूप से गोद लेने, गोद लेने के नियमों में परिवर्तन और एनआरआई माता-पिता पर इसके असर के बारे में बताना था। राज्य सरकारों, राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों, जिला बाल संरक्षण इकाइयों, विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियों और विदेश में भारतीय मिशनों के अधिकारियों ने इन कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। विधि और न्याय मंत्रालय, बाल अधिकार केंद्र, एनसीईआरटी, यूनिसेफ के अधिकारियों और बच्चों के लिए काम कर रहे 1600 विभिन्न हितधारकों की भागीदारी के साथ एनआईपीसीसीडी द्वारा बाल अधिकारों पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया।

विदेश मंत्रालय ने प्रवासी बच्चों के लिए 'देखो अपना देश' विषय पर प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया। विभिन्न प्रतियोगिताएं जीतने के बाद पुरस्कार मिलने पर बच्चों का उत्साह चरम पर था।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने 21 नवंबर 2021 को गांधी दर्शन, नई दिल्ली में बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों के निवारक पहलुओं पर जोर देते हुए बाल अधिकारों पर राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्घाटन बतौर मुख्य अतिथि माननीय मंत्री श्रीमती स्मृति ज़ूबिन इरानी, महिला और बाल विकास मंत्रालय ने किया। इस अवसर पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि किसी लोकतंत्र की सबसे अच्छी कसौटी यह होती है कि एक नागरिक और एक राष्ट्र के रूप में हम अपने सभी बच्चों को न्याय दिला पाते हैं या नहीं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बाल अधिकारों के प्रति समाज की चेतना को विकसित करना जरूरी है ताकि वे बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए आगे आ सकें। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए कई कदम उठाए हैं, जिसमें संसद द्वारा बच्चों के यौन अपराधों से संरक्षण, पॉक्सो अधिनियम और किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम में संशोधन शामिल हैं। हालांकि, समाज लगातार बदल रहा है और प्रशासनिक जरूरतें गतिशील हैं, इसलिए यह हम पर निर्भर है कि हम समय के साथ चलें और चुनौतियों के समाधान के साथ तत्पर रहें। उन्होंने कार्यशाला के प्रतिभागियों से आग्रह किया कि जब वे गरीबी से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का विश्लेषण करें, तो उन उत्पीड़नों पर भी ध्यान दें जो समृद्ध परिवारों, शक्तिशाली संगठनों एवं बच्चों की देखभाल करने वाले संस्थानों में होते हैं। हम इस बात पर भी गौर करें कि एक प्रशासक के रूप में ही नहीं बल्कि एक नागरिक के रूप में कैसे इसका समाधान निकाल सकते हैं।


डब्लूसीडी मंत्रालय के सचिव श्री इंदेवर पांडे ने
अपने संबोधन में कहा कि किसी भी संस्थान, व्यक्तिगत रूप से या प्राधिकारी की देखभाल के दौरान उपेक्षा, हिंसा और दुर्व्यवहार (जो शारीरिक, यौन, आर्थिक शोषण हो सकता है) से संरक्षण हर बच्चे का मौलिक अधिकार है। इस तरह की सुरक्षा के लिए बच्चों के अधिकार को बाल अधिकार (सीआरसी) पर संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन, 1989 और भारत के संविधान व कई अन्य कानूनों द्वारा मान्यता मिली हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सरकार ने देश के बच्चों के हित में विभिन्न स्तरों पर संस्थागत तंत्र बनाए हैं। उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता और साइको सोशल काउंसलिंग जैसे मुद्दों पर अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि मंत्रालय ने 'संवाद' की स्थापना की है जो एनआईएमएचएएनएस के साथ ऐसे मामलों से निपटने के लिए एक संस्थागत तंत्र है।

एनसीपीसीआर कार्यशाला में देशभर में बाल अधिकारों पर काम कर रहे हितधारकों ने हिस्सा लिया, जिसमें राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एससीपीसीआर) के अध्यक्ष/सदस्य; मानव तस्करी विरोधी यूनिटों (एएचटीयू); बाल संरक्षण सेवा के तहत काम करने वाले अधिकारी; बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम कर रहे एनजीओ के प्रतिनिधियों, वर्चुअल रूप से जुड़े केंद्र/यूटी के पंचायती राज विभाग, श्रम और शिक्षा विभाग के प्रतिभागी शामिल थे। एनसीपीसीआर कार्यशाला के दौरान बाल तस्करी से बचाव और पुनर्वास, बाल तस्करी के प्रकार, कोविड-19 महामारी के दौरान तस्करों की कार्य प्रणाली, बाल सुरक्षा, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और इसकी रोकथाम के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। एक खुली चर्चा भी आयोजित की गई जिसकी अध्यक्षता, अध्यक्ष एनसीपीसीआर ने की। इस दौरान सड़कों पर बच्चों की स्थिति की बात करते हुए माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत सीआईएसएस पर उठाए जाने वाले कदमों की चर्चा की गई।

डब्लूसीडी मंत्रालय द्वारा आजादी का अमृत महोत्सव के तहत एक सप्ताह तक हुए कार्यक्रमों का पूरा पैकेज बच्चों को अपनी रचनात्मकता के बारे में जागरूक करने के लिए प्रेरणा का स्रोत रहा जिससे वे नए और अभिनव विचारों को आत्मसात कर आत्मनिर्भर बन सकें। देशभक्ति, देश की उपलब्धियों पर गर्व की भावना का आह्वान किया गया क्योंकि हम एक आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

21 नवंबर को महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती स्मृति ज़ूबिन इरानी ने एक ट्वीट संदेश में अपने देश के लिए एक संकल्प लेने को प्रोत्साहित किया। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट में कहा, 'प्यारे #ChildrenOfNewIndia, हमारे राष्ट्र के अगले 75 साल आपके हैं। एक मजबूत और विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में योगदान करने का संकल्प लें। आपके सपने हमारे हैं जिन्हें पूरा करने के लिए हम अपना कर्तव्य निभाना जारी रखेंगे। आओ मिलकर एक नया भारत बनाएं!'


Friday, March 29, 2013

जननी सुरक्षा योजना का भौतिक एवं वित्तीय प्रदर्शन


ग्रामीण क्षेत्रों में 600 रुपए प्रति प्रसव
वर्ष 2005-06 से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एऩआरएचएम) के तहत जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) नामक राष्ट्रीय योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव की व्यवस्था में सुधार कर शिशु और मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाना है। इस योजना के तहत सभी गर्भवती महिलाओं को 8 ईएजी राज्यों (जैसे बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) तथा जम्मू एवं कश्मीर और असम में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधा केन्द्रों में प्रसव पर नकद सहायता उपलब्ध कराई जाती है। अन्य राज्यों में वैसी गर्भवती महिलाएं जो गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) की श्रेणी में तथा वैसी महिलाएं जो अनुसूचित जाति (आ.जा.) तथा अनुसूचित जनजाति (आ.ज.जा.) श्रेणी में हों और उनका संस्थागत प्रसव स्वास्थ्य केन्द्र में होता है तो उन्हें शर्तानुसार नकद हस्तांतरण की सुविधा प्राप्त होगी।
वर्ष 2005-06 के अंतर्गत 7.39 लाख गर्भवती महिलाओं को इसका लाभ मिला है और जेएसवाई ने वर्ष 2011-12 में लगभग 109.37 लाख गर्भवती महिलाओं को नकद सहायता उपलब्ध कराकर एक आकर्षक सफलता अर्जित की है। इसी प्रकार इस योजना के तहत वित्तीय व्यय वर्ष 2005-06 के 38 करोड़ रूपए की तुलना में कई गुना बढ़कर वर्ष 2011-12 में 1,552.85 करोड़ रुपए हो गया है।
जेएसवाई का भौतिक एवं वित्तीय प्रदर्शन इस प्रकार रहा-
वर्ष
लाभार्थियों की संख्या
(लाख में)
व्यय
(करोड़ में)
2005-06
7.39
38. 29
2006-07
31.58
258. 22
2007-08
73.29
880. 17
2008-09
90. 37
1241. 33
2009-10
100.78
1473.76
2010-11
106.96
                1618.39
2011-12
109.37
1606.18
2012-13
80.68*
1155.00*
*वर्ष 2012-13 के दिसंबर, 2012 तक भौतिक एवं वित्तीय उपलब्धि।
सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने के लिए इस पहल ने समुदाय आधारित स्वास्थ्य स्वयं सेवकों की पहचान की है, जिसमें एएसएचए (मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता) हैं, वे स्वास्थ्य प्रणाली और समुदायों के बीच एक कड़ी का काम करेंगी। देश में 8 लाख से ज्यादा एएसएचए स्वयं सेवक कार्य कर रहे हैं। इस योजना को बढ़ावा देने के लिए हाल ही में एएसएचए कार्यकर्ताओं की निष्पादन आधारित प्रोत्साहन राशि में वृद्धि की गई है, जो निम्नलिखित है-
·        ग्रामीण क्षेत्रों में 600 रुपए प्रति प्रसव। [ जन्मपूर्व घटक के लिए 300 रुपए (कम से कम 3 एएनसी) तथा 300 रुपए संस्थागत प्रसव की सुविधा प्रदान करने के लिए ]
·        शहरी क्षेत्रों में 400 रुपए प्रति प्रसव। [ जन्मपूर्व घटक के लिए 200 रुपए (कम से कम 3 एएनसी) तथा 200 रुपए संस्थागत प्रसव की सुविधा प्रदान करने के लिए ]
***
मीणा/आनन्द/शदीद-1626

