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Friday, December 12, 2025

भारत में महिला-केंद्रित विकास की ओर तेजी से बदलाव हो रहा है

 महिला एवं बाल विकास मंत्रालयAzadi Ka Amrit Mahotsav//12 DEC 2025 at 4:37 PM by PIB Delhi

सरकार द्वारा उठाए गए कदम महिला सशक्तिकरण के प्रति व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं

नई दिल्ली: 12 दिसंबर 2025: (PIB Delhi//महिला स्क्रीन डेस्क)::

केंद्र सरकार देश में महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। सरकार ने महिलाओं के जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए जीवन-चक्र निरंतरता के आधार पर बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है, ताकि उनकी शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण से संबंधित बाधाओं को दूर किया जा सके। परिणामस्वरूप, भारत महिला-प्रधान विकास से महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर तेजी से अग्रसर हो रहा है, जिसका उद्देश्य एक ऐसे नए भारत का निर्माण करना है जहां महिलाएं तीव्र गति से और सतत राष्ट्रीय विकास में अग्रणी भूमिका निभाएं।

फाइल फोटो 
महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में सबसे बड़ा कदम "नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023" (संविधान का एक सौ छठा संशोधन) अधिनियम 2023 के लागू होने से उठाया गया, जिसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं, जिनमें दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी विधानसभा भी शामिल है, में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं।

महिलाओं के रोज़गार को प्रोत्साहित करने के लिए, चार श्रम संहिताएं - मजदूरी संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020 - 21 नवंबर 2025 से लागू की गई हैं, जिनमें 29 पूर्ववर्ती श्रम कानूनों का युक्तिकरण किया गया है। इन सुधारों के अंतर्गत, संहिताएं लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करती हैं, समान वेतन अनिवार्य करती हैं और महिलाओं के लिए अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में हर समय काम करने के द्वार खोलती हैं, जिनमें भूमिगत खनन और भारी मशीनरी से संबंधित कार्य और रात्रि शिफ्ट शामिल हैं। उनकी सहमति और नियोक्ताओं द्वारा पर्याप्त सुरक्षा उपायों के अधीन।

विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन स्तर को सुगम बनाने और उनकी कठिनाइयों को कम करने के उद्देश्य से, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 11.8 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.3 करोड़ से अधिक परिवारों को महिलाओं के नाम पर स्वच्छ गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं और जल जीवन मिशन के तहत 15 करोड़ से अधिक परिवारों को स्वच्छ और पीने योग्य नल के पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का उद्देश्य सभी बेघर परिवारों और कच्चे एवं जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्के मकान उपलब्ध कराकर 'सभी के लिए आवास' प्रदान करना है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहरी क्षेत्रों में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों सहित आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी आवास प्रदान करना है।

सुकन्या समृद्धि योजना जैसी योजनाओं ने लड़कियों के भविष्य में वित्तीय निवेश को प्रोत्साहित किया है। समग्र शिक्षा जैसी योजनाएं, स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था, विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत किफायती और गुणवत्तापूर्ण सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता आदि ने भी व्यवहारिक बदलाव लाने में योगदान दिया है, जिसके परिणामस्वरूप शैक्षणिक संस्थानों में लड़कियों के नामांकन में वृद्धि हुई है।

आयुष्मान भारत योजना के तहत, सरकार 1200 से अधिक चिकित्सा पैकेजों के माध्यम से 55 करोड़ से अधिक नागरिकों को निःशुल्क उपचार प्रदान कर रही है। इनमें से 141 से अधिक चिकित्सा पैकेज विशेष रूप से महिलाओं की चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत सात प्रकार की जांच (टीबी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुख कैंसर, स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर और मोतियाबिंद) उपलब्ध हैं, जिनसे करोड़ों महिलाओं को लाभ हुआ है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 150,000 से अधिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (एबी-एचडब्ल्यूसी), जिन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी कहा जाता है, स्वास्थ्य सेवा को समुदायों के करीब ले जा रहे हैं।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका विशेष ध्यान गरीब और वंचित महिलाओं पर है। देशभर में 16,000 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र (पीएमबीजेके) कार्यरत हैं। पीएमबीजेके किफायती दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के अलावा, जिनमें लगभग 40 महिला-विशिष्ट वस्तुएं शामिल हैं, 'सुविधा सैनिटरी नैपकिन' नामक सैनिटरी नैपकिन की बिक्री भी करते हैं, जिनकी कीमत मात्र 1 रुपये प्रति पैड है। राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के माध्यम से बीमा कवरेज और पेंशन द्वारा सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाती है।

महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण हेतु सरकार ने स्किल इंडिया मिशन की शुरुआत की है। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत देश भर में प्रधानमंत्री कौशल केंद्र स्थापित किए गए हैं। महिलाओं के प्रशिक्षण और शिक्षुता के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचा तैयार करने पर विशेष जोर दिया गया है। इसी प्रकार, ग्रामीण आबादी को डिजिटल साक्षरता प्रदान करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीडीआईएसएचए) चला रही है। इन योजनाओं से महिलाओं और लड़कियों को रोजगार और उद्यमिता के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त करने में भी सहायता मिली है।

केंद्र सरकार की सबसे सफल योजनाओं में से एक दीनदयाल अंत्योदय योजना - राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन है, जिसके तहत लगभग 90 लाख महिला स्वयं सहायता समूह, जिनमें लगभग 10 करोड़ सदस्य हैं, रोजगार/स्वरोजगार के लिए ग्रामीण परिदृश्य को बदल रहे हैं। सरकार ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए नमो द्रोण दीदी, लखपति दीदी, बैंक सखी, बीमा सखी जैसी महिला-विशिष्ट योजनाएं भी लागू की हैं।

मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि), सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी निधि योजना (सीजीएमएसई), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) जैसी योजनाएं रोजगार/स्वरोजगार के अवसर और ऋण सुविधाएं प्रदान करती हैं। इन योजनाओं के लाभार्थियों में अधिकांश महिलाएं हैं।

भारत सरकार ने सार्वजनिक खरीद नीति के माध्यम से सभी केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों/सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3% हिस्सा महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से प्राप्त करें।

भारत सशस्त्र बलों में लड़कियों की भूमिका को बढ़ावा दे रहा है। सरकार ने भारतीय वायु सेना में लड़ाकू पायलट, कमांडो, केंद्रीय पुलिस बल, सैनिक विद्यालयों में प्रवेश, एनडीए में लड़कियों का प्रवेश आदि जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी को सक्षम बनाने के लिए भी प्रावधान किए हैं।

