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Friday, March 27, 2026

करीब 620,000 महिलाओं और लड़कियों को घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा

UN Women on Mar 27, 2026, 5:37 PM Regarding Women and Girls in Lebanon

बैरुत: 27 मार्च 2026 को जारी प्रेसब्रीफिंग की विज्ञप्ति 

लेबनान में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र महिला द्वारा प्रेस ब्रीफिंग

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जिनेवा के पैलेस डेस नेशन्स में लेबनान में संयुक्त राष्ट्र महिला प्रतिनिधि गिएलन एल मेसिरी द्वारा दिए गए भाषण के अंश।

[जैसा दिया गया।]

बेरुत – सुप्रभात। मैं आज बेरुत से आपसे जुड़ रही हूँ, जहाँ मैं लेबनान में इस नवीनतम तनाव के महिलाओं और लड़कियों पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में संक्षिप्त जानकारी दूंगी।

इस संघर्ष में महिलाओं और लड़कियों की स्थिति को समझना इस संकट के संपूर्ण मानवीय प्रभाव को समझने के लिए आवश्यक है।

2 मार्च से अब तक अनुमानित 620,000 महिलाओं और लड़कियों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

यह लेबनान की लगभग एक चौथाई महिलाओं और लड़कियों का प्रतिनिधित्व करता है, और विस्थापितों में से आधे से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करता है - जिनमें लेबनानी, सीरियाई, फिलिस्तीनी और प्रवासी समुदाय शामिल हैं।

यह तनाव ऐसे संदर्भ में बढ़ रहा है जहां महिलाओं को पहले से ही कई तरह की असमानताओं का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें आय तक सीमित पहुंच, असमान कानूनी सुरक्षा और सेवाओं तक सीमित पहुंच शामिल है।

आज विस्थापन, आजीविका के नुकसान और कमजोर समर्थन प्रणालियों के कारण ये कमजोरियां और भी बढ़ रही हैं।

मैं ऐसी महिलाओं और लड़कियों से मिली हूँ जिन्हें विनाशकारी विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ा है - बिना किसी स्पष्ट गंतव्य के रात में अपने घरों से भागना, अपने परिवारों की आजीविका खोना और अपनी सुरक्षा की भावना और उन सभी चीजों को पीछे छोड़ना जो उनके लिए परिचित हैं।

विस्थापित महिलाओं और लड़कियों में से 85 प्रतिशत औपचारिक आश्रय स्थलों से बाहर रह रही हैं। वे भीड़भाड़ वाले अपार्टमेंटों और अनौपचारिक व्यवस्थाओं में रह रही हैं, जिनमें से सबसे बड़ी संख्या बेरूत और माउंट लेबनान में है।

ये केवल कठिन परिस्थितियाँ ही नहीं हैं - बल्कि ये शोषण, दुर्व्यवहार और लिंग आधारित हिंसा सहित गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर रही हैं।

आवश्यक सुरक्षा और न्याय सेवाओं में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण, महिलाओं और लड़कियों को उल्लंघन की रिपोर्ट करना और सुरक्षा प्राप्त करना अधिक कठिन होता जा रहा है।

महिलाएं मुझे बताती हैं कि वे अपने बच्चों को खाना खिलाने के लिए खुद खाना नहीं खा रही हैं। पहले से ही कमजोर बुजुर्ग महिलाएं पुरानी बीमारियों के लिए आवश्यक दवाइयों के बिना रह रही हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ रही है।

हमें स्वच्छता सामग्री की कमी भी देखने को मिल रही है, और गर्भवती महिलाएं आश्रय स्थलों में सीमित देखभाल सुविधाओं के साथ बच्चों को जन्म दे रही हैं।

मानसिक स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें तेज़ी से बढ़ रही हैं। महिलाएं लगातार डर, नींद की कमी और थकावट का अनुभव करती हैं - साथ ही डरे हुए बच्चों को दिलासा भी देती हैं।

और फिर भी, सभी संकटों की तरह, लेबनान में महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं और राहत कार्यों में सबसे आगे रहती हैं।

वे विस्थापित परिवारों की देखभाल कर रहे हैं, सहायता का आयोजन कर रहे हैं, सहायता पहुंचा रहे हैं और तनाव को बढ़ने से रोकने में मदद कर रहे हैं - अक्सर खुद विस्थापित होते हुए भी।

संयुक्त राष्ट्र महिला लेबनान के प्रमुख विस्थापन केंद्रों में काम कर रही है-महिलाओं और लड़कियों के लिए जीवन रक्षक सुरक्षा, काम के बदले नकद सहायता और आजीविका सहायता को बढ़ा रही है, यह सुनिश्चित करने के लिए समन्वय को मजबूत कर रही है कि प्रतिक्रिया लैंगिक रूप से संवेदनशील हो, और निर्णय लेने में महिलाओं की भूमिका को बढ़ा रही है।