महिलाओं के लिए अलग नगर बस सेवा

28-मार्च-2013 15:21 IST
केन्द्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने राज्य सरकारों को 10 लाख की आबादी वाले शहरों में महिलाओं के लिए अलग से नगर बस सेवा के प्रावधान की समीक्षा करने के संबंध में हाल ही में परामर्श जारी किया है। मंत्रालय ने सभी नगरीय बसों, जेएनएनयूआरएम तथा गैर जेएनएनयूआरएम बसों में "शहरी बस विनिर्देश" के अनुसार गुणवत्तापूर्ण परिवहन प्रणाली (आरटीएस) विनिर्देश के क्रियान्वयन के संबंध में राज्यों को परामर्श भी जारी किया है। तिपहिया वाहनों तथा टैक्सियों में जीपीएस/जीपीआरएस के जरिए वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ-साथ सामान्य नियंत्रण केन्द्र के जरिए प्रबंधन के संबंध में कार्यवाही शुरू करने का परामर्श राज्यों को दिया गया है, ताकि यह प्रणाली यात्रियों के लिए बेहतर और सुरक्षित हो सके। 

जेएनएनयूआरएम के तहत विभिन्न शहरों में स्वीकृत की गई बसों की खरीद "शहरी बस विनिर्देश (यूबीएस)" के अऩुसार होनी चाहिए। केन्द्र सरकार द्वारा जारी अंश जो कि अतिरिक्त केन्द्रीय सहायता है, वह इन प्रणालियों के खरीद तथा मंत्रालय को सौंपे जाने वाले खरीद आदेश से जुड़ा है। जेएनएनयूआरएम के तहत इन प्रणालियों का कार्यान्वयन/खरीद 31 मार्च, 2014 तक बढ़ा दिया गया है। 
***
मीणा/आनन्द/शदीद-1627

Tuesday, March 19, 2013

पूर्व राष्‍ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल पर पुस्‍तक

19-मार्च-2013 19:23 IST
उप राष्‍ट्रपति ने किया पुस्‍तक का लोकार्पण 
उप राष्‍ट्रपति श्री एम हामिद अंसारी ने कहा है कि हमारे देश ने अनेक महिला नेता दिए हैं जिन्‍होंने समाज पर अमिट छाप छोड़ी है लेकिन यह दुखद है‍कि हम अक्‍सर महिलाओं को समान नागरिक के रूप में नहीं देखते और उनके मानवीय अधिकारों की ही अनदेखी करते हैं। 

उप राष्‍ट्रपति ने यह बात पूर्व राष्‍ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल पर लिखी पुस्‍तक का लोकार्पण कर रहे थे। इस पुस्‍तक का शीर्षक है : फस्‍ट वुमन प्रेसीडेंट आफ इंडिया, रिइनवेंटिंग, लीडरशिप, श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल। इस पुस्‍तक की लेखिका हैं, इंग्लिश एंड फारेन लैंग्‍वेज यूनिवर्सिटी हैदराबाद की कुलपति प्रोफेसर सुनैना सिंह। 

उप राष्‍ट्रपति ने कहा कि पूर्व राष्‍ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल का जीवन और कार्य नागरिकों के लिए प्रेरणा स्रोत और उदाहरण योग्‍य है। श्रीमती पाटिल ने सार्वजनिक सेवा सम्‍मान और आधुनिक दृष्टिकोण के साथ की। भारत के राष्‍ट्रपति के रूप में उन्‍होंने उच्‍चतम पद का निर्वहन करते हुए संविधान की मर्यादाओं का पालन किया और प्रतिबद्ध रूप से देश के सामाजिक आर्थिक विकास के लिए कार्य किया। 

उप राष्‍ट्रपति श्री हामिद अंसारी ने पुस्‍तक की लेखिका प्रोफेसर सुनैना सिंह के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि पुस्‍तक न केवल प्रथम महिला राष्‍ट्रपति की आत्‍मकथा है बल्कि पुस्‍तक से देश की विभिन्‍न समस्‍याओं की भी जानकारी मिलती है। 

वि. कासोटिया/गांधी/दयाशंकर – 1468

Thursday, February 28, 2013

बजट:महिलाओं, युवाओं और गरीब व्‍यक्तियों से तीन वायदे

बालिकाओं और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 1,000 करोड़ रुपये की निर्भया निधि 
वित्‍त मंत्री श्री पी चिदंबरम ने आज लोकसभा में वर्ष 2013-14 का आम बजट पेश करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं, युवाओं और गरीब व्‍यक्तियों के साथ तीन वायदे कर रही है। उन्‍होंने कहा कि महिलाओं की गरि‍मा और सुरक्षा सुनि‍श्‍चि‍त करना हमारी सामूहि‍क जि‍म्‍मेदारी है। हम लड़कि‍यों और महि‍लाओं को सशक्‍त और सुरक्षि‍त बनाने के लि‍ए हरसंभव कार्य कर रहे हैं । इसके लि‍ए 1000 करोड़ रुपये के सरकारी अंशदान से नि‍र्भया नि‍धि‍ बनाए जाने का प्रस्‍ताव है । वि‍त्‍त मंत्री ने कहा कि‍ भारत में युवाओं की बहुत बड़ी तादाद है । युवाओं को स्‍वेच्‍छा से कौशल वि‍कास कार्यक्रम में शामि‍ल होने के लि‍ए प्रोत्‍साहि‍त कि‍या जाएगा । राष्‍ट्रीय कौशल वि‍कास नि‍गम वि‍भि‍न्‍न कौशलों में प्रशि‍क्षण देने के लि‍ए पाठ्यक्रम और मानक तैयार करेगा । इस योजना के लि‍ए 1000 करेाड़ रुपये का प्रावधान कि‍या जा रहा है । 

श्री चि‍दम्‍बरम ने कहा कि‍ भारत के गरीब व्‍यक्‍ति‍यों के लि‍ए आपका पैसा आपके हाथ के उद्देश्‍य से प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण योजना शुरू की गई है । सरकार का मानना है कि‍ असली धन वही है जो जनता के काम आए । सरकार यह सुनि‍‍श्‍चत करेगी कि‍ प्रत्‍येक लाभार्थि‍यों के लि‍ए बैंक खाता खोला जाए और उसे आधार से जोड़ा जाए । प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण योजना यूपीए सरकार के इसी कार्यकाल में पूरे देश में लागू की जाएगी । 
***

मीणा/राजगोपाल/प्रदीप/ सुधीर/संजीव/इन्‍द्रपाल/बि‍ष्‍ट/ शदीद/सुनील/शौकत/मनोज- 770

Tuesday, February 5, 2013

महिलाओं के प्रति यौन अपराध

04-फरवरी-2013 18:33 IST
सरकार ने अपराधों से निपटने के लिए बनाई कार्य योजना 
कार्य योजना पुलिस और प्रशासन को सुदृढ़ करने की 
सरकार ने महिलाओं के प्रति अपराधों से निपटने के लिए एक समयबद्ध कार्य योजना की पहल की है। त्‍वरित कार्रवाई, लैंगिक संवेदनशील कार्रवाई व्‍यवस्‍था तथा प्रवर्तन एजेंसियों की जवाबदेहही बढ़ाने के जरिए महिलाओं के प्रति अपराधों की रोकथाम सुनिश्चित करने के लिए पुलिस और प्रशासन को सुधारने तथा मज़बूत करने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। 3 फरवरी, 2013 को राष्‍ट्रपति द्वारा लागू अध्‍यादेश, फौजदारी कानून में संशोधन से संबंधित है। यह उपाय अध्‍यादेश के अतिरिक्‍त हैं। विभिन्‍न मंत्रालयों के साथ विचार-विमर्श के बाद यह कदम उठाया गया है।