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ईएनएएम) कृषि उत्पादों के लिए एक ऑनलाइन व्यापार मंच है, किसानों के प्रश्नों का उनकी अपनी बोली में फोन पर उत्तर देने के लिए "किसान कॉल सेंटर" योजना है और किसान सुविधा, कृषि बाजार, राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल, उमंग (नए युग के शासन के लिए एकीकृत मोबाइल एप्लिकेशन) जैसे मोबाइल एप्लिकेशन हैं। ये डिजिटल नवाचार महिलाओं को बाजारों तक पहुँचने में आने वाली बाधाओं को दूर करने या उनकी भरपाई करने में मदद कर रहे हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री किसान मान धन योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, परंपरागत कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना आदि जैसी किसान कल्याणकारी योजनाएं महिला किसानों के लिए अनुकूल वातावरण को बढ़ावा दे रही हैं। इन पहलों के माध्यम से सरकार कृषि विस्तार सेवाओं सहित उत्पादक संसाधनों तक महिला किसानों की पहुँच में सुधार कर रही है, जिससे ग्रामीण महिलाओं के जीवन में समग्र सुधार हो रहा है।

महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें से एक है आपराधिक न्याय प्रणाली का आधुनिकीकरण और सुधार। सरकार ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय सुरक्षा अधिनियम (बीएसए) लागू किए हैं, जो 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी हुए हैं। बीएनएस 2023 में, भारतीय दंड संहिता, 1860 में पहले से बिखरे हुए महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को अध्याय-V के अंतर्गत समेकित किया गया है। इसमें महिलाओं और बच्चों से संबंधित कानूनों को मजबूत करने के लिए नए प्रावधान शामिल किए गए हैं, विशेष रूप से, "संगठित अपराध" से संबंधित धारा 111, विवाह, रोजगार, पदोन्नति के झूठे वादे पर या पहचान छिपाकर यौन संबंध बनाने से संबंधित धारा 69, किसी अपराध को अंजाम देने के लिए बच्चे को काम पर रखने, नियोजित करने या संलग्न करने से संबंधित धारा 95 आदि। वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे को खरीदने (धारा 99), सामूहिक बलात्कार (धारा 70) और तस्करी किए गए व्यक्ति के शोषण (धारा 144) से संबंधित अपराधों के संबंध में सजा बढ़ा दी गई है। इसके अलावा, महिलाओं के खिलाफ कुछ गंभीर अपराधों जैसे वेश्यावृत्ति के उद्देश्य से बच्चे की खरीद (बीएनएस की धारा 99), संगठित अपराध (धारा 111), भीख मंगवाने के उद्देश्य से बच्चे का अपहरण या उसे अपंग करना (धारा 139) के संबंध में अनिवार्य न्यूनतम दंड निर्धारित किए गए हैं। साथ ही, बीएनएस 2023 की धारा 75 और 79 उत्पीड़न के खिलाफ अतिरिक्त कानूनी सुरक्षा प्रदान करती हैं, जिनमें अवांछित यौन संबंध बनाने का प्रयास, यौन अनुग्रह की मांग, यौन संबंधी टिप्पणियां और किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से शब्द, हावभाव या कृत्य शामिल हैं। कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का सामना करने वाली महिला इन प्रावधानों के तहत शिकायत दर्ज करा सकती है।

बीएनएसएस पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाता है और कानूनी प्रक्रिया के दौरान पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करता है। यह महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराधों की शिकायतों के त्वरित पंजीकरण को सुगम बनाने और समय पर पुलिस कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए ई-एफआईआर और जीरो एफआईआर प्रावधान लागू करता है। इसके अतिरिक्त, बीएनएसएस की धारा 398 के तहत गवाह संरक्षण योजनाओं की शुरुआत की गई है, जो गवाहों को धमकियों और डरा-धमकाने से बचाने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को स्वीकार करती है। साथ ही, बीएसए की धारा 2(1)(डी) के तहत ईमेल, कंप्यूटर, लैपटॉप या स्मार्टफोन पर मौजूद दस्तावेज़, संदेश और डिजिटल उपकरणों पर संग्रहीत वॉइसमेल संदेशों जैसे इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड को भी कार्यस्थल पर महिलाओं को उत्पीड़न से बचाने के लिए दस्तावेजों की परिभाषा के अंतर्गत शामिल किया गया है।

कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (एसएच अधिनियम) के विभिन्न प्रावधानों को शामिल करते हुए एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म "एसएचई-बॉक्स पोर्टल" शुरू किया है। यह पोर्टल देश भर में गठित आंतरिक समितियों (आईसी) और स्थानीय समितियों (एलसी) से संबंधित सूचनाओं का एक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध केंद्रीकृत भंडार प्रदान करता है, चाहे वे सरकारी हों या निजी क्षेत्र की हों। यह शिकायतों को दर्ज करने और उनकी स्थिति पर नज़र रखने के लिए एक साझा मंच भी प्रदान करता है। पोर्टल में एक ऐसी सुविधा है जिसके तहत केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और निजी क्षेत्र के संबंधित कार्यस्थलों की आईसी/एलसी को पंजीकृत शिकायतें स्वतः ही भेज दी जाएंगी। पोर्टल प्रत्येक कार्यस्थल के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का प्रावधान करता है, जिसे शिकायतों की वास्तविक समय में निगरानी के लिए नियमित रूप से डेटा/सूचना को अद्यतन करना आवश्यक है। यह पोर्टल 22 भाषाओं में उपलब्ध है ताकि दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली कामकाजी महिलाओं को इसका उपयोग करने में सुविधा हो सके।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए "मिशन शक्ति" नामक एक व्यापक योजना लागू की है। इस योजना के अंतर्गत, सरकार ने हिंसा का सामना कर रही या संकट में फंसी महिलाओं को एकीकृत सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए देश भर में वन स्टॉप सेंटर स्थापित किए हैं। इसके अलावा, 24x7 महिला हेल्पलाइन (टेलीफोन शॉर्ट कोड 181) भी उपलब्ध है, जो जरूरतमंद महिलाओं को उचित अधिकारियों से जोड़कर आपातकालीन और गैर-आपातकालीन सहायता प्रदान करने के साथ-साथ विभिन्न सरकारी योजनाओं, नीतियों और कार्यक्रमों से संबंधित जानकारी भी प्रदान करती है, ताकि वे इनका लाभ उठा सकें। योजना का बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) घटक लिंग-भेदभावपूर्ण लिंग-चयन को रोकने और लैंगिक समानता के प्रति जागरूकता पैदा करने तथा बाल विवाह को हतोत्साहित करने पर केंद्रित है। बीबीबीपी ने बालिका के महत्व को लेकर नागरिकों के मन में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। शक्ति सदन का घटक संकट में फंसी, बेसहारा और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों की शिकार महिलाओं, जिनमें मानव तस्करी की शिकार महिलाएं भी शामिल हैं, उन्हें सहायता और समर्थन प्रदान करता है। सखी निवास कार्यक्रम के तहत कामकाजी महिलाओं और रोजगार एवं स्वरोजगार के लिए उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं एवं लड़कियों को सुरक्षित एवं किफायती आवास के साथ शिशु देखभाल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। पालना कार्यक्रम के तहत आंगनवाड़ी-सह-क्रेच में शिशु देखभाल की सुविधा प्रदान की जाती है ताकि कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा सके। राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर पर स्थापित महिला सशक्तिकरण केंद्र ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में महिलाओं से संबंधित सरकारी योजनाओं के बारे में सूचना विषमता की समस्या का समाधान करते हैं। प्रधानमंत्री वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से नकद लाभ प्रदान किया जाता है।