संयुक्त राष्ट्र महिला महासचिव के तत्काल तनाव कम करने, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का पूर्ण सम्मान करने और महिलाओं और लड़कियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए लिंग-संवेदनशील मानवीय सहायता को तत्काल बढ़ाने के आह्वान का समर्थन करती है।

धन्यवाद।

Wednesday, March 18, 2026

PAU ने कपड़े सजाने की तकनीकों पर दी ट्रेनिंग

ADC PAU on Wednesday 18th March 2026 at 10:58 AM Regarding campus training programme

ट्रेनिंग कैंपस के बाहर आयोजित की गई 


लुधियाना
: 18 मार्च, 2026: (मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन डेस्क):: 

महिला सशक्तिकरण के मकसद को और आगे बढ़ाते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के अभियान और प्रोग्राम लगातार जारी हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने 'ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव' (RAWE) कार्यक्रम के तहत कपड़े सजाने की तकनीकों पर दो-दिवसीय कैंपस के बाहर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किया। इसका उद्देश्य कपड़ा सजावट के क्षेत्र में प्रतिभागियों के कौशल और रचनात्मकता को बढ़ाना था।

इस ट्रेनिंग में कुल 20 महिलाओं ने सक्रिय रूप से भाग लिया। इस कार्यक्रम में कपड़े सजाने की कई पारंपरिक और आधुनिक तकनीकों को शामिल किया गया, जिनमें 'टाई एंड डाई', 'स्टेंसिल प्रिंटिंग', 'ब्लॉक प्रिंटिंग' और कढ़ाई की विभिन्न शैलियाँ शामिल थीं।

प्रतिभागियों को 'विस्तार शिक्षा और संचार प्रबंधन विभाग' (EECM) के विशेषज्ञों से व्यावहारिक ट्रेनिंग मिली। इससे वे इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग को सीख पाए, जिसका इस्तेमाल वे अपने निजी उपयोग के साथ-साथ संभावित व्यावसायिक उद्यमों के लिए भी कर सकते हैं।

यह ट्रेनिंग EECM विभाग की प्रमुख डॉ. रितु मित्तल गुप्ता के मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले सजावटी कपड़ा उत्पाद बनाने में रचनात्मकता, रंगों के सही मेल, सही कपड़े के चुनाव और 'फिनिशिंग' तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।

पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों में काफी उत्साह देखने को मिला और उन्होंने व्यावहारिक सत्रों में सक्रिय रूप से भाग लिया। ट्रेनिंग का समापन प्रतिभागियों द्वारा तैयार की गई वस्तुओं की प्रदर्शनी के साथ हुआ, जिसमें उन्होंने कार्यक्रम के दौरान सीखे गए कौशल और तकनीकों का प्रदर्शन किया।

Friday, March 6, 2026

महिला सशक्तिकरण कोई ट्रॉफी नहीं--अनीता शर्मा

Ani Sharma on Friday 6th March 2026 at 3:14 PM Regarding Women Empowerment 

यह हर दिन के फैसलों से हासिल होने वाला अधिकार है

आर्थिक आत्मनिर्भरता और मानसिकता में बदलाव से ही संभव है वास्तविक सशक्तिकरण

महिला दिवस केवल उत्सव नहीं, समाज में बदलाव का अवसर

लुधियाना: 6 मार्च 2026: (मीडिया लिंक टीम//वीमेन स्क्रीन डेस्क)::


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर
नवकिरण वूमेन वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से महिला सशक्तिकरण विषय पर एक चर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अगुवाई संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनीता शर्मा ने की।

इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अनीता शर्मा ने कहा कि महिला दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि समाज में मानसिकता परिवर्तन का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि वास्तविक सशक्तिकरण तभी संभव है जब इसे केवल चर्चा तक सीमित न रखकर व्यवहार और कार्य में उतारा जाए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण का सबसे मजबूत आधार आर्थिक आत्मनिर्भरता है। इसके लिए महिलाओं को आधुनिक दौर के अनुरूप कौशल जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल मार्केटिंग और कोडिंग सीखने के अवसर मिलने चाहिए। साथ ही वित्तीय साक्षरता के माध्यम से निवेश, बचत और टैक्स की बुनियादी जानकारी भी जरूरी है।

अनीता शर्मा ने कहा कि सशक्तिकरण की शुरुआत घर से होती है और घरेलू जिम्मेदारियों में समान भागीदारी आवश्यक है। बेटियों को केवल पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्वतंत्र सोच और निर्णय लेने की शक्ति दी जानी चाहिए।

उन्होंने समाज और कार्यस्थलों पर सुरक्षित व समावेशी वातावरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया तथा कहा कि महिलाओं को समान अवसर मिलने के साथ-साथ नेतृत्व की भूमिकाओं में भी उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।