  कैबिनेट सचिव ने निश्चित समय-सीमा के भीतर कार्य योजना बनाने के लिए संबंधित मंत्रालयों के वरिष्‍ठ अधिकारियों के साथ हाल ही में कई बैठकें की हैं। सात मुख्‍य मंत्रालयों के सचिवों ने इन उपायों को लागू करने पर व्‍यक्तिगत रूप से नज़र रखने और कैबिनेट सचिव तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को हर महीने इसकी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। इन उपायों में पुलिस व्‍यवस्‍था में बदलाव, मोटर वाहन अधिनियम की समीक्षा, महिलाओं के प्रति अपराधों से निपटने की कार्रवाई को ज्‍यादा प्रभावी तथा संवेदनशील बनाने के उपाय और अन्‍य प्रशासनिक कदम शामिल हैं।
इनमें निम्‍नलिखित कदम शामिल हैं:
1. राष्‍ट्रीय अपराध रि‍कार्ड ब्‍यूरो (एनसीआरबी) अपराधियों का डाटाबेस बनाएगी। महिलाओं के साथ दुर्व्‍यवहार करने वाले अपराधियों की विस्‍तृत जानकारी वेबसाइट पर उपलब्‍ध होगी।

2. किसी भी थाने में उस समय कार्य-क्षेत्र पर ध्‍यान दिए बिना शीघ्र एफआईआर दर्ज करने की सुविधा दी जाएगी। एफआईआर उसके बाद आगे की जांच के लिए संबंधित थाने में हस्‍तांतरित की जा सकती है। इससे महिलाओं के प्रति मुद्दों सहित गंभीर अपराधों से निपटने में मदद मिलेगी।

3. यह ज़रूरी है कि जब लोग उत्‍पीड़ि‍त महिला को सहायता देने के लिए आगे आएं तो उन्‍हें किसी दिक्‍कत का सामना न करना पड़े। इसके लिए ऐसे लोगों को बिना किसी हिचकिचाहट के अपराध के बारे में बताने तथा बिना किसी पूछ-ताछ के या गवाह बनने के लिए ज़ोर दिए बगैर पीडि़त/पुलिस की सहायता देने के लिए सुरक्षा दी जानी चाहिए।

4. 'केवल महिलाओं के लिए' बस सेवा शुरू की जानी चाहिए। देशभर में अधिक महिलाओं को बसें/टैक्‍सी चलाने के लिए प्रोत्‍साहित करने के वास्‍ते एक कार्यक्रम का प्रस्‍ताव किया गया है।

5. वर्तमान मोटर वाहन नियमों की समीक्षा की जाएगी।

6. ऐसी खबरें हैं कि कई वाहनों में फैक्‍ट्री फिटिड शीशे हैं जिसमें उनपर रंग स्‍वीकार्य सीमा से अधिक है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव तकनीकी विशेषज्ञों तथा पुलिस प्रतिनिधियों के साथ सलाह-मश्‍वि‍रे के बाद यह तय करेंगे कि सार्वजनिक परिवहन बसों में शीशों को रंगने की अधिकतम स्‍वीकार्य मात्रा कितनी होनी चाहिए। पर्दों के इस्‍तेमाल पर भी गौर किया जाएगा जो कि यात्री की सुविधा और सुरक्षा कारणों के लिए आवश्‍यक दृश्‍यता पर निर्भर करेगा। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने उचित रूप से मानकों को संशोधित करने का प्रस्‍ताव कि‍या है। बसों के निर्माताओं को संशोधि‍त मानकों का पालन करना होगा।

7. समयबद्ध कार्यक्रम में दिल्‍ली में सार्वजनिक परिवहन वाहन चला रहे ड्राइवरों/कंडक्‍टरों/हेल्‍पर (पूरे कर्मीदल) के लिए शत प्रतिशत सत्‍यापन की ज़रूरत है जिसमें ऐसे व्‍यक्तियों की बायो-मीट्रिक पहचान लेना शामिल है। इसे अनिवार्य बनाने के लिए प्रचलित नियमों की समीक्षा के लिए कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक परिवहन वाहनों के कर्मीदल के सत्‍यापन के लिए निश्चित समय सीमा में प्रोटोकॉल बनाया जाएगा तथा इसे लागू करने के लिए राज्‍य सरकारों को उपयुक्‍त सूचना भी दी जाएगी। नियत समय सीमा के बाद किसी भी सार्वजनिक परिवहन वाहन में किसी ड्राइवर/कंडक्‍टर/हेल्‍पर या किसी अन्‍य कर्मीदल को बस चलाने की तब तक अनुमति नहीं होगी जब तक कि ऐसे व्‍यक्ति का सत्‍यापन न हुआ हो और उनके पास सत्‍यापन प्रमाण पत्र/पहचान अनुमति पत्र न हो।
8. बस मालिक ही इन उपायों का पालन करने के लिए जिम्‍मेदार होंगे। बार-बार अपराधों में लिप्‍त वाहन मालिकों पर सार्वजनिक परिवहन वाहन चलाने के लिए उनके वर्तमान परमिट/ कोई नया प‍रमिट उपलब्‍ध करने पर रोक  लगाना भी ज़रूरी है। साथ ही बार-बार अपराधों में लिप्‍त वाहनों को ज़ब्‍त करने की भी आवश्‍यकता है। बस के मालिक/ड्राइवर के विवरण तथा परमिट और लाइसेंस की जानकारी बस के अंदर और बाहर स्‍पष्‍ट रूप से दिखनी चाहिए जहां से वह आसानी से पढ़ी जा सके। बसों के चालन पर नज़र रखने के लिए नियंत्रण कक्ष के गठन के साथ सभी. सार्वजनिक परिवहन वाहनों में जीपीएस यंत्रों का इस्तेमाल भी ज़रूरी है।  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय इस संबंध में सभी राज्‍यों  को उपयुक्‍त परामर्श जारी करेगा। 

9. परमिट शर्तों का उल्लंघन करने पर लगाए जाने वाले जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी और एक खास संख्या के बाद अपराधों को बढ़ने से रोकने की आवश्यकता है।

10. दिल्ली सरकार सार्वजनिक परिवहन के वाहनों के परमिटों में संशोधन करने की मसौदा अधिसूचना जारी करेगी। इसमें वाहनों की खिड़कियों के शीशों पर काली फिल्में लगाने पर मनाही, अपराध दोहराने पर दंड में वृद्धि और अन्य आवश्यक उपाय शामिल हैं। अंतिम अधिसूचना एक महीने में जारी की जाएगी।

11. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव सभी राज्यों को दिल्ली सरकार द्वारा परमिट की शर्तों में किए गए संशोधन/परिवर्तन के बारे में लिखेंगे और उनसे वैसे उपाय करने का अनुरोध करेंगे।

12.थाने का निरीक्षण करने के समय निरीक्षण अधिकारी के लिए यह जरूरी होना चाहिए कि वह खास तौर पर थाने में तैनात व्यक्तियों की लिंग संवेदनशीलता के बारे में निष्कर्षों और महिलाओं के प्रति अपराधों से जुड़ी शिकायतों को दर्ज करने के बारे में थाने/एसएचओ के रिकार्ड को दर्ज करें और यह देखें कि थाने में महिलाओं को अपनी शिकायत दर्ज कराने से हतोत्साहित तो नहीं किया जा रहा।

13.इस संबंध में महिलाओं के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया दिखाने अथवा निरीक्षण संबंधी दायित्वों की लापरवाही करने वाले पुलिसकर्मियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

14. पुलिस बल में लिंग संवेदनशीलता बनाए रखने की निरंतर आवश्यकता है, खासकर बीट ड्यूटी अथवा पुलिस स्टेशन पर तैनात सिपाही के स्तर पर। यह बात पुलिसकर्मियों के दिमाग में बिठाने की आवश्यकता है कि महि‍लाओं पर असंवेदनशील टिप्पणियां पूरी तरह बंद होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस द्वारा नियमित आधार पर प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता है।महिलाओं से पक्षपात करने वाले किसी भी कर्मचारी/अधिकारी के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस बारे में प्रत्येक स्तर पर की जाने वाली कार्रवाई को रिपोर्ट करना होगा। यदि यह पता चलता है कि गलती करने वाले किसी व्यक्ति पर कार्रवाई नहीं की गई है तो निरीक्षण अधिकारी को जवाबदेह ठहराया जाएगा। इस बारे में निर्देश जारी किए जाएंगे और उनका पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।