भाषा को सकारात्मक सांस्कृतिक परिवर्तन की एक मूलभूत शक्ति के रूप में मान्यता देते हुए, एक ऐसे वातावरण को विकसित करने का प्रयास करते हुए जहां विविध दृष्टिकोणों को स्वीकार किया जाता है, महत्व दिया जाता है और सशक्त बनाया जाता है, सरकार ने नवंबर 2023 में लिंग-समावेशी संचार पर एक मार्गदर्शिका शुरू की, जिसका उद्देश्य भाषा में मौजूद गहरे पूर्वाग्रहों को दूर करने के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टि और रणनीतियों को बढ़ावा देने और प्रदान करने के लिए स्थापित भाषाई मानदंडों को बदलना है।

ये सभी उपाय मिलकर महिला सशक्तिकरण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण प्रदर्शित करते हैं, जो महिला वैज्ञानिक योजना, विज्ञान ज्योति योजना, विदेश छात्रवृत्ति योजना आदि के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने तक भी विस्तारित है।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

*****//पीके/ केसी/ जेएस//(रिलीज़ आईडी: 2203345) 

Wednesday, November 26, 2025

संकटग्रस्त महिलाओं तक पहुंचने के लिए एक और नया प्रयास

प्रविष्टि तिथि: 26 NOV 2025 at 5:00PM by PIB Delhi//महिला एवं बाल विकास मंत्रालय//Azadi Ka Amrit Mahotsav

एनसीडब्ल्यू ने  नया हेल्पलाइन नंबर 14490 जारी किया

नई दिल्ली: 26 नवंबर 2025: (PIB Delhi//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

सरकार द्वारा बहुत सी कोशिशों और लाख प्रयासों के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही। इसलिए बार बार यही महसूस होता है कि अभी कुछ और कदम उठाए जाने चाहिएं।  इस ज़रूरत को देखते हुए अब एक नया हेल्पलाईन नंबर जारी किया गया है। केवल उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास भी है कि इस नंबर से महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को नकेल डालने में मदद मिलेगी। 


राष्ट्रीय महिला आयोग ने
देश भर में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए त्वरित और अधिक सुलभ सहायता सुनिश्चित करने के लिए एक नई 24×7 संक्षिप्त कोड हेल्पलाइन-14490 शुरू की है। यह टोल-फ्री नंबर एनसीडब्ल्यू की मौजूदा हेल्पलाइन 7827170170 से जुड़ा एक आसानी से याद रखने योग्य संक्षिप्त कोड के रूप में कार्य करता है। इस पर संपर्क कर महिलाएं बिना किसी लागत या देरी के सहायता प्राप्त कर सकती हैं।

नया संक्षिप्त कोड हिंसा, उत्पीड़न या किसी भी प्रकार के संकट का सामना कर रही महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए एनसीडब्ल्यू के चल रहे प्रयासों को मजबूत करता है। प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में हेल्पलाइन मार्गदर्शन प्रदान करेगा। साथ ही संबंधित प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कराएगा और समय पर सहायता प्रदान करना सुनिश्चित करेगा।

एनसीडब्ल्यू लोगों, सामुदायिक समूहों, संस्थानों और भागीदारों को इस जानकारी को व्यापक रूप से साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जागरूक रहें।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय।

****//पीके/केसी/आरकेजे//(रिलीज़ आईडी: 2197970)

Sunday, October 26, 2025

महिला शक्ति:बेलन ब्रिगेड की शराबखोरी के ख़िलाफ़ जंग:अनीता शर्मा की ज़ुबानी

Received on Saturday 25th October 2025 at 14:48 WhatsApp From  Belan Brigade Movements Lovers 

बलकौर सिंह गिल ने चेताया था-वे तुम्हारी हत्या भी करवा सकते हैं 

ज़िंदगी के अलग अलग रंगों को देखते और महसूस करते हुए सुश्री अनीता शर्मा के कुछ पोज़ 
लुधियाना: 26 अक्टूबर 2025: अनीता शर्मा ने जैसे मीडिया लिंक की टीम को बताया 

इस बार की पोस्ट वास्तव में एक गाथा है नशे के खिलाफ लड़ी गई लम्बी जंग की। यह कुछ बरस पहले की बात है जब हर गली मोहल्ले में नशा मौत का नंगा नाच खेल रहा था। अकालीदल की हकूमत थी। नशा बेचने वाले नशा बेचने बहुत बेबाकी से नशा बेचते रहे। नशा लेकर बहुत से युवा लोग मरते रहे।  पुलिस नशे की ओवर डोज़ कह कर मामले ठंडे बस्ते में डालती रही जैसे मरने वाले बेगाने या दुश्मन देश के हों। पुलिस कभी कभार केस भी दर्ज करती। किसी की जेब में से डेढ़ ग्राम नशा मिलता और किसी की जेब में से दो ढाई ग्राम। बस एक और एफ आई आर जमा हो जाती। अख़बारों में छोटी मोटी खबर आ जाती। रायकोट में रहने जानेमाने बुद्धिजीवी बैनर्जी परिवार ने भी नशे के इस दंश को झेला है। उस वक़्त अनीता शर्मा और उनकी टीम ने ही हौंसला दिया था बैनर्जी परिवार को।  उस समय कैलाश सिनेमा के नज़दीक रहने वाले भाटिया परिवार ने भी अपना जवान बेटा खोने की गुहार अनीता शर्मा की टीम को ही सुनाई थी। पुलिस स्टेशन आठ के आमने सर्दियों की देर रात तक लगे धरनों जानीमानी लेखिका डाक्टर गुरचरण कौर कोचर ने भी स्वयं धरने में पहुँच कर अनीता शर्मा की टीम से कहा था कि हम हैं आपके साथ। शोभा वशिष्ट अनु, शीबा सिंह, कार्तिका सिंह स्वयं मैडम बैनर्जी भी इस धरने में शामिल रहे। 

चुनाव शायद उस समय भी नज़दीक ही लगने लगे थे। नशे की आंधी को रोकने के लिए उठा था बेलन ब्रिगेड का तूफान। इसकी संस्थापक रही मैडम अनीता शर्मा जो नवकिरण वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्षा भी हैं। इसी दौर में सुप्रीम कोर्ट के जानमाने वकील और सियासतदान हरविंदर सिंह फूलका, मदन लाल बग्गा, मनप्रीत अयाली और बहुत से दुसरे लोग। कांग्रेस की नीता सतविंदर बिट्टी, जानेमाने उद्योगपति मेवा सिंह कुलार, वाम के सक्रिय नेता रमेश रत्न, उनके बेटे अरुण रत्न भी शामिल रहे। बहुत से इलाकों से सबंधित बहुत से नाम सब याद भी नहीं आ रहे। कई पत्रकार भी सक्रिय रहे आखिर मामला समाज को बचाने का था। 