अंत में उन्होंने कहा कि इस महिला दिवस पर हम एक छोटा संकल्प लें—

किसी एक महिला के कार्य या विचार की खुलकर सराहना करें और उसे आगे बढ़ने के लिए समर्थन दें।

अनीता शर्मा ने ज़ोर देकर दोहराया कि कहा,

“सशक्तिकरण कोई ट्रॉफी नहीं है जिसे दिया जाता है, यह वह अधिकार है जिसे हम हर दिन के छोटे-छोटे फैसलों से सुरक्षित करते हैं।

Tuesday, February 24, 2026

संस्कार भारती की नव वर्ष कार्यक्रमों को लेकर प्रारंभिक बैठक सम्पन्न

Pardeep Sharma IPTA on Tuesday 24th February 2026 at 13:44 Regarding Sanskar Bharti Meeting 

अप्रैल में एक संगीत कार्यक्रम कराने का निर्णय भी लिया गया


लुधियाना
: 24 फरवरी 2026: (प्रदीप शर्मा इप्टा// वीमेन स्क्रीन डेस्क)::

जो लोग और संगठन आम जनता और खास कर युवा वर्ग में अच्छे संस्कार पैदा करने के लिए सक्रिय हैं उनमें से संस्कार भारती भारतीय कला, ललित कला और संस्कृति को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय संगठन है। राष्ट्रिय भावना से प्रेरित यह सांस्कृतिक संगठन है। सन 1981 में इसकी स्थापना लखनऊ में हुई थी। यह संस्था कला के माध्यम से राष्ट्रभक्ति जगाने, सांस्कृतिक प्रदूषण को रोकने और भारतीय परंपराओं के संरक्षण के लिए कार्य करती है। इसके मार्गदर्शक मण्डल में नानाजी देशमुख, भाऊराव देवरस, और बाबा योगेंद्र प्रमुख थे। अपनी स्थापना के समय से ही यह संगठन अच्छे संस्कारों को जन जन तक पहुंचाने के लिए सक्रिय हो कर काम कर रहा है। एकता अखंडता और मानवता इसके प्रचार का अक्सर फॉक्स रहते हैं। 

इसकी बहुत सी गतिविधियाँ साल भर जारी रहती हैं।  'कला साधक संगम' (वार्षिक अधिवेशन), रंगोली, चित्रकला, संगीत, नाटक और शास्त्रीय नृत्य विधाओं का आयोजन इनमें से प्रमुख हैं। 

इस संगठन का दृष्टिकोण कला को 'सॉफ्ट पावर' मानकर भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता को स्थापित करना रहता है। यह संगठन जातिवादी ए क्षेत्रवादी विचारों से बहुत ऊपर उठ कर काम करता है। 

इसका कार्यक्षेत्र बहुत विस्तृत है। देश भर में अपनी शाखाओं और सदस्यों के माध्यम से पारंपरिक कलाओं को नई तकनीक से जोड़ना भी इस संगठन के लिए प्रमुख रहता है। 

संस्कार भारती का नारा है- "संस्कार भारती भारते नवजीवनम साधयति" (संस्कार भारती भारत में नवजीवन प्रदान कर रही है)। 

अब संस्कार भर्ती फिर से सक्रिय है। नव वर्ष में प्रस्तावित सांस्कृतिक गतिविधियों की रूपरेखा तय करने के उद्देश्य से संस्कार भारती की एक साधारण बैठक लुधियाना क्लब में आयोजित की गई।

बैठक में डॉ. बबीता जैन, प्रदीप शर्मा, बेनू सतीश कांत, सीमा भाटिया, अनमोल शुभंम, संगीता भंडारी, डॉ. पूनम सपरा, जसप्रीत मोहन सिंह, मोनिका कटारिया, शांति जैन एवं अंकिता उपस्थित रहे।

बैठक में अप्रैल माह में एक संगीत कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के चयनित बच्चों को एक मंच पर लाकर प्रतियोगिता करवाई जाएगी। प्रतियोगिता में उत्कृष्ट चार प्रतिभागियों को मोमेंटो तथा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।

इसके अतिरिक्त, महिलाओं की कला से जुड़े एक विशेष सर्वेक्षण की योजना भी तय की गई, जिसके माध्यम से उन महिलाओं को चिन्हित किया जाएगा जिन्होंने अपनी कला को निरंतर जीवित रखा है अथवा जो विभिन्न कारणों से अपनी कला को आगे नहीं बढ़ा सकीं। यह पहल उन्हें पुनः कला के क्षेत्र से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

बैठक में अगले माह के अंत में एक कवि दरबार आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया, जिससे साहित्यिक सृजन और संवाद को मंच मिल सके।

संस्कार भारती के नए आयोजनों और अन्य प्रोग्रामों की जानकारी सुश्री बेनू सतीश कॉंत ने दी मीडिया को दी। सुश्री बेनु सतीश कान्त स्वयं भी बहुत अच्छी लेखिका हैं।  

अंत में चाय-नाश्ते के साथ बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई।

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