15. सभी स्तरों पर रिपोर्टिंग अधिकारी के लिए यह अनिवार्य होगा कि वह पुलिसकर्मी की वार्षिक निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करते समय उसकी महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता के बारे में टिप्पणी करें। इस बात पर जोर दिया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि इस बारे में टिप्पणी उसके व्यवहार के विशिष्ट अवसरों पर आधारित हों और मात्र रस्मी हां या ना तक सीमित नहीं रखी जाए। पुलिसकर्मी की तैनाती अथवा पदोन्नति पर विचार करते समय महिलाओं के प्रति उसके रवैये को खासतौर पर ध्यान में रखा जाना चाहिए।

16. पुलिस बल में अधिक महिलाओं को भर्ती करने की अत्‍यधिक आवश्‍यकता है। महिलाओं को दिल्‍ली पुलिस में बड़ी संख्‍या में भर्ती करना होगा। गृह मंत्रालय इस वित्‍त वर्ष में इस बारे में आवश्‍यक स्‍वीकृति प्राप्‍त करने की कार्रवाई करेगा। इसी प्रकार राज्‍यों में भी पुलिस बल में अधिक महिलाओं को भर्ती करने की कार्रवाई करने की आवश्‍यकता होगी। इस बारे में राज्‍यों को प्रेरित करने के लिए गृह मंत्रालय चार सप्‍ताह के भीतर उचित प्रस्‍ताव/योजना तैयार करेगा और उसके लिए आवश्‍यक स्‍वीकृति प्राप्‍त करेगा। 

17. दिल्‍ली में अतिरिक्‍त पीसीआर वैनों की आवश्‍यकता होगी। इस प्रकार की 370 वैन प्राप्‍त करने का प्रस्‍ताव दिल्‍ली पुलिस ने भेजा है। इस बारे में स्‍वीकृति इसी वित्‍त वर्ष के भीतर देने की योजना है।

18. खास इलाकों जैसे शिक्षा संस्‍थानों, सिनेमा घरों, मॉल और बाजारों के आस-पास के इलाकों में पीसीआर वैनों में महिला पुलिसकर्मियों को तैनात करने का प्रस्‍ताव है। इसके अलावा बीपीओ में काम करने वाली महिला कर्मचारियों के रात के समय काम से लौटने के मार्गों पर भी पीसीआर वैनों में महिला कर्मियों को तैनात किया जाएगा। समय के साथ कुछ ऐसे थाने भी बनाए जाएंगे जहां सिर्फ महिलाएं काम करेंगी।

19. समुदाय के लोगों को पुलिस के काम में हाथ बंटाने को प्रोत्साहन की भी योजना है। इससे न केवल पुलिस की प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सकेगा बल्कि प्रत्‍येक मोहल्‍ले में जिम्‍मेदार लोगों को नागरिकों के रूप में अपनी ड्यूटी निभाने के लिए प्रेरित किया जा सकेगा।

20. दिल्‍ली में अनेक कैमरे लगाए जा रहे हैं और इस समय 34 बाजारों और चार सीमावर्ती चौकियों पर सीसीटीवी प्रणालियां काम कर रही हैं। तथापि सार्वजनिक स्‍थानों में सीसीटीवी प्रणालियों की संख्‍या और बढ़ाने की अत्‍यधिक आवश्‍यकता है। इसके लिए पुलिस व्‍यापारिक संघों, आरडब्‍ल्‍यूए, व्‍यावसायिक/कार्यालय भवनों के प्रबंधकों, मॉल, सिनेमाघरों, एनजीओ आदि सभी हितधारकों का सहयोग लेगी। उन्‍हें अपने परिसरों के बाहर स्‍वीकृत नमूनों के सीसीटीवी लगाने के लिए प्रोत्‍साहित किया जाएगा। सभी राज्‍यों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई करने की आवश्‍यकता है।

21. सार्वजनिक स्‍थानों में  सड़कों पर प्रकाश की व्‍यवस्था  करने पर ज्यादा ध्‍यान देने की आवश्‍यकता है। नगर निकायों को मौजूदा सुविधाओं की समीक्षा करनी चाहिए तथा जहां कही आवश्‍यक हो इन्‍हें मजबूत बनाना चाहिए।

22. महिला और बाल विकास विभाग यौन हिंसा पीड़ितों को मुआवजा देने की योजना तथा यौन हिंसा पीड़ितों को मनोवै‍ज्ञानिक एवं अन्‍य सहायता उपलब्‍ध कराने के लिए चुनिंदा अस्‍पतालों में आपदा राहत केंद्र स्‍थापित करने की योजना भी लागू करेगा। प्रस्‍तावित योजना 2013-14 से प्रायौगिक आधार पर देश के 100 जिलों में लागू की जायेगी।

23. सरकार ने सभी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए देशव्‍यापी तीन अंकों का नंबर (100 नंबर की तरह) शुरू करने का प्रस्‍ताव किया है। यह 911 या 990 की तरह जैसे आपातकालीन प्रबंध प्रणालियों जैसी व्‍यवस्‍था होगी। इस तरह की व्‍यवस्‍था अनेक विकसित देशों में उपलब्‍ध है। ऐसी सेवा सभी टेलीकॉम सेवा प्रदाताओें के ग्राहकों को उपलब्‍ध होगी क्‍योंकि फिलहाल विभिन्‍न स्थितियों से निपटने या लक्षित समूहों की सुविधा के लिए अलग-अलग टेलीकॉम नंबर इस्‍तेमाल किये जा रहे है। इसलिए ऐसी व्‍यवस्‍था बनाने का प्रस्‍ताव है जहां किसी भी तरह की मुसीबत में फंसा व्‍यक्ति एक ही नंबर पर सम्‍पर्क कर सकेगा। इस नंबर पर कॉल करने के बाद कॉलर को किसी अन्‍य विशेष अथवा आपातकालीन नंबर पर संपर्क करने के लिए नहीं कहा जाना चाहिए। इसके बजाय कॉल बिना किसी बाधा के मुसीबत संबंधी उचित लाइन पर कनेक्‍ट की जानी चाहिए। गृह मंत्रालय, दूरसंचार विभाग के साथ मिलकर फरवरी 2013 के आखिर तक इस संबंध में व्‍यवस्‍था करने और उसे संचालित के बारे में मूल परिकल्‍पना तैयार करेगा।

24. सामान्‍य आपातकालीन हेल्‍पलाइन के अतिरिक्‍त एक ऐसी हेल्‍पलाइन भी होगी जो मुसीबत में फंसी महिलाओं के लिए ही समर्पित होगी। यह हेल्‍पलाइन देशभर में तीन अंक के विशिष्‍ट नंबर की होनी चाहिए। इसके लिए पूरे देश में 181 नंबर पर यह सुविधा शुरू की जा सकती है।

25. फिल्‍मों, टेलीविजन धारा‍वाहिकों और विज्ञापनों में महिलाओं का नकारात्‍मक, फूहड़ और अथवा अश्‍लील चित्रण लंबे समय से चिंता का कारण रहा है। यदि इस संबंध में सभी हितधारकों को निरंतर संलग्‍न रखा जाए तो यह सहायक होगा। सार्वजनिक हित के विज्ञापनों के मीडिया अभियान को भी बनाये रखने की आवश्‍यकता है।

26. स्‍कूलों में जीवन मूल्‍यों से संबंधित शिक्षा की भूमिका बहुत महत्‍वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि सिर्फ पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा शामिल करना पर्याप्‍त नहीं  है। शिक्षकों को भी जीवन मूल्‍यों की शिक्षा में प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। स्‍त्री–पुरूष समानता के बारे में स्‍थायी जागरूकता अभियान को सभी स्‍कूलों, कॉलेजों में चलाये जाने की आवश्‍यकता है तथा शिक्षा के हर स्‍तर पर स्‍त्री-पुरूष समानता से संबंधि‍त विषय शामिल करने की जरूरत है।

27. शिक्षण संस्‍थाओं में लड़कियों को आत्‍म रक्षा/मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण देना भी उपयोगी होगा। (PIB)