अतीत के उस संघर्षमय और सुनहरी दौर पर अब मैडम अनीता शर्मा एक पुस्तक  ही लिख रही हैं।  जल्द ही वह किताब आपके सामने होगी। 

उस अतीत की बात करते हुए अनीता शर्मा कहती हैं कि उस समय तो हमने नशा सौदागरों के कहर को रोक लिया था लेकिन सियासतदानों पर भरोसा हमें महंगा पड़ा। बस थोड़ी देर ही हमें लगा कि हालात सुधर जाएंगे लेकिन हालात फिर बिगड़ते चले गए। याद आते हैं वृद्ध बुद्धजीवी बलकौर सिंह गिल जिन्होंने एक बज़ुर्ग की तरह अनीता शर्मा के सिर पर हाथ रख कर चेताया था कि बेटा नशे के कारोबार का मुकाबिला आसान नहीं है। फ़िल्मी कहानियां झूठी नहीं होती। काल्पनिक भी नहीं होती। उन कहानियों में सच होता है बस नाम और स्थान बदल जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा था बेटा वे लोग तुम पर गोली चलवा सकते हैं, एक्सीडेंट करवा सकते हैं और घर परिवार पर हमला करके गुंडागर्दी भी दिखा सकते हैं।

कुछ दिन बाद ही धमकियां भी मिलने लगीं। घर के आसपास संदिग्ध लोग भी घूमने लगे। घर में स्कूल जाने वाली दो बच्चियां और सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं। यह एक अग्नि परीक्षा थी। इसके बावजूद अनीता शर्मा ने कहा हार नहीं मानूंगी। मैं बलिदान को तैयार हूँ। हम चिंतित होते तो वह और भी उत्साह में आ कर अटल बिहारी वाजपेई जी की पंक्तियां गुनगुनाते... 

हार नहीं मानूंगा,
रार नहीं ठानूंगा,
काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ।
गीत नया गाता हूं।
श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी की इन पंक्तियों को याद दिलाते दिलाते अनीता शर्मा गीता उपदेश पर आ जाते। नुस्क्रा कर पूछते कुरुक्षेत्र की रणभूमि भूल गए क्या। बस अब कुरुक्षेत्र की रणभूमि पूरी दुनिया में फ़ैल गई है। आज भगवान कृष्ण भी नज़र नहीं आते। आज अर्जुन भी नज़र नहीं आता लेकिन यह जंग तो लड़नी ही होगी। सवाल तो मौजूद हैं कि कहां हैं आज के भीष्म पितामह? कहां हैं आज के गुरु द्रोणाचार्य? कहाँ हैं आज के विदुर? कहां हैं आज के युधिष्टर? कुरुक्षेत्र आज भी है! धर्मयुद्ध आज भी लड़ा जा रहा है।

आज पंजाब ही नहीं, पूरे देश में शराबखोरी और नशे की लत परिवारों की जड़ों को कमजोर कर रही है। परिवारों की जड़ों का कमज़ोर होना मतलब पूरे देश और समाज का कमज़ोर होना। 

जब कोई पुरुष शराब में डूब जाता है, तो उसके पीछे एक महिला होती है ---जो अपने घर को संभालती है, बच्चों के भविष्य को बचाती है, और खुद दर्द सहते हुए भी मजबूती से खड़ी रहती है।

लेकिन अब महिलाएं चुप नहीं हैं --बेलन ब्रिगेड महिलाओं की उस हिम्मत, साहस और जागरूकता का प्रतीक बन चुकी है।

शराब की लत का महिलाओं और परिवारों पर असर गंभीर असर होता है। 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के अनुसार, पंजाब में लगभग 29% पुरुष नियमित रूप से शराब का सेवन करते हैं, जिनमें से 7% पुरुष अत्यधिक शराब पीते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां पुरुष शराबी होते हैं, वहां घरेलू हिंसा के मामले 65% तक बढ़ जाते हैं।

पंजाब में स्थिति चिंताजनक है:

हर तीसरी महिला शराब या नशे से जुड़ी घरेलू हिंसा का शिकार होती है।

परिवार की 20–25% आय शराब पर खर्च हो जाती है।

ग्रामीण महिलाएं दोहरी मेहनत करती हैं --- खेतों में काम और घर दोनों संभालती हैं।

हालात पहले भी बिगड़ गए थे। तभी हुई बेलन ब्रिगेड की शुरुआत:

बेलन ब्रिगेड की शुरुआत उस पल हुई, जब महिलाओं ने कहा ---“अब बहुत हो गया।”

जो बेलन कभी रसोई का प्रतीक था, वह अब महिलाओं की शक्ति, आत्म-सम्मान और सुरक्षा का प्रतीक बन गया है।

नवकिरण वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन के सहयोग से, हजारों महिलाएं इस आंदोलन से जुड़ चुकी हैं ----गृहिणियां, शिक्षिकाएं, सामाजिक कार्यकर्ता और युवतियां।

हमारा उद्देश्य:

पुरुषों को नशे से मुक्त कराना, महिलाओं को सुरक्षा व आत्मनिर्भरता देना, और समाज में नशामुक्त वातावरण बनाना।

जब पुरुष गिरता है, तब महिला उठती है

जब पुरुष शराब या नशे में गिरता है, तब महिला घर की रीढ़ बनती है।

वह बच्चों की शिक्षा जारी रखती है।

वह घर की आर्थिक जिम्मेदारी उठाती है।

कई बार छोटे व्यवसाय शुरू कर परिवार को संभालती है।

और सबसे बढ़कर, वह हिम्मत नहीं हारती।

बेलन ब्रिगेड ऐसी ही हर महिला की शक्ति को सलाम करती है---जो दर्द को ताकत में बदल देती है।

हमारा काम और अभियान

1. जागरूकता अभियान --गांवों, स्कूलों और शहरों में शराब व नशे के खिलाफ़ रैलियाँ और संवाद।

2. पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) सहयोग -- शराबी पुरुषों को नशामुक्ति केंद्रों से जोड़ना।

3. कानूनी व मानसिक सहायता --महिलाओं को शिकायत, हेल्पलाइन और आत्मविश्वास के साधन देना।

4. आर्थिक सशक्तिकरण --महिलाओं को सिलाई, कला और उद्यम प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना।