वि. कासोटिया/प्रियंका/क्वात्रा/प्रदीप/सुमन/अर्जुन/सोनिका/राजीव-425

Thursday, January 24, 2013

अब पंचायतों के जरिए मिल रही है

17-जनवरी-2013 14:09 IST
महिलाओं की आवाज को  पहचान 
पंचायती राज पर विशेष लेख//डॉ. हृषिकेश पांडा*                                 
विकेन्द्रीकृत सरकार की जड़े ग्राम सभा में गहराई से समाई हुई है। इसके तहत ग्राम पंचायत का हर एक मतदाता इसका सदस्य होता है और निर्णय लेने की प्रक्रिया, योजनाओं की सहमति, योजना को रद्द करने और लाभार्थियों के चयन में अपनी हिस्सेदारी कर सकता है। 

     ग्राम सभा को लगातार सामाजिक अंकेक्षण के लिए एक सुदृढ़ संस्थान के रुप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसका कारण यह है कि ग्राम सभा में ऐसे लोग शामिल होते हैं जो योजनाओं और कार्यक्रमों के लाभार्थी होते हैं और जब कोई कार्य शुरु होता है तो वो कार्यस्थल पर उपस्थित होते हैं और इस हिसाब से वे योजनाओं और कार्य के क्रियान्वयन की गुणवत्ता का सबसे अच्छी तरह से आकलन सकते हैं। इसलिए सामाजिक अंकेक्षण के लिए ग्राम सभा सर्वोत्तम एजेंसी है।

ग्राम सभा के साथ समस्या यह है कि कई स्थानों पर उपस्थिति काफी कम होती है। अधिकांशतः पंचायतों द्वारा शुरु किए गए कामों का एजेंडा सीमित होता है इसलिए बैठक में भाग लेने की कोई रुचि कई लोगों में नहीं होती है। कई बार एक दिन की मजदूरी से हाथ धोने का डर होता है। ग्राम सभा में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इसके पास समय होना चाहिए और साथ ही मुद्दों को व्यापक रुप में लिया जाना चाहिए। ये मुद्दे अधिकांश लोगों के हित से संबंधित होने चाहिए। जैसे कि- प्राथमिक विद्यालय, मध्याह्न भोजन, पेयजल प्रणाली, सीवर प्रणाली, प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, आंगनवाडी और टीकाकरण सहित बाल एवं मातृत्व देखभाल कार्यक्रम। इनमें से अधिकतर समस्याओं का सामना महिलाएं करती हैं न कि पुरुष। इसलिए इन विषयों पर चर्चा तभी की जा सकती है जब महिलाओं की पर्याप्त भागीदारी हो।

अन्य समस्याएं जो महिलाओं को प्रभावित करती हैं वे हैं- घर के प्रबंधन के लिए नकद आय और खाद्य सुरक्षा, जन वितरण प्रणाली खाद्य सुरक्षा का एक भाग है। खाद्य सामग्री का एक अन्य भाग है नकद सुरक्षा, कृषि, बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन, हथकरघा आदि जैसी आर्थिक गतिविधियां। इसी से संबंधित अन्य गतिविधियों में सिंचाई, भूमि प्रबंधन, और मृदा संरक्षण शामिल है। ग्राम सभा द्वारा ऐसे कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी तभी संभव है जब ग्राम सभा की बैठकों में महिलाओं की भागीदारी पर्याप्त मात्रा में हो क्योंकि वे इन गतिविधियों की साक्षी होती हैं और पुरुषों की तुलना में खाद्य सुरक्षा का प्रबंधन उन्हें अधिकतर करना होता है। देश के अनेक भागों में महिलाओं की भागीदारी को हमेशा सुनिश्चित करना संभव नहीं होता क्योंकि वहां महिलाएं पुरुष के सामने कुछ नहीं बोलतीं। कई बार पुरुष चाहते हैं कि महिलाएं केवल घर का ही काम करें और बैठकों का हिस्सा न बनें क्योंकि उनके हिसाब से यह समय की बर्बादी है। इस दुश्चक्र के परिणामस्वरुप ग्राम सभा की बैठकों में महिलाओं की भागीदारी नगण्य हो जाती हैं, ग्राम सभा ऐसे मुद्दों को नहीं उठाती जो अधिकांश लोगों को प्रभावित करते हैं और महिलाओं की भागीदारी और भी कम होती चली जाती है। इस समस्या के निवारण के लिए पंचायती राज मंत्रालय राज्यों के साथ विशेष ग्राम सभा की बैठकों की बात उठा रही है जिसमें विषयों की व्यापकता हो।

अगस्त 2011 और फिर अगस्त 2012 में पोषण पर चर्चा के लिए विशेष ग्राम सभा बैठकों का आयोजन किया गया था। इन बैठकों में महिला और बाल देखभाल, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, जन वितरण प्रणाली, शिक्षा, मध्याह्न भोजन, कृषि, बागवानी, डेयरी, मत्स्यपालन आदि से संबंधित कार्यक्रम प्रमुखों ने हिस्सेदारी की। इन बैठकों में महिलाओं की अधिक भागीदारी रही और अधिकांश लोगों को, खासतौर पर महिलाओं को लाभ हुआ।

अक्तूबर 2012 के दौरान महिलाओं से संबंधित विशेष ग्राम सभा बैठक का आयोजन किया गया। इसमें आंगनवाडी केन्द्रों, स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल, महिलाओं और बच्चों के प्रति हिंसा पर रोक, दहेज और महिला भ्रूण हत्या पर रोकथाम जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। महिलाओं की उपस्थिति और भागीदारी को बढ़ाने के लिए राज्यों को ग्राम सभा में महिलाओं के लिए विशेष गणपूर्ति की व्यवस्था की सलाह दी गई है।

हालांकि इन प्रयासों के बावजूद यह आवश्यक है कि विभिन्न कारणों से महिला ग्राम सभा की बैठकें होना आवश्यक है। पहला, एक महिला ग्राम सभा की बैठक में महिलाओँ की उपस्थिति और भागीदारी ग्राम सभा की बैठक की तुलना में अधिक होती है। दूसरा, महिला ग्राम सभा की बैठकों में दहेज, घरेलू हिंसा, उत्पीड़न, सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा, महिला भ्रूण हत्या और महिला तथा बच्चों के व्यापार जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाया जाता है। महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्य महिला ग्राम सभा की बैठकों को ग्राम सभा की बैठकें करते आए हैं। हाल ही में राजस्थान, ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों ने महिला ग्राम सभाओं की बैठकों के आयोजन के लिए अधिसूचना जारी की है। हमारा अनुभव दर्शाता है कि ग्राम सभा की बैठकें अथवा महिला सभा की बैठकों में महिलों की अधिक भागीदारी से सिंचाई और जलाशयों के निर्माण जैसी एमजीनरेगा जैसी गतिविधियों में तेजी आती है और कृषि, बागवानी तथा चारा तथा पेयजल आपूर्ति में सुधार जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलता है।

पंचायती राज मंत्रालय ने राज्यों को विशेष ग्राम सभा और महिला सभा की बैठकों पर चर्चा की सलाह दी है ताकि कन्या भ्रूण हत्या जैसे महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा सके। विषम बाल लिंग अनुपात और कन्या भ्रूण हत्या जैसे मुद्दों पर चर्चा का भी परामर्श दिया गया। जिन क्षेत्रों में महिला सभाओं का गठन नहीं हुआ है उन्हें इसका गठन करना चाहिए और बाल लिंग अनुपात के मुद्दे को उठाना चाहिए। आंगनवाडी की निगरानी समिति को पंचायत/वार्ड सदस्य के अधीन करने और ग्राम स्वास्थ्य स्वच्छता और पोषण समिति को ग्राम पंचायत की उप-समति बनाने से पंचायतों के पास गर्भवती महिलाओं, बालक-बालिकाओं के जन्म और शिशु मृत्यु दर के पंजीकरण की सूचना होगी। इससे पंचायत जन्म के समय लिंगानुपात पर नजर रख सकेगी। मैंने ग्राम सभाओं, महिला सभाओं और पंचायत के चयनित प्रतिनिधियों की कार्यशालाओं की कई बैठकों में हिस्सा लिया है और देखा है कि महिलाएं किस प्रकार कन्या भ्रूण हत्या का मुद्दा उठाती है, इस मानसिकता के पीछे के असली कारणों की पहचान करती हैं (महिलाओं के प्रति अपराध एक प्रमुख मुद्दा है) और वे किस प्रकार इसका सामना करती हैं।

तदनुसार विभिन्‍न राज्‍यों में लैंगिक मुद्दों पर विशेष ग्राम सभाएं आयोजित हुईं। हरियाणा में 1 सितंबर, 2012 को जुलाना ब्‍लॉक में आयोजित एक कार्यक्रम में 1500 महिलाओं ने भाग लिया। सात ग्राम पंचायतों से लोगों ने इस कार्यक्रम का प्रतिनिधित्‍व किया। उन्‍होंने इस अवसर पर शपथ ली कि वे कन्‍या भ्रूण हत्‍या जैसे सामाजिक कृत्‍य को खत्‍म करने में अपने पूरा सहयोग देंगे। इन सात गांवों की महिलाओं ने सार्वजनिक व्‍यवस्‍था में महिलाओं की संख्‍या कम होने और बुजुर्गों के कल्‍याण के संबंध में मुख्‍य रूप से चर्चा की।

30 अक्‍टूबर, 2012 को दक्षिण अंडमान के नमुनाघर में लैंगिक मुद्दों पर विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई। इसमें 30 महिलाओं और युवतियों ने भाग लिया। अन्‍य मुद्दों के साथ महिलाओं और बच्‍चों के प्रति हिंसा की रोकथाम, दहेज प्रथा और कन्‍या भ्रूण हत्‍या की रोकथाम पर भी चर्चा हुई। इस बैठक में लोगों ने महिलाओं से संबंधित मुद्दों पर प्रभावी तरीके  से चर्चा के लिए महिला सभा आयोजित करने का फैसला भी किया।

5 मार्च, 2012 को केरल के अल्‍लपुझा जिले में मरारिकुला दक्षिण ग्राम पंचायत में महिलाओं पर हिंसा के बारे में पता लगाना के संबंध में एक बैठक हुई। लगभग 2000 लोगों, जिसमें अधिकतर महिलाएं थी ने भाग लिया। बैठक के दौरान महिलाओं पर अपराध के संबंध में मरारिकुला दक्षिण ग्राम पंचायत की सिफारिशों पर चर्चा हुई। इस ग्राम पंचायत विशेषकर सार्वजनिक जगहों और शैक्षिक संस्‍थानों में महिलाओं पर हुए अपराध का पता लगाया। ग्राम सभा ने इस संबंध में कुछ हल भी निकाले पुरूषों को लाभप्रद गतिविधियों में व्‍यस्‍त रखना, महिलाओं के लिए ऐसी गतिविधियां सुनिश्चित करना जिससे वे पैसा कमा सकें, हेल्‍पलाइन शुरू करना, स्‍कूलों में परामर्श की व्‍यवस्‍था शुरू करना ताकि बच्‍चों में विश्‍वास पैदा हो सके और वे हिंसा के खिलाफ आवाज़ उठा सकें। केरल सरकार ने इस अवधारणा को अपनाया है और निर्भय कार्यक्रम के तहत राज्‍य में इसे शुरू करने की प्रक्रिया में है।

पंचायत में महिलाओं के लिए आरक्षण से 1993 के बाद पंचायतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्‍व बढ़ा है।  इससे स्‍थानीय स्‍तर पर महिलाओं का राजनैतिक नेतृत्‍व बढ़ा है।  ग्राम सभा के महिलाओं से संबंधित मुद्दों को उठाने के प्रयासों और महिला सभाओं के बनने से महिलाएं अधिक सशक्‍त हो रही हैं। देश के कुछ भागों में महिला ग्राम सभा की बैठकों में महिलाओं का जोश जो पहले न  के बराबर था, अब देखते बनता है।   (पसूका फीचर)
*डॉ. हृषिकेश पांडा: अपर सचिव, पंचायती राज मंत्रालय

मीणा/विजयलक्ष्मी/प्रियंका-16

Friday, January 18, 2013

महिला रत्नों का सम्मान

भारत को ब्रह्माण्ड़ गुरु की गरिमा वापस दिलाने का प्रयास 
दामिनी की जान हम नहीं बचा पाए उसके बाद इस तरह की घटनायों की मुक्कमल रोकथाम भी नहीं कर पाए लेकिन इस के बावजूद महिला सम्मान को लेकर एक आन्दोलन अवश्य खड़ा हुआ जो लगातार मजबूत हो रहा है। जहाँ एक और महिलायों और उनकी पौशाक को लेकर बहुत ज़िम्मेदार समझे जाने वाले लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं वहीँ इस नाज़ुक समय में महिलायों के समान को लेकर एक विशेष आयोजन भी हो रहा है। महिला रत्नों के सम्मान में आप अपने क्षेत्र की महिलायों के नामांकन भी भेज सकते हैं साथ ही आलेख, सुझाव, सहयोग और विज्ञापन भी। इस विशेष आयोजन में कर्मठ, सत्यानिष्ठ,  कर्तव्यनिष्ठ,  संघर्षशील, प्रतिभाशाली, समाजसेवी, राष्ट्रहित  में कार्य करने वाली सभी कार्यक्षेत्रों की महिलाओ सम्मान किया जायेगा। आयोजकों का कहना है कि विश्व सभ्यता की रक्षा, सुरक्षा एवं वसुधैव कुटुम्बकम् की संस्कृति के विकास व विस्तार हेतु संकल्प के साथ इस महाभियान मे सहयोग करों सफलता आपके कदम चूमेंगी। आपका छोटा सा प्रयास भारत को विश्वगुरु ही नही वरन्
ब्रह्माण्ड़ गुरु की प्राचीन गरिमा वापस दिलाएगा। सम्पर्क   : भावना त्यागी भारतीय (011 22528272, 9013666652) और भू त्यागी भारतीय (विश्व चिंतक) (09999466822, 9013666651) आप अपने सुझाव यहाँ भी भेज सकते हैं जिन्हें आयोजकों तक पहुंचा दिया जायेगा।-- रेक्टर कथूरिया 

नामांकन आमन्त्रण महिला और मीडिया 2013 FFF.pdf
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Saturday, January 5, 2013

महिलाओं और कमज़ोर वर्गों पर अपराध

04-जनवरी-2013 15:26 IST
कानूनों की उपयुक्‍तता का दोबारा मूल्‍यांकन करने की ज़रूरत:गृह मंत्री
केंद्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा है कि दिल्‍ली में हाल में हुई घटना और समाज में महिलाओं तथा कमज़ोर वर्गों के प्रति रोष को हमारे लोकतंत्र में स्‍वीकार नहीं किया जाएगा। श्री शिंदे आज नई दिल्‍ली में महिलाओं पर अपराधों तथा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के प्रति अत्‍याचारों पर मुख्‍य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के सम्‍मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा कि इसे सख्‍त कदमों से रोके जाने की ज़रूरत है। उन्‍होंने कहा कि समूची व्‍यवस्‍था, हमारे हितधारकों की भूमिका, हमारे कानूनों की उपयुक्‍तता का दोबारा मूल्‍यांकन करने की ज़रूरत है। उन्‍होंने कहा कि स्‍कूल के स्‍तर से ही तथा हमारे समाज के हाशिए पर आए सभी लोगों के बीच जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की ज़रूरत है। श्री शिंदे ने कहा कि सभी नागरिकों की सुरक्षा और रक्षा सरकार की जिम्‍मेदारी है। 

श्री शिंदे ने कहा कि सरकार तथा आपराधिक न्‍याय प्रणाली सहित कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका के समक्ष महत्‍वपूर्ण चुनौती है। उन्‍होने कहा कि इस युग और समय में ज्ञान और समानता हमारे प्रशासन के मूल सिद्धांत हैं तथा ये हमारी सरकार और प्रशासन के लिए मापदंड का पैमाना होना चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि स्‍वतंत्रता के 60 वर्ष के बाद तथा विभिन्‍न कानून लागू करने के बाद भी महिलाओं और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अपराधों में कमी नहीं आई है। उन्‍होंने कहा कि यह साफ है कि कानून हल का एक भाग है लेकिन बड़ी समस्‍या इसके कार्यान्‍वयन में आती है जहां कई बार ज़मीनी वास्‍तविकताएं इन कानूनों को प्रभावी तरीके से लागू करने में बाधा बन जाती हैं। हमारा मुख्‍य उद्देश्‍य ऐसी बाधाओं की पहचान करना, हमारे कानूनों तथा जांच की कार्य प्रणालियों और पद्धतियों में आवयक बदलावों के लिए सुझाव देना है ताकि सुनवाई जल्‍दी पूरी हो सके और अपराधी को समयबद्ध ढंग से सज़ा मिल सके। 

केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने इस अवसर पर कहा कि राज्‍य सरकार के साथ विचार विमर्श की प्रक्रिया जल्‍दी से जल्‍दी पूरी हो जानी चाहिए। उन्‍होंने कहा कि उनके मंत्रालय ने इस संदर्भ में 28 दिसंबर, 2012 को सभी संबंधित व्‍यक्तियों के साथ भी विचार-विमर्श किया और प्रासंगिक कानूनों में शीघ्र बदलावों के लिए अपने सुझाव गृह मंत्रालय और न्‍यायमूर्ति वर्मा समिति को भेज दिए हैं। 