गौरतलब है कि कई बरस पहले भी महिलाओं को इलेक्ट्रिक ऑटो रिक्शा महिलाओं को दिलवाये थे तांकि वे पैसरों पर खड़ी हो सकें। इंक नतीजा भीअच्छा निकला। बहुत से घर आर्थिक तौर पर सशक्त हो गए। घर की चिंता खत्म हुई तो फिर बहुत से लोगों की देश की चिंता समाप्त हो गई। आखिर नशे के खिलाफ आंदोलन कमज़ोर हो गया। नशे के खिलाफ जंग में अनीता शर्मा जैसा समर्पण  और उस तरह की प्रतिबद्धता सभी के पास संभव भी नहीं। हाँ उनके पति श्री श्रीपाल शर्मा है हमेशां उनका साथ देते हैं। एंकरिंग, फोटोग्राफी और ड्राईविंग में उन्हें ख़ास मुहर्त हासिल है। कश्मीर से लेकर कन्या कुमारी तक के रुट और रास्ते उन्हें याद रहते हैं। वह गाते भी बहुत अच्छा हैं। शब्दों के उच्चारण और सांस वाली सुर पर उनकी अच्छी पकड़ है। 

नशे के खिलाफ बरसों पहले चलाए गए इस युद्ध के बहुत से अच्छे परिणाम भी निकले। 

परिवर्तन की आवाज़ें भी सामने आईं:

> “जब मेरे पति ने शराब छोड़ दी, तो हमारे बच्चों ने फिर से सपने देखने शुरू कर दिए। बेलन ब्रिगेड ने मुझे हिम्मत दी।” ---मंजीत कौर, लुधियाना

> “हम पुरुषों से नहीं, नशे से लड़ रहे हैं। क्योंकि हर शराबी पुरुष के पीछे एक महिला होती है जो अपने परिवार को बचाना चाहती है।”   --- अनीता शर्मा, संस्थापक--बेलन ब्रिगेड

आगे की राह

बेलन ब्रिगेड सिर्फ एक अभियान नहीं, यह एक सामाजिक क्रांति है।

हर महिला की आवाज़ से एक घर बचता है।

हर पुरुष की सुध से एक नई पीढ़ी जन्म लेती है।

सभी मिलकर हम पंजाब को नशामुक्त, सुरक्षित और सशक्त बना सकते हैं।

हमसे जुड़ें:

अगर आप भी इस बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं------

बेलन ब्रिगेड से जुड़िए।

आपके हाथ का बेलन सिर्फ रसोई का औजार नहीं,

बल्कि समाजिक जागरूकता और महिला शक्ति का प्रतीक है।

नशे को लेकर आप अकेले नहीं हैं...! किसी भी कठिनाई को अपनी मजबूरी न बनने दें...!

📞 हेल्पलाइन: 9417423238

#BelanBrigade #Mahilashakti  #NashaMuktPunjab

#Aneeta Sharma 

#NavkiranWomenWelfare

Thursday, October 16, 2025

NCW मेंबर ने महिलाओं की शिकायतों का मौके पर ही हल किया

Received on Thursday 16th October 2025 at 19:27 Regarding NCW Special Meeting 

बाकी पर 15 दिनों के अंदर कार्रवाई का निर्देश


लुधियाना
: 16 अक्टूबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

महिलाओं के लिए बहुत से कानून भी बने हैं और बहुत से नियम भी। इसके बावजूद महिलाओं के साथ ज़्यादतियां रुक क्यूँ नहीं रहीं? क्यूं बार बार होता है उनका उत्पीड़न। क्योंन लम्बे समय तक लटकते रहते हैं महिला उत्पीड़न के मामले? कहीं पति के अवैध संबंध, कहीं दाज दहेज के मामले, कहीं पति की दूसरी तीसरी शादी का मामला, कहीं नौकरी में बॉस का दबाव, कहीं किसी न किसी तरह की धोखाधड़ी..! आखिर क्यूँ नहीं रुकता यह अन्याय और उत्पीड़न? वैवाहिक संबंध सात जन्मों के गिने जाते थे हमारे देश की संस्कृति में।  जन्म जन्म तक साथ निभाने वाले हम लोग कहाँ आ चुके हैं? लिव इन रिलेशन में? फिर भी ज़िंदगी में न सुख न चैन? आए दिन लड़कियों की हत्याएं! आए दिन महिलाओं की मौत! देवी के नौ रूपों की पुजा करने वाला हमारा समाज...., कंजक पूजा करने वाले हम लोग...! किस की नज़र लग गई है हमें? किस गर्त में गिर चुके हैं हम?

इन कानूनों और नियमों के बावजूद इन सवालों के जवाब वही ढूंढ़ता जिसके अंदर इन घटनाओं के कारण कोई दर्द उठा होता। लेकिन भगवान ढूंढ ही लेता है जिसे लोगों के दुःख दर्द दूर करने का जरिया बनाना होता है। इस मामले में भगवान ने ढूंढा ममता कुमारी को। ममता कुमारी इस समय राष्ट्रिय महिला आयोग की एक ऐसी सक्रिय सदस्य हैं जो बरसों से महिलाओं का उत्पीड़न दूर करने के लिए पूरी तरह समर्पित है। 

नेशनल कमीशन फॉर विमेन (NCW) की मेंबर ममता कुमारी ने गुरुवार को पुलिस को निर्देश दिया कि उनके दौरे के दौरान सुनी गई महिलाओं की सभी पेंडिंग शिकायतों का 15 दिनों के अंदर हल किया जाए।

कुमारी ने अलग-अलग बैकग्राउंड की महिलाओं के साथ एक मीटिंग की, जिसमें डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन, कमिश्नरेट पुलिस, लुधियाना रूरल पुलिस और खन्ना पुलिस के अधिकारी शामिल हुए।

सेशन के दौरान, अलग-अलग इलाकों की महिलाओं ने घरेलू हिंसा, दहेज और दूसरे हैरेसमेंट से जुड़ी शिकायतें शेयर कीं। मिली 44 शिकायतों में से ज़्यादातर का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया, और बाकी मामलों के लिए सख्त आदेश जारी किए गए।

मैडम ममता कुमारी ने जल्दी समाधान का भरोसा दिया और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को हर मामले की मॉनिटरिंग के लिए एक कमेटी बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को महिलाओं के खिलाफ अत्याचार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया।

इसके साथ ममता कुमारी ने ज़ोर देकर कहा, "महिलाओं को बिना डरे शिकायत दर्ज करानी चाहिए। NCW हर महिला को न्याय दिलाने के लिए कमिटेड है।" उन्होंने उनसे महिलाओं की भलाई को प्राथमिकता देने, उनकी चुनौतियों का तुरंत समाधान करने और सपोर्ट प्रोग्राम को असरदार तरीके से लागू करने को पक्का करने की अपील की। ​​

उन्होंने 'तेरे मेरे सपने' सेंटर के बारे में भी बात की, जो सफल शादियों के लिए युवाओं को मज़बूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने बताया कि ये सेंटर शादी के इमोशनल, सोशल और साइकोलॉजिकल पहलुओं पर एक्सपर्ट काउंसलिंग देते हैं, जिससे लोगों को हेल्दी फैमिली रिलेशनशिप के लिए ज़रूरी चीज़ें मिलती हैं। 

Tuesday, September 30, 2025

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में हिंदी माह 2025 का भव्य समापन

 प्रविष्टि तिथि: 30 September 2025 at 8:56PM by PIB Delhi

महिलाओं के शक्ति स्वरुप से प्रवाहित प्रेरणा से सभी को लाभ - डॉ. प्रियंका मिश्रा

दुर्गा अष्टमी के पावन अवसर पर समापन समारोह आयोजित

नई दिल्ली: 30 सितंबर 2025: (मीडिया लिंक रविंद्र//वीमेन स्क्रीन)::

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के राजभाषा विभाग द्वारा आयोजित हिंदी माह 2025 के दौरान एक महीने तक चला समारोह विभिन्न प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण समारोह के साथ धूमधाम से आज संपन्न हुआ। केंद्र की निदेशक (प्रशासन) डॉ. प्रियंका मिश्रा ने विजेताओं को सम्मानित किया। अलग-अलग श्रेणियों में लगभग 50 प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  के विभिन्न पाठ्यक्रमों के छात्रों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। जनपद-सम्पदा प्रभाग के प्रमुख प्रो.के. अनिल कुमार भी समारोह में उपस्थित थे। राजभाषा विभाग के प्रभारी प्रो. अरुण कुमार भारद्वाज ने कार्यक्रम का सुचारू रूप से संचालन किया और कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन दिया।


इस अवसर पर, डॉ. प्रियंका मिश्रा ने हिंदी माह के सफल आयोजन के लिए राजभाषा विभाग को बधाई दी। उन्होंने दुर्गा अष्टमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम इस पावन दिन पर आयोजित हुआ इसलिए इसकी सफलता निश्चित थी। उन्होंने कहा, “मेरा मानना ​​है कि महिलाएं शक्ति का प्रतीक होती हैं और उनकी शक्ति से सभी लाभान्वित होते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “कुछ साल पहले हम हिंदी सप्ताह मनाते थे, फिर हमने हिंदी पखवाड़ा मनाना शुरू किया। इस साल हमने हिंदी माह का आयोजन किया। यह हिंदी भाषा के प्रति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।”


कार्यक्रम की शुरुआत इंद्रेश कुमार शुक्ला द्वारा स्वास्ति वचन और अरविंद कुमार शर्मा द्वारा सरस्वती वंदना से हुई। अंत में अदिति ने मधुर भक्ति गीत गाए और मनीषा पॉल ने गिटार पर भजन प्रस्तुत किया।

उल्लेखनीय है कि हिंदी माह 2 से 30 सितंबर तक मनाया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र  के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी के अनुसार, हिंदी माह मनाने का उद्देश्य हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और इसके प्रति जागरूकता पैदा करना था। इस पूरे महीने के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियाँ और प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं। इनमें पुरानी या अब कम इस्तेमाल होने वाली हिंदी शब्दावली, स्वयं रचित कविता का पाठ, स्वास्ति गायन, मंगलाचरण और भक्ति गीत, रोजमर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल होने वाले क्षेत्रीय शब्दों पर लेखन प्रतियोगिताएं और भाषाविज्ञान/सर्वेक्षण से संबंधित विषयों पर प्रतियोगिताएं शामिल थीं।

कुल मिलाकर यह एक यादगारी आयोजन रहा जिसकी यादें सभी श्रोताओं और दर्शकों ने अपने दिल दिमाग में संजो लीं। 

***//पीके/केसी/एसके//(रिलीज़ आईडी: 2173486)

Saturday, September 27, 2025

सूडान में भूखमरी की हालत लगातार गंभीर

दयनीय हालत में जी रहे हैं महिलाएं ,बच्चे और बज़ुर्ग 

WFP/Mohamed Galal. People continue to flee escalating violence in El Fasher, many arriving in Tawila with little or not. Sudan, Tawila, North Darfur.
इंटरनेट की दुनिया से: 27 सितंबर 2025: (मीडिया लिंक 32//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

इंटरनेट से सबंधित रहने का खतरा भी है कि दुनिया के हर रंग का आपको पता चलता है। वह रंग बहुत बड़ी ख़ुशी का भी हो सकता है और किसी गहरे दुःख या गहन सदमे का भी। इस बार हम चर्चा कर रहे हैं सूडान में अकाल और भुखमरी जैसी मुसीबतों की भी।  

यहां बताना ज़रूरी भी है कि इंटरनेट की दुनिया के मुताबिक सूडान इस समय दुनिया के सबसे गंभीर अकाल और भुखमरी संकट का सामना कर रहा है, जहाँ लगभग आधी आबादी, यानी 2.5 करोड़ लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं और लाखों लोग, विशेषकर बच्चे, भुखमरी के कगार पर हैं. अप्रैल 2023 के गृहयुद्ध ने इस संकट को बढ़ा दिया है, जिससे बुनियादी ढांचा तबाह हो गया है और लाखों लोग बेघर हो गए हैं. अकाल का स्तर इतना भयावह है कि विश्व खाद्य कार्यक्रम ने देश के कई हिस्सों में अकाल की पुष्टि की है और चिंता जताई है कि यह और फैल सकता है।  

भुखमरी की स्थिति का विवरण भी काम विकराल नहीं है। व्यापक खाद्य असुरक्षा भी बुरी तरह से गंभीर बानी हुई है। सूडान की लगभग आधी आबादी, यानी 25 मिलियन (2.5 करोड़) से अधिक लोग गंभीर रूप से खाद्य के मामले में असुरक्षित हैं। भूखमरी उनके सिर पर मौत बन कर मंडरा रही है। 

हकीकतें और तथ्य भी भयानक हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भुखमरी के कगार पर 6.3 लाख से अधिक लोग भुखमरी के भयानक स्तर का सामना कर रहे हैं, जो दुनिया में सबसे अधिक संख्या है। 

इसका बच्चों पर भी हो रहा है बहुत ही गहरा असर। छोटी सी उम्र अर्थात 5 साल से कम उम्र के तीन में से एक से अधिक बच्चे तीव्र कुपोषण का सामना कर रहे हैं, जो अकाल की परिभाषा से भी बहुत अधिक है।  

इस पर अकाल की पुष्टि भी हो चुकी है। सूडान के कम से कम 10 क्षेत्रों में अकाल की पुष्टि हुई है, जिनमें उत्तरी दारफुर का ज़मज़म शिविर भी शामिल है। 

चिंता की बात यह भी है कि लगातार बिगड़ता संकट स्थिति को और भी गंभीर कर रहा है। एल फशर जैसे शहरों में भोजन की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण भूख और कुपोषण से होने वाली मौतें बढ़ रही हैं। यदि इसे तुरंत नहीं रोका गया तो परिणाम विचलित करने वाले हो सकते हैं।  

इस समय भी 5 अगस्त 2025 की एक रिपोर्ट पढ़ने के बाद दिल दर्द से भर उठा है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) ने इस दिशा में बहुत सा काम किया है। दुनिया भर से छोटे बड़े संगठन इस प्रोग्राम के साथ जुड़े हुए हैं। स्थानीय स्तर से लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत से संगठन अपनी क्षमता के मुताबिक इस कायर्क्रम को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। कोशिश है इस अकाल के बावजूद कोई भी भूखमरी का शिकार न हो सके। 

इन सभी कोशिशों के बावजूद सूडान में अकाल की पहली पुष्टि के एक साल बाद, विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि एल फशर में फंसे लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। लोगों की हालत बेहद दयनीय है? क्या बच्चे क्या नदी सभी इस संकट में तड़पन झेल रहे हैं। क्या पुरुष क्या महिलाएं सभी के लिए मुसीबत बेहद खतरनाक है। महिलाओं के लिए यह अधिक गंभीर ही है। 

आप को शायद यकीन न हो लेकिन यह सच है कि एल फशर की आबादी भुखमरी का सामना कर रही है और मानवीय ज़रूरतें बढ़ती जा रही हैं क्योंकि डब्ल्यूएफपी द्वारा सूडान में किए गए प्रयासों के बावजूद, घेरे हुए शहर तक पहुँच बंद कर दी गई है।

भूखमरी लगातार फैल रही है। व्यापक क्षेत्र इसकी जकड़ में हैं। पोर्ट सूडान, सूडान - उत्तरी दारफुर में सूडान के ज़मज़म शिविर में अकाल की पहली पुष्टि के एक साल बाद, संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि घेरे हुए राज्य की राजधानी, एल फशर में फंसे परिवारों को भुखमरी का सामना करना पड़ रहा है। शहर मानवीय पहुँच से कट गया है, जिससे शेष आबादी के पास बचे हुए सीमित संसाधनों से ही जीवनयापन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

अब यह बेहद दुखद सत्य है कि विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) एक साल से भी ज़्यादा समय से एल फशर तक सड़क मार्ग से खाद्य सहायता नहीं पहुँचा पा रहा है क्योंकि वहाँ जाने वाली सभी सड़कें अवरुद्ध हैं। डब्ल्यूएफपी शहर के 2,50,000 लोगों को डिजिटल नकद सहायता प्रदान करना जारी रखे हुए है, जिससे वे बाज़ारों में मिलने वाला कोई भी भोजन खरीद सकते हैं, लेकिन यह घेरे हुए शहर की व्यापक ज़रूरतों को पूरा करने के लिए काफ़ी कम है।

WFP (डब्ल्यूएफपी) के पूर्वी और दक्षिणी अफ़्रीका के क्षेत्रीय निदेशक एरिक पर्डिसन ने कहा, "एल फ़शेर में हर कोई रोज़ाना ज़िंदा रहने के संघर्ष से जूझ रहा है। दो साल से ज़्यादा समय से चल रहे युद्ध में लोगों के हालात पूरी तरह से ख़त्म हो चुके हैं। अगर तुरंत और लगातार मदद न मिले, तो बहुत सी जानें जा सकती हैं।" अब कौन बचाएगा इन्हें ? कौन बनेगा तारणहार ? 

व्यापारिक मार्ग बंद होने और आपूर्ति लाइनें अवरुद्ध होने के कारण, ज्वार या गेहूँ जैसी बुनियादी खाद्य सामग्री, जिनका इस्तेमाल पारंपरिक रोटियाँ और दलिया बनाने में होता है, एल फ़शेर में बाकी सूडान की तुलना में 460 प्रतिशत तक महँगी हैं। युद्ध के दौरान स्थानीय समूहों ने भूखे लोगों को गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक रसोई स्थापित की थीं, लेकिन अब बहुत कम ही चल रही हैं। बाज़ारों और क्लीनिकों सहित नागरिक बुनियादी ढाँचे पर हमले हुए हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि कुछ परिवार ज़िंदा रहने के लिए पशुओं के चारे और खाद्य अपशिष्ट का सहारा ले रहे हैं। कई लोग जो भागने में कामयाब रहे हैं, उन्होंने बड़े पैमाने पर हिंसा, लूटपाट और यौन उत्पीड़न में वृद्धि का हवाला दिया है।

आठ वर्षीय सोंडोस ​​ने डब्ल्यूएफपी को बताया, "एल फशेर में भारी गोलाबारी और भूख थी। सिर्फ़ भूख और बम। इसलिए हमने एल फशेर छोड़ दिया।" सोंडोस ​​अपने परिवार के पाँच सदस्यों के साथ एल फशेर से भागी थीं, जो सिर्फ़ बाजरे पर गुज़ारा कर रहे थे। वह हाल ही में तवीला में विस्थापित हुए लगभग 400,000 लोगों में से एक हैं, जिन्हें डब्ल्यूएफपी सहायता मिल रही है।

पूरे सूडान में, डब्ल्यूएफपी हर महीने चार मिलियन से ज़्यादा लोगों तक पहुँच रहा है - अकेले मई में 5.5 मिलियन लोगों तक पहुँच बनाई गई, जो देश के सबसे ज़्यादा खाद्य असुरक्षित और सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रों में है। इसमें लगभग 1.7 मिलियन लोग शामिल हैं - अकालग्रस्त या अकाल के खतरे वाले क्षेत्रों में खाद्य असुरक्षित लोगों का 80% - और 600,000 से ज़्यादा महिलाओं और बच्चों को पोषण संबंधी पूरक आहार दिया जा रहा है।

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की सहायता से मध्य दारफुर के छह और पश्चिमी दारफुर के दो इलाकों में अकाल के खतरे को कम करने में मदद मिली है। लेकिन, बरसात के मौसम के चलते, दारफुर तक सड़क मार्ग जल्द ही बंद हो जाएगा। अगर सहायता बाधित होती है, तो नाज़ुक प्रगति के भी उलट जाने का खतरा है।

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की आपूर्ति श्रृंखला और वितरण निदेशक कोरिन फ़्लीशर ने कहा, "हमने सबसे कठिन परिस्थितियों में प्रगति की है। लेकिन अल फ़शर जैसे प्रमुख स्थानों तक पहुँच अभी भी अवरुद्ध है। हमें ज़रूरतमंद सभी नागरिकों तक पहुँचने के लिए जगह दी जानी चाहिए।"

1 अगस्त तक, WFP को सूडान के मानवीय सहायता आयोग (HAC) से पोर्ट सूडान में मानवीय सहायता के एक काफिले को अल फ़शर भेजने की मंज़ूरी मिल गई है। रैपिड सपोर्ट फ़ोर्स, जिन्होंने उत्तरी दारफुर की राजधानी को एक साल से ज़्यादा समय से घेरे में रखा है, ने अभी तक लड़ाई रोकने के लिए समर्थन नहीं दिया है ताकि मानवीय सामग्री शहर में पहुँचाई जा सके।

फ़्लीशर ने कहा, "विश्व खाद्य कार्यक्रम अल फ़शर में खाद्य सहायता से भरे ट्रक भेजने के लिए तैयार है।" 

"हमें सुरक्षित मार्ग की गारंटी की तत्काल आवश्यकता है।"

जून में एल फशर के लिए खाद्य और पोषण सामग्री ले जा रहे विश्व खाद्य कार्यक्रम और यूनिसेफ के एक संयुक्त काफिले पर हमला हुआ - पाँच लोग मारे गए और सहायता सामग्री नष्ट हो गई।

विश्व खाद्य कार्यक्रम को आपातकालीन खाद्य, नकद और पोषण सहायता जारी रखने के लिए अगले छह महीनों में 645 मिलियन डॉलर की आवश्यकता है। पाइपलाइन टूटने के कारण पहले से ही भारी नुकसान हो रहा है। पूर्वी सूडान के विस्थापन शिविरों में रहने वाले कुछ परिवार, जो दो साल से विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) की सहायता पर निर्भर हैं, अब कुछ भी प्राप्त नहीं कर रहे हैं।

Friday, August 29, 2025

अफगानिस्तान में तालिबानी कब्जे के चार साल बाद एक विशेष अवलोकन

Received From UN Women  on Friday 29th August 2025 at 2:30 PM Regarding Women in Afghanistan 

अफ़ग़ानों ने लड़कियों की शिक्षा का भारी समर्थन किया

संयुक्त राष्ट्र महिला की नई रिपोर्ट में पाया गया है कि 92 प्रतिशत अफ़ग़ान लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा का समर्थन करते हैं

संयुक्त राष्ट्र महिला द्वारा समर्थित एक व्यावसायिक प्रशिक्षण कक्षा में भाग लेती महिलाएँ।
चित्र: संयुक्त राष्ट्र महिला/सैयद हबीब बिडेल


काबुल:29 अगस्त 2025: (मीडिया लिंक32//यू एन वीमेन//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

लड़कियों को शिक्षा के नाम पर डराने धमकाने वाला अफगानिस्तान अब बदल रहा है। अब लड़कियों की शिक्षा को प्रेम की नज़र से देखने वाला सम्मान भी तेज़ी से पैदा होने लगा है। तब्दीली हैरानकुन भी है और नई उम्मीदों के रौशन होने की दस्तक भी। यह बात केवल अफगानिस्तान के लिए नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक गर्व और ख़ुशी की बात है। 

लड़कियों की माध्यमिक शिक्षा पर जारी प्रतिबंध के बावजूद, एक नए संयुक्त राष्ट्र महिला लिंग अलर्ट के अनुसार, सभी लिंग और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के अफ़ग़ान लगभग सार्वभौमिक रूप से लड़कियों के सीखने के अधिकार का समर्थन करते हैं।

यह अलर्ट शिक्षा और रोज़गार, सुरक्षा और गतिशीलता सहित दस प्रमुख क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों की वर्तमान स्थिति पर नज़र डालता है, और तालिबान के कब्जे के चार साल बाद प्रतिबंधों की क्रिस्टलीकृत प्रणाली के प्रभाव पर प्रकाश डालता है।

2,000 से ज़्यादा अफ़गानों के घर-घर जाकर किए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में, 92 प्रतिशत ने कहा कि लड़कियों के लिए अपनी स्कूली शिक्षा जारी रखना 'ज़रूरी' है, और ग्रामीण और शहरी समुदायों में इसका समर्थन किया जा रहा है।

ग्रामीण आबादी में, 87 प्रतिशत पुरुषों और 95 प्रतिशत महिलाओं ने लड़कियों की स्कूली शिक्षा का समर्थन किया, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आँकड़ा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए 95 प्रतिशत था।

अफ़गानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र महिला की विशेष प्रतिनिधि, सुसान फर्ग्यूसन ने कहा, "लड़कियाँ लगभग हमेशा सबसे पहले यही कहती हैं - वे सीखने के लिए बेताब हैं और बस शिक्षा प्राप्त करने का मौका चाहती हैं।"

"परिवार भी कहते हैं कि वे चाहते हैं कि उनकी बेटियाँ यह सपना देखें। वे जानते हैं कि साक्षरता और शिक्षा एक ऐसे देश में, जहाँ आधी आबादी गरीबी में जी रही है, एक लड़की के जीवन की दिशा बदल सकती है।"

जिन क्षेत्रों में तालिबान द्वारा गैर-सरकारी संगठनों में महिलाओं के काम करने पर प्रतिबंध कथित तौर पर लागू है, जुलाई और अगस्त 2025 में किए गए एक अलग संयुक्त राष्ट्र महिला टेलीसर्वेक्षण में, सर्वेक्षण में शामिल 97 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि इस प्रतिबंध का उनके दैनिक जीवन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

अफ़गानिस्तान में आधे से ज़्यादा गैर-सरकारी संगठन अब रिपोर्ट कर रहे हैं कि इससे महिलाओं और लड़कियों तक ज़रूरी सेवाएँ पहुँचाने की उनकी क्षमता प्रभावित हुई है।

संयुक्त राष्ट्र महिला के अफ़गानिस्तान जेंडर अलर्ट में अन्य प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:

अपने जीवन पर व्यवस्थागत और निरंतर प्रतिबंधों के बावजूद, 40 प्रतिशत अफ़गान महिलाएँ अभी भी एक ऐसे भविष्य की कल्पना करती हैं जहाँ बदलाव और समानता संभव हो - भले ही जनभागीदारी के लगभग हर रास्ते बंद हो गए हों।

जुलाई और अगस्त 2025 में किए गए एक टेलीसर्वेक्षण में, देश के सभी क्षेत्रों की लगभग तीन-चौथाई महिलाओं ने अपने मानसिक स्वास्थ्य को 'खराब' या 'बहुत खराब' बताया।

तीन-चौथाई महिलाओं ने बताया कि उनके समुदायों के निर्णयों पर उनका कोई प्रभाव नहीं है; अप्रैल 2025 में संयुक्त राष्ट्र महिला, यूएनएएमए और अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) द्वारा किए गए परामर्शों के अनुसार, आधे लोगों ने कहा कि उनके विस्तारित परिवार पर उनका कोई प्रभाव नहीं है और एक-चौथाई ने अपने घर पर;

जून 2025 में संयुक्त राष्ट्र महिला, यूएनएएमए और आईओएम द्वारा किए गए परामर्शों में, 14 प्रतिशत महिलाओं ने बताया कि वे सप्ताह में केवल एक बार ही घर से बाहर निकलती हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 2 प्रतिशत है, और केवल 41 प्रतिशत महिलाएं दिन में कम से कम एक बार घर से बाहर निकलती हैं, जबकि पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 88 प्रतिशत है।

लगता है दुनिया में नए दिन सामने आने लगे हैं। नया सूरज निकलने लगा है। बंद दरवाज़ों वाले अंधेरे घरों में शिक्षा की रौशनी दाखिल होने लगी है। इसी रौशनी से जहालत से भरे अँधेरे और जंगल हुए ज़ेहनों में भी रौशनी पहुँचने लगी है। नीअब पक्का है कि जंग और नफरत की बहुत सी बुरी खबरों के बावजूद दुनिया भर में अच्छे दिन आने वाले हैं।