केंद्रीय सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्री कुमारी सैलजा ने कहा कि उनके मंत्रालय में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के कल्‍याण और उनके प्रति अत्‍याचारों पर नज़र रखने के लिए प्रतिबद्ध व्‍यवस्‍था ने 20 बार बैठकें की हैं तथा गृह मंत्रालय से उनके लिए कल्‍याण योजनाएं लाने का आग्रह कर रही है। 

इस अवसर गृह राज्‍य मंत्री आर.पी.एन. सिंह, गृह राज्‍य मंत्री एम. रामाचंद्रन और गृह मंत्रालय, महिला और बाल कल्‍याण मंत्रालय तथा सामाजिक न्‍याय और अधिकारिता मंत्रालय के अन्‍य वरिष्‍ठ अधिकारी मौजूद थे। (PIB)

वि.कासोटिया /प्रियंका-53

Saturday, December 15, 2012

बाल विकास योजनाएं

33 सामुदायिक विकास ब्‍लाकों तथा 4891 सामुदायिक केन्‍द्रों में विस्‍तार
महिला और बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्‍णा तीरथ ने आज लोक सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि समेकित बाल विकास सेवा स्‍कीम (आईसीडीएस) 6 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों तथा गर्भवती और धात्री माताओं के स्‍वास्‍थ्‍य पोषण और विकास की आवश्‍यकताओं को पूरा करने के लिए सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है। स्‍कीम के अन्‍य उद्देश्‍य बाल विकास को प्रोन्‍नत करने के लिए उनकी मृत्‍यु दर, रूग्‍णता, कुपोषण और स्‍कूल छोड़ दिए जाने की घटनाओं में कमी तथा विभिन्‍न्‍ विभागों के बीच नीतियों का प्रभावी समन्‍वयन और क्रियान्‍वयन है। 

बच्‍चों की मृत्‍यु दर में कमी लाने के लिए आईसीडीएस के अतिरिक्‍त सरकार द्वारा स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय के राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के प्रजनन एवं बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम के तहत विभिन्‍न उपाय क्रियान्वित किए जा रहे हैं। इसमें समेकित नवजात तथा बाल्‍यावस्‍था रूग्‍णता प्रबंधन विशेष नवजात देखरेख यूनिट और पोषण पुनर्वास केन्‍द्रों सहित जननी शिशु सुरक्षा योजना, नवजात शिशु सुरक्षा कार्यक्रम शामिल है। 

अपने परिचालन के 35 वर्षों में, आईसीडीएस जिसका 1975 में चयनित 33 सामुदायिक विकास ब्‍लाकों तथा 4891 सामुदायिक केन्‍द्रों में विस्‍तार किया गया था, 2008-09 में अनुमोदित किए गए सर्वसुलभीकरण के अंतिम चरण के साथ पूरे देश में 7076 अनुमोदित परिययोजनाओं तथा 14 लाख आंगनवाड़ी केन्‍द्रों के माध्‍यम से सर्वसुलभीकरण हो गया है। तथापि, इसका अधिकांश विस्‍तार (50 प्रतिशत से भी अधिक) 2005 के बाद ही हुआ है। अपनी निर्दिष्‍ट सीमाओं में, कुपोषण की व्‍यप्‍तता जो 1998-99 (एनएफएचएस-2) में 42.7 प्रतिशत थी वर्ष 2005-06 (एनएफएचएस-3) में घटकर 40.4 प्रतिशत हो गई। राष्‍ट्रीय परिवार स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-3) सहित अनेक अध्‍ययनों से यह स्‍पष्‍ट होता है कि इस कार्यक्रम ने बाल-कुपोषण में कमी, देखरेख की पद्धतियों में आईएमआर और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों की मृत्‍यु दर में कमी, सुधार तथा गुणवत्‍ता पूर्ण स्‍कूल-पूर्व शिक्षा सहित उन्‍नत प्रारंभिक बाल्‍यावस्‍था विकास परिणामों जैसे कुछेक प्रमुख कार्यक्रम के उद्देश्‍यों को प्राप्‍त करने की दिशा में सकारात्‍मक योगदान दिया है। 
(PIB)   14-दिसंबर-2012 15:39 IST

मीणा/बिष्‍ट/चन्‍द्रकला-6107

सबला योजना

पूरे देश में राजीव गांधी किशोरी सशक्‍तीकरण स्‍कीम-सबला 
महिला और बाल विकास राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्रीम‍ती कृष्‍णा तीरथ ने आज लोक सभा में सबला योजना के बारे में पूछे गए एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि आंध्र प्रदेश और महाराष्‍ट्र सहित पूरे देश में राजीव गांधी किशोरी सशक्‍तीकरण स्‍कीम-सबला के कार्य निष्‍पादन का मानीटरन राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा प्रस्‍तुत आवधिक वास्‍तविक और वित्‍तीय प्रगति रिपोर्टों (तिमाही और वार्षिक) के माध्‍यम से की भी जाती है। राष्‍ट्रीय, राज्‍य और सामुदायिक स्‍तर पर समेकित बाल विकास सेवा स्‍कीम के अंतर्गत स्‍थापित मानीटरन और पर्यवेक्षण तंत्र का उपयोग सबला स्‍कीम के मानीटरन के लिए भी किया जाता है। इस स्‍कीम के अंतर्गत सरकार द्वारा प्रगति की समीक्षा भी राज्‍य सरकारों/संघ राज्‍य प्रशासनों के साथ समीक्षा बैठकों तथा क्षेत्रीय दौरों में की जाती है। इसके अतिरिक्‍त स्‍कीम के अंतर्गत प्रगति की समीक्षा, मानीटरन करने, क्रियान्‍वयन में आने वाली बाधाओं की समीक्षा करने और उनका समाधान करने हेतु उपयुक्‍त तंत्र इजात करने के लिए राष्‍ट्र, राज्‍य, ब्‍लॉक और ग्राम स्‍तर पर सबला हेतु मानीटरन और पर्यवेक्षण समितियां गठित की गई हैं। वर्तमान में सबला का क्रियान्‍वयन प्रायोगिक आधार पर देश के 205 जिलों में किया जा रहा है। सरकार ने एडमिनिस्‍ट्रेटिव स्‍टॉफ कॉलेज ऑफ इण्डिया, हैदराबाद, आंध्र प्रदेश के द्वारा 11वीं योजना (2010-11 और 2011-12) के कार्य निष्‍पादन के बारे में सबला का स्‍वतंत्र रूप से मूल्‍यांकन करने के आदेश दिए हैं। स्‍कीम का आगे का विस्‍तार और प्रसार मूल्‍यांकन के निष्‍कर्षों पर निर्भर करेगा। 

उन्‍होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार द्वारा स्‍कीम के कारगर क्रियान्‍वयन हेतु निम्‍नलिखित कदम उठाए गए हैं:- राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों को समय पर निधियां निर्मुक्‍त करना, स्‍कीम के अंतर्गत खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के माध्‍यम से गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों की दर से खाद्यान्‍न का आबंटन, सबला के अंतर्गत गैर-पोषण घटक के क्रियान्‍वयन हेतु स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, युवा कार्य, श्रम और रोजगार तथा पंचायती राज संस्‍थाओं की विभिन्‍न स्‍कीमों/कार्यक्रमों के साथ सेवाओं का कारगर संकेन्‍द्रण सुनिश्चित करना, राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों द्वारा प्रस्‍तुत आवधिक वास्‍तविक और वित्‍तीय प्रगति रिपोर्टों के माध्‍यम से स्‍कीम के क्रियान्‍वयन का मानीटरन, राज्‍यों/संघ राज्‍य क्षेत्रों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित करना सबला के लिए गठित राष्‍ट्रीय मानीटरन और पर्यवेक्षण समिति की बैठकें करना एवं स्‍कीम के मानदंडों के अनुसार इसके क्रियान्‍वयन की समीक्षा करने हेतु क्षेत्रीय दौरे करना। (PIB) 
14-दिसंबर-2012 17:58 IST

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वि.कासोटिया/इंद्रपाल/रामकिशन-6112

Wednesday, December 12, 2012

महिलाओं की समस्या का समाधान करने के लिए हेल्पलाइन

40 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसाओं की शिकार
Photo Courtesy Indore Police
महिला और बाल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-।।। (2005-06) के आंकड़ों के अनुसार 15-49 आयु वर्ग की 35.4 प्रतिशत कुल विवाहित महिलाओं में लगभग 40 प्रतिशत महिलाएं शारीरिक अथवा यौन हिंसाओं की शिकार हुई हैं। 6.7 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा के दोनों रूपों शारीरिक एवं यौन हिंसा का शिकार हुई हैं। इसके अलावा, आंकड़ों से यह पता चलता है कि घरेलू हिंसा के दोनों रूपों शारीरिक एवं यौन हिंसा की घटनाएं शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक हैं।
12वीं पंचवर्षीय योजना हेतु महिला एजेंसी एवं सशक्तीकरण पर योजना आयोग द्वारा गठित कार्यदल तथा 12वीं पंचवर्षीय योजना हेतु महिला एजेंसी एवं बाल अधिकार पर संचालन समिति ने महिला हैल्पलाइऩ की स्थापना की अनुशंसा की है। तथापि, सरकार ने सरकार के अंदर निहित मूल्यांकन तंत्र द्वारा मूल्यांकन सहित इस नई स्कीम को शुरू करने का निर्णय नहीं लिया है।
(PIB)  12-दिसंबर-2012 15:11 IST
मीणा/बिष्ट/शदीद-5982

राज्‍य सभा में प्रश्‍न/उत्‍तर

12-दिसंबर-2012 18:21 IST
विधवाओं की पेंशन में आयु सीमा और राशि बढ़ाई गई 
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री श्री लालचंद कटारिया ने आज राज्‍य सभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि केन्‍द्र ने यह सूचित किया है कि इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय विधवा पेंशन योजना (आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस) में इस वर्ष पहली अक्‍तूबर से सहायता राशि को 200 रू. से बढ़ाकर 300 रू. प्रतिमाह कर दिया गया है। उक्‍त योजना में अधिकतम आयु को भी 59 वर्ष से बढ़ाकर 79 वर्ष कर दिया गया है। अत: उक्‍त योजना 40-79 वर्ष के आयु समूह में विधवाओं के लिए मान्‍य है और भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों से संबंधित है। उन्‍होंने यह भी बताया कि पेंशन योजनाओं के तहत केन्‍द्रीय सहायता की राशि में संसाधनों की उपलब्‍धता के आधार पर समय-समय पर संशोधन किया जाता है। उन्‍होंने यह भी बताया कि राज्‍यों से यह सिफारिश की गई है कि वे अपने संसाधनों से कम-से-कम समान राशि का योगदान करें। (PIB)
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Friday, September 7, 2012

कन्याओं का पालन-पोषण

6593 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु परिवारों को दिया गया 
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा तीरथ ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि भारत सरकार द्वारा अधिसूचित बच्चों के दत्तक ग्रहण हेतु अधिशासी दिशानिर्देश, 2011 के अंतर्गत निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2000 की धारा 41 के तहत गैर-रिश्तेदारी व्यक्तियों द्वारा बच्चों को गोद लिया जा सकता है। इन दिशानिर्देशों के प्रावधानों के अनुसार विशेषज्ञों द्वारा कराए गए गृह अध्ययन के आधार पर संभावित माता-पिता के रूप में दत्तक ग्रहण एजेंसियों में पंजीकृत व्यक्तियों के बच्चों की देखरेख करने हेतु उपयुक्त पाए जाने पर ही वे बच्चों को गोद ले सकते हैं। जनवरी, 2011 से मार्च़ 2012 तक 6593 बच्चों को दत्तक ग्रहण हेतु परिवारों को दिया गया है।
मंत्री महोदया ने कहा कि दत्तक ग्रहण करने वाले माता-पिता को सहायता करने के लिए दत्तक ग्रहण एजेंसी की बाल देखरेख निधि के लिए माता-पिता द्वारा अपेक्षित अंशदान में विशिष्ट परिस्थितियों के मद्देनजर छूट देने की उपर्युक्त दिशानिर्देशों में अनुमति दी गई है। इसके अलावा, समेकित बालक संरक्षण स्कीम जिसके अंतर्गत राज्य सरकारों/संघ राज्य प्रशासनों को मंत्रालय द्वारा अन्य बातों के साथ-साथ दत्तक ग्रहण एजेंसियों के प्रबंधन और उनके साथ रखे गए बच्चों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए निधियां प्रदान की जाती है। यदि गोद लेनेवाले भारतीय माता-पिता भुगतान करने में असमर्थ होते हैं तो कानूनी खर्च के भुगतान हेतु भी अनुदान दिए जाते हैं।(PIB) 
  06-सितम्बर-2012 15:51 IST

विधवाओं के लिए योजनाएं

गरीब परिवारों की 40-59 वर्ष की आयु की विधवाओं को पेंशन
                                                                                                                                                                                     साभार चित्र 
ग्रामीण विकास राज्‍य मंत्री श्री प्रदीप जैन 'आदित्‍य' ने आज लोकसभा में एक प्रश्‍न के लिखित उत्‍तर में बताया कि इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय विधवा पेंशन योजना (आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस) का कार्यान्‍वयन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किया जाता है ताकि गरीबी की रेखा से नीचे जीवन बसर करने वाले परिवारों की 40-59 वर्ष की आयु की विधवाओं को पेंशन दी जा सके। मंत्रालय राज्‍य सरकारों के जरिए मजदूरी रोजगार के लिए महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) तथा देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली विधवाओं सहित निर्धन परिवारों के स्‍व-रोजगार के लिए स्‍वर्णजयंती ग्राम स्‍वरोजगार योजना (एसजीएसवाई)/ राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम)/ आजीविका नामक प्रमुख योजनाओं को भी क्रियान्वित करता है। चालू वित्‍त वर्ष (अर्थात 2012-13) के दौरान मनरेगा और एसजीएसवाई/एनआरएलएम के अंतर्गत किया गया बजट प्रावधान क्रमश: 33,000 करोड़ रुपये और 3515 करोड़ रुपये है। वित्‍त मंत्रालय द्वारा राज्‍य सरकारों को आईजीएनडब्‍ल्‍यूपीएस के अंतर्गत अतिरिक्‍त केन्‍द्रीय सहायता (एसीए) के रूप में निधियां रिलीज की जाती हैं। (PIB)  06-सितम्बर-2012 19:10 IST

Thursday, September 6, 2012

मकसद:महिलाओं को सम्‍मान की आजीविका


डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने लॉन्‍च किया पर्यावरण अनुकूल इलेक्‍ट्रिक रिक्‍शा
सामाजिक और आर्थिक हैसियत में गहरे लिंग-भेद को मिटाने की दिशा में पहल करते हुए केन्‍द्रीय नवीन एवं नवीकरण उर्जा मंत्री डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने आर्थिक रूप से पिछड़ी महिलाओं को सशक्‍त करने के लिए आज ‘उम्‍मीद की इलेक्ट्रिक रिक्‍शा’ का वितरण किया। दिल्‍ली के जामिया नगर में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने 33 साल की महिला कोहिनूर को पहली इलेक्ट्रिक रिक्‍शा सौंपी। कोहिनूर दो बच्‍चों की अकेली मां है और साथ में उनकी बूढ़ी मां भी रहती हैं।

इस मौके पर डॉ. फारूख अब्‍दुल्‍ला ने कहा कि वे कोहिनूर को उम्‍मीद की पहली रिक्‍शा सौंपकर काफी खुश हैं। देखने में ये रिक्‍शा काफी सुन्‍दर है, इसे चलाना आसान है और इससे कोई प्रदूषण नहीं होता है। उन्‍होंने कहा कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के बीच इलेक्‍ट्रिक रिक्‍शा एक अच्‍छा विकल्‍प है। साथ ही डॉ. फारूख ने वहाँ मौजूद लोगों से कहा कि घर-घर सोलर वाटर हीटर पहुंचाने में भी उनका मंत्रालय पूरा सहयोग करेगा।

इस पहल में आर्थिक और सामाजिक रूप से दरकिनार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए काम कर रही उम्‍मीद और सेंटर फॉर इक्विटी और एन्‍क्‍लुजन संस्‍था भी भागीदार है। इस पहल का मकसद पर्यावरण अनुकूल इस इलेक्ट्रिक रिक्‍शे से महिलाओं को इज्‍जत की रोटी कमाने का मौका उपलब्‍ध कराना है। उम्‍मीद संस्‍था ने इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षित करने और रिक्‍शे के रख-रखाव का भी वादा किया है। (पीआईबी)
                                              06-सितम्बर-2012 20:44 IST